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Tuesday, August 28, 2018

हिंदी प्रचार।

पूज्य प्रधान मंत्री महोदय ,

नमस्ते ! दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा ,चेन्नई ,गांधीजी स्थापित संस्था का शताब्दी वर्ष ,

केवल बाह्याडम्बर के लिए बड़ी बड़ी इमारतें
अंग्रेज़ी माध्यम पाठशालाएं ,

इसकेलिए कार्यकर्ताओं से जबरदस्त एक महीने का वेतन ,
हिंदी प्रचारक तमिलनाडु के सच्चे सेवक
उनसे सरकारी मान्यता जो एक साल के एक बार देते हैं ,
उनसे जबरदस्त दान,
तमिलनाडु हिंदी विरोध कहकर मनमाना प्रमाण पत्र , परीक्षा शुल्क ,दान , किताब खरीदना है , नहीं तो परीक्षा नहीं दे सकते। एक घर में तीन लोग एक ही परीक्षा देनी है तो तीन किताबें जबरदस्त सर पर मढ़ना कहाँ तक सार्थक है. बाह्याडम्बर दिखाने इमारत के लिए आंशिक पूर्णकालीन विद्यालय के गरीब प्रचारकों से पचास हज़ार तक दान लेना क्या न्याय है? मोहनदास करमचंद गांधी जी की आत्मा रोयेगी ज़रूर। जहाँ हिंदी प्रचार मुफ़्त में करना है , वहाँ परीक्षा शुल्क ,अनिवार्य किताब बिक्री , अनिवार्य दान। केवल इमारत  बनवाकर लूटने।

हर एक परीक्षा केंद्र में नक़ल ,
सातवीं कक्षा में बी.ए समकक्ष प्रवीण प्रमाण पत्र ,
विद्यार्थी मेला द्वारा प्रश्न पत्र का व्यापार,
चुनाव में कितना भ्रष्टाचार,
प्रमाणित प्रचारक संख्या ,
कुछ प्रलोभन से बिना चुनाव के सदस्य चुनना ,
बी.एड, कालेज में मनमाना लूट ,
केवल तमिलनाडु में ही हिंदी प्रचारक त्यागमय
जीवन बिता रहे हैं ;
सभा की गतिविधियों के लिए एक जाँच आयोग नियुक्त करेंगे तो
प्रचार सभा के भ्रष्टाचारों का , कार्यकर्ता और प्रचारकों के त्यागमय जीवन का पता चलेगा।

मनमाना वसूल कर इमारतें , पर शताब्दी वर्ष में सभा के कार्यकर्तावों को बोनस न देकर ,
प्रचारकों को प्रोत्साहन न देकर दान दान दान वसूल .
तोरण द्वार के लिए बीस लाख ,
पर कार्यकर्ता और प्रचारक के लिए क्या किया है?

क्वाटर्स बनाना ठेकेदार लाभ के लिए.
सभा का विस्तृत मैदान अंग्रेज़ी के विकास के लिए ,
मनमाना लूटने .
सभा का उद्देश्य हिंदी प्रचार --
पर प्रचारक को कमीशन एजेंट बना रही है सभा.
अंग्रेज़ी ज्यादा बोलनेवाला अहाता।

आशा है सच्चे दिलसे जांच कर
योग्य प्रचारकों द्वारा हिंदी प्रचार करने की कार्रवाई
प्रधान मंत्री लेंगे।
धन्यवाद !

Sunday, August 26, 2018

Hindi

हिंदी  सुखात्मक भाषा.
अपने आप पली,
सबके अधर
 गुनगुनाने  लगे
बढा, पर हीरे  को
चमकाने का जौहरी
सरकार  नहीं.
पुरातन भारत  की कलाएँ
बगैर अंग्रेज़ी  के
बगैर सिविल इंजनीयरिंग  के
पहाड को काटकर बनाये मंदिर गोपुर.
गजरोहा के सांसरिक दिव्य चेतना
ब्रह्मचर्य, संयम   की सीख
निस्पृह  जीवन
सादा जीवन उच्च  विचार.
अब नहीं  बाह्याडंबर
वैज्ञानिक तरक्की,
हर साल तकनीकी परिवर्तित
गाडियाँ,  मोबाइल, द्विचक्री  .

भगवान,  संत,  नेताओं को
रुपयों  का माला, ऐसे
परिवर्तित  जीवन में,
नौकरी की आशा  न होने पर भी
भारतीय  भाषा प्रेमी.
हिंदी को ज़िंदा रखने
 कुछ न कुछ करते ही रहते हैं. 🌁

Saturday, August 25, 2018

नयी कल्पना -नया कथानक


स्वरचित रचना ,
दिमाग टटोलकर ,
रचना लिखने
ढूँढ रहा हूँ।

विषय? कथानक ?
बच्चे गैर कानूनी
कबीर हैं। कर्ण है।
निर्दयी शिशु हत्याएँ ,
नदी में अवैध बच्चे को बहा देना ,
कन्या अपहरण ,

नपुंसक की शादी ,
बहुत सोचता हूँ
सभी युगों की बात।
दूसरी पत्नी को उठा लेना
रावण तो
छद्मवेष में अहल्या से इंद्र का सम्भोग शाप.
त्रेता युग , द्वापर युग, कलियुग
वैज्ञानिक खोजों से
युग तो परिवर्तित ,
बर्तन नए नए धातु के
प्लास्टिक ,ग्लास , माइक्रो ओवन ,

पकाने की विधि परिवर्तन ,
स्वाद में ,वास में
मूल तो वही,
कैसे आएगी नयी रचना?
खलनायक एक सामान सभी युगों में,
हथियार तो अब बन्दूक ,
तलवार की निर्दयता बन्दूक से
पहले आमने -सामने
अब चुपके छिपके ,
नयी कल्पना
नयी कहानी ,
कुछ भी नहीं ,
मैं सब में पुरानी
बातों की कल्पना
देखता हूँ , प्रमाण भी दे सकता हूँ.

Thursday, August 23, 2018


4 mins

धैर्य लक्ष्मी धैर्य दें
विजय लक्ष्मी विजय दें , दिलाएँ , दिलवाएँ ,
वीर लक्ष्मी वीर बनाएँ।
संतानलक्ष्मी संतान दें.
धान्य लक्ष्मी धान्य दें।
भाग्य लक्ष्मी भाग्योदय करें।
सब मिली हुयी शक्ति महा लक्ष्मी
संसार को , सर्वजनों को ,
न्याय ,ईमानदार ,निस्वार्थ , लोभ रहित
ज्ञान देकर समृद्ध -संपन्न रखें

निर्दयी नाम लेता है ईश्वर।

भगवान एक बागवान ,
रंग बिरंग के फूल ,
रंगबिरंगे मनुष्य ,
रंग बिरंगे विचार ,
तरह तरह के रोग ,
सबको पालनहार भगवान
कुछ पौधोंको पानी देता है ,
कुछ को छोड़ देता है
अल्पायु ,मध्य आयु में ही
निराई कर देता है.
कुछ पर ध्यान ही नहीं देता।
वह जिम्मेदारी है प्रार्थना सुनने पर ,
गैर जिम्मेदारी खुद ध्यान न देने पर,
निर्दयी प्रार्थना न सुनने पर.
प्रार्थना वह सुनता ही है,
पर ध्यान में मन मानव का नहीं लगता।
चंचल ,अविश्वास ,ईश्वर और अपने बीच
दलाल की खोज
मनुष्य को बीच धार छोड़
निर्दयी नाम लेता है ईश्वर।

Tuesday, August 21, 2018

मानव और ईश्वर

नमस्कार. 
भगवान,
ईश्वर,
देव,
गणेश, कार्तिक, शिव, दुर्गा,
विष्णु, राम, कृष्ण, अल्ला, ईसा,
नाम ही है भिन्न.
कर्म है लोक रक्षा,
तटस्थ  दंड/पुरस्कार.
हर नाम के अनुयायी
सब के सब सुखी नहीं,
सब के सब दुखी नहीं,
सबके सब ज्ञानी  नहीं,
सब के सब बुद्धु  नहीं,
.सब के सब स्वस्थ नहीं,
सबके सब रोगी नहीं,
असीम भूभाग,
अनंत आसमान,
एक ही सूर्य,
एक ही चंद्र
पर
एक समान
रोशनी नहीं,
एक समान
गर्मी नहीं.
एक समान
शीतल नहीं,
 वनस्पति हरियाली,
छाया
भिन्न भिन्न.
गुण, स्वाद में भी भिन्न..
देखिए, मीठा फल मीठा ही है,
खट्टा खट्टा ही,
कडुआ कडुआ ही.
बदलना मुश्किल.
पर मानव के गुण में
प्रेम, दया, परोपकार,
स्वार्थ, लोभ,
डर, निडर,
कायर, ज्ञानी,
अज्ञानी,
चतुर ,
चालाक,
ईमान
बेईमानी
 संगति के अनुसार,
बदल सकते हैं,
अत्याचार  क्रूर शासक,
सुशासन बने,
 बनाया, बनवाया
देखा ,
गर्मी में स्वीडन की गर्मी
हिमाचल मेंकैसे?
दक्षिण के  सुखी मौसम,
पाश्चात्य देश में कहाँ?
धनी सुखी नहीं,
गरीबी दुखी नहीं,
कर्म फल ही प्रधान.
अमीर गरीब बनता
देखते हैं.
पापी सुखी,
पुण्यात्मा दुखी.
ईश्वरीय लीला अति सूक्ष्म..
ईश्वर के नाम में
पुण्य प्रचार,
ईश्वर के नाम लेकर
 अपहरण  ,लूट..
विचित्र  जग में,
सब को समान दंड मृत्यु.

Thursday, August 16, 2018

அடல் பிஹாரி வாஜ்பாய் கவிதை

முன்னாள் பாரதப் பிரதமர் இன்று இறைவன் அடி சேர்ந்து விட்டார். ஆனால் அவர் ஆத்மா
இங்குதான் இருக்கும். இறைவனுக்குள்
ஐக்கியம் ஆவதை விட அவர் ஆத்மா
பாரதத்தில் ஐக்கியமாகும் .
அவர் கவிதைகள் அனைத்தும் காஷ்மீர் முதல் 
கன்னியாகுமரிவரை ஐக்கியப்படுத்துவதே.
அதற்காக அவர் செய்த அரிய பெரிய சாதனை
தேசீய நெடுஞ்சாலை.
உண்மையான தேசத்தொண்டர் . அவரைப் பற்றி
நாம் சிந்திப்போம் .
அவர் அமரகவிதைகளில் ஒன்று.
ஆகஸ்ட் பதினைந்து சொல்கிறது :
அடையவில்லை சுதந்திரம்
இப்பொழுதும் முழுமை .
நமது கனவுகள் மெய்யாவது மீதம் இருக்கிறது.
ராவி ஆற்றங்கரை சபதம் இன்னும்
முழுமை யடையவில்லை.
அந்த தியாகிகளின் பிணங்கள் மேல்
கால் வைத்து விடுதலை
பாரதத்திற்கு வந்தது.
அவர்கள் இப்பொழுதும்
நாடோடிகள்.
துன்பத்தின் கருமேகங்கள்
சூழ்ந்துள்ளன.
கொல்கொத்தாவின்
நடைபாதையில் புயலை
சகிக்கிறார்கள் .
பதினைந்து ஆகஸ்ட் பற்றி
அவர்களிடம் கேளுங்கள் .
என்ன சொல்கிறார்கள் என?
ஹிந்துக்களாக அவர்கள்
சொல்வதைக்கேட்டு
நாணம் வரவில்லையா ?
எல்லையின் அப்பக்கம் செல்லுங்கள்
நாகரீகம் நசுக்கப்படுகிறது.
மனிதன் அங்கே விற்கப்படுகிறான் .
நேர்மை நாணயம் வாங்கப்படுகிறது .
இஸ்லாமியர்கள் தேம்பித்தேம்பி அழுகிறார்கள்.
புன்னகைக்கிறது
மனதிற்குள் டாலர் .
பசியில் வாடுபவர்களுக்கு
தோட்டா கொடுக்கப்படுகிறது .
ஆடையில்லாதவர்களுக்கு
ஆயுதங்கள் அணிவிக்க்கப் படுகின்றன.
தாக்கத்தால் தவிப்பவர்களிடம்
ஜகாத் முழக்கங்கள்
முழங்க வைக்கிறார்கள்.
டாக்க , கராச்சி , லாகூரில்
கேட்கிறது மரண ஓலம் .
பக்தன் ,கில்கித்த்தில்
துன்பப்படுவோரின்
அடிமைகளின் நிழல் .
அதனால் தான்
சுதந்திரம் முழுமையாக
கிட்டவில்லை என்கிறேன்.
நான் எப்படி சுதந்திரத்தைக்
கொண்டாடமுடியும் ?
துடுப்பாட்ட பாரதத்தை
மீண்டும் இணைப்போம்.
அகண்ட பாரதமாக்குவோம் .
கில்கித்த்தில் இருந்து காரோ மலை வரை
விடுதலை நாள் கொண்டாடுவோம்.
இன்றே தயாராவோம்.
அந்த பொன் நாளுக்காக .
பெற்றதை இழக்கக்கூடாது .
இழந்ததை நினைவில் கொள்வோம்.
(பாரதப்பிரதமர் ஸ்வர்கீய அடல் பிஹாரி வாஜ்பாய். )
தமிழாக்கம் : எஸ் .அனந்தகிருஷ்ணன்.

पंद्रह अगस्त का दिन कहता:
आज़ादी अभी अधूरी है।
सपने सच होने बाकी है,
रावी की शपथ न पूरी है॥
जिनकी लाशों पर पग धर कर
आज़ादी भारत में आई,
वे अब तक हैं खानाबदोश
ग़म की काली बदली छाई॥
कलकत्ते के फुटपाथों पर
जो आँधी-पानी सहते हैं।
उनसे पूछो, पंद्रह अगस्त के
बारे में क्या कहते हैं॥
हिंदू के नाते उनका दु:ख
सुनते यदि तुम्हें लाज आती।
तो सीमा के उस पार चलो
सभ्यता जहाँ कुचली जाती॥
इंसान जहाँ बेचा जाता,
ईमान ख़रीदा जाता है।
इस्लाम सिसकियाँ भरता है,
डालर मन में मुस्काता है॥
भूखों को गोली नंगों को
हथियार पिन्हाए जाते हैं।
सूखे कंठों से जेहादी
नारे लगवाए जाते हैं॥
लाहौर, कराची, ढाका पर
मातम की है काली छाया।
पख्तूनों पर, गिलगित पर है
ग़मगीन गुलामी का साया॥
बस इसीलिए तो कहता हूँ
आज़ादी अभी अधूरी है।
कैसे उल्लास मनाऊँ मैं?
थोड़े दिन की मजबूरी है॥
दिन दूर नहीं खंडित भारत को
पुन: अखंड बनाएँगे।
गिलगित से गारो पर्वत तक
आज़ादी पर्व मनाएँगे॥
उस स्वर्ण दिवस के लिए आज से
कमर कसें बलिदान करें।
जो पाया उसमें खो न जाएँ,
जो खोया उसका ध्यान करें॥