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Monday, October 22, 2018

आत्मावलोकन

आत्मावलोकन
खुद को सांचे में डालना।
खुद को परिमार्जित करना।
क्या हम भी जग -कल्याण के लिए
जहां की जागृति के लिए
विषम विषय वासना से
लौकिकता से
अलौकिकता की और बातें छोड़
चलवाने -चलने -चलाने -
सबहीं नचावत राम गोसाई की चिंतन में
कुछ करने प्रार्थना कर सकते हैं.
एक न एक दिन जग में
सहोदर भावना , अहिंसा भाव
वासुदेव कुटुंब भाव
सखा -सखी भाव
फैलाने का आत्मावलोकन।
आत्म चिंतन।
यही प्रार्थना एकांत में
जागना -जगना -जगाना।

बहाना चाहिए

छुट्टी चाहिए या छूट चाहिए 
जूठन खाना है या फेंकना है 

मिलना है या मिलाना है 
प्यार करना है या ठुकराना है 
साथ देना है या साथ छोड़ना है 
कर्जा देना है या कर्जा चुकाना है 
लेनदेन से बचना है या 
लेकर न देना है या देकर न लेना है 
हर बात के लिए 
चाहिए एक बहाना। 

जी चुराना है या जी में बसना बसाना है 
प्रशंसा कानी है या निंदा 
हर बातको चाहिए बहाना।
भले ही वह सच हो या झूठ.
सच्चा बहाना एक ही। 
झूठ का बहाना अनेक। 
बहाना सत्य गौरव की बात. 
बहाना झूठा एक दिन 
करेगा मुख का काला। 
दीर्घ अपमान।
स्वचिंतक - स्वरचित - यस। अनंत कृष्णन।

हिन्दू धर्म

हिन्दू धर्म एक सागर है.
जग के लोग भारत आया करते हैं.
यहां की अमीरी ,
यहाँ  की शिल्पकला ,
यहाँ  के कुटिर  उद्योग
यहाँ  की हर कला
उनको आकर्षित करती हैं।
उनको सबसे बड़ा
 आश्चर्य यहाँ की गरीबी ,
लोगों के व्यवहार ,
फुटपात पर किसी चिंता के
मीठी नींद सोनेवाले ,
यहां के साधू-संत जीवन ,
यहाँ की प्राकृति सुषमा ,
उर्वर भूमि ,
परिश्रमी किसान
अंत में वे जान लेते हैं
आध्यात्मिक लोगों की चालाकी
चतुराई ,उनके आकर्षक मन्त्र ,
मनमोहक नाच ,गान ,संगीत।
देशोन्नति और उन्नति की बाधाएँ
देशवासियों की एकता और विविधताएँ
एक बाइबल ,एक कुरआन
एक मार्ग ईश्वर आराधना से
जीने वाले ,
यहाँ  की असंख्य मूर्तियों की पूजा,
बाह्याडम्बर पूर्ण मंदिर ,
 मंदिर के अंदर बाहर की दुकानें ,
ठगने के दाम ,ठगने की पूजा,प्रायश्चित्त।
अघोरी जैसे नंगे जीवित भक्त ,
रविशंकर ,नित्यानंद ,आसाराम जैसे
सच्चिदानंदा,सत्य साई ,शिरडी साई जैसे
बाह्याडम्बर से धनि आश्रम
एक शिव,उपासक दल अनेक।
एक विष्णु उपासकों के भेद।
ईश्वर के विचित्र रूप ,
भय भीत दुर्गा काली की मूर्तियाँ।
इतना होने पर भी ईश्वर से भय भीत वर्ग ,
ईश्वर के नाम त्याग ,
ईश्वर के नाम लेकर लूट -ठग।
वापस जाते हैं परेशानी से।
यहाँ के योग ,यहाँ की शांति।
यहाँ के वियोग ,यहाँ की अशांति
कुछ भी न समझ सकते।
यह दैविक देश या माया -शैतानिक देश.
पर दिव्य शक्ति को  मानकर
अनुसरण कर  प्रशंसा करके जाना
गजब की बात.




Sunday, October 21, 2018

दुर्गा पूजा की चर्चा ?



Anandakrishnan Sethuraman 


Anandakrishnan Sethuraman दुर्गा पूजा की चर्चा ? कैसी चर्चा ?
तीन दिन शक्ति प्रदान के लिए ;
काया सही नहीं तो 
मनुष्य वाग्वीर .
न कर सकता कोई क्रिया।
अतः पहले तीन दिन शक्ति देने 
शक्ति की पूजा।
अगले तीन दिन धन रहित 
न कोई काम.
भूखा भजन नहीं गोपाला!
नंगा तो अघोरी हो सकता हैं 
बिन पैसे कपडे कहाँ ?
धन के बिना हम एकलव्य नहीं ,
अंगूठा देने उतने गुरु भक्त नहीं।
शक्ति-धन हो तो विद्या गुलाम।
दिमागी काम को टुकड़े दे दो ,
बनो कालेज का मालिक।
शिक्षा तेरे नाम लेकर प्रशंसा करेगी।
आज कल निजी महाविद्यालय के प्रोफेसर को 
वेतन पाँच हज़ार से पंद्रह हज़ार।
हर जैसे में धनियों का ,
उन दानियों का सम्मान जो 
दस लाख से करोड़ तक लेते दान। 
कालेज मेडिकल इंजिनीरिंग हो तो 
मालामाल।
पहली श्रेणी के स्नातकोत्तर सलाम करता रोज़.
अंतिम तीन दिन सारस्वती की पूजा।

दुर्गा की भव्य मूर्ति का ,जिनको कलाकार 
अति परिश्रम से अति श्रद्धा से अति सुन्दर बनाता 
उस दुर्गा की मूर्ति को 
लापरवाही से विसर्जन के नाम फेंकते अपमानित। 
यों ही गणेश चतुर्थी का. 
यदि विदेशी करें तो चीखते -चिल्लाते 
पर हिन्दू करता छिन्न भिन्न।
तीन दिन शक्ति प्रदान के लिए ;
काया सही नहीं तो 
मनुष्य वाग्वीर .
न कर सकता कोई क्रिया।
अतः पहले तीन दिन शक्ति देने 
शक्ति की पूजा।
अगले तीन दिन धन रहित 
न कोई काम.
भूखा भजन नहीं गोपाला!
नंगा तो अघोरी हो सकता हैं 
बिन पैसे कपडे कहाँ ?
धन के बिना हम एकलव्य नहीं ,
अंगूठा देने उतने गुरु भक्त नहीं।
शक्ति-धन हो तो विद्या गुलाम।
दिमागी काम को टुकड़े दे दो ,
बनो कालेज का मालिक।
शिक्षा तेरे नाम लेकर प्रशंसा करेगी।
आज कल निजी महाविद्यालय के प्रोफेसर को 
वेतन पाँच हज़ार से पंद्रह हज़ार।
हर जैसे में धनियों का ,
उन दानियों का सम्मान जो 
दस लाख से करोड़ तक लेते दान। 
कालेज मेडिकल इंजिनीरिंग हो तो 
मालामाल।
पहली श्रेणी के स्नातकोत्तर सलाम करता रोज़.
अंतिम तीन दिन सारस्वती की पूजा।

दुर्गा की भव्य मूर्ति का ,जिनको कलाकार 
अति परिश्रम से अति श्रद्धा से अति सुन्दर बनाता 
उस दुर्गा की मूर्ति को 
लापरवाही से विसर्जन के नाम फेंकते अपमानित। 
यों ही गणेश चतुर्थी का. 
यदि विदेशी करें तो चीखते -चिल्लाते 
पर हिन्दू करता छिन्न भिन्न।

हमारा आत्म मंथन

हमारा आत्म मंथन
आज मेरे मन में उठे जागृति विचार
हिन्दू करता गर्भ विच्छेद ,
मुग़ल -ईसाई कहता -महा पाप.
हिन्दू प्रायश्चित्त पूर्वजों के गर्भ विच्छेद के लिए नहीं ,
शिशु हत्या पाप के लिए नहीं ,
करता कल सर्प दोष कहकर
नाग शिला रखता।
यह विचित्र नीति ज्योतिषों ने कह
गर्भ विच्छेद पाप का प्रायश्चित्त
नाग सर्प दोष के नाम से।
हँसी ही आती ;
मेरे अनुभव में कोई हिन्दू
नाग को दूध पिलाकर पूजा ही करता।
मुग़ल -ईसाई गर्भ -विच्छेद को महा पाप कह
महा संख्यक बन रहे हैं अल्प संख्यक।
अल्प संख्यक हो रहे हैं महा संख्यक।
हिन्दू तिलक के नाम पर टुकड़े ,
संस्कृत वेद ,तमिल -वेद के नाम लेकर मुकद्दमा,
शिव -वैष्णव के टुकड़े।
दक्षिण कला -उत्तर कला -मुकद्दमा
परिणाम तमिलवेद को अदालत ने न पढ़ने का सरकारी आदेश।
ऐसी अल्पता के लिए लड़ ,
महा संख्यक अल्पसंख्यक बनने से जागना है, जगाना है.
समझाना -समझना है।
स्वरचित -यस। अनंतकृष्णन

Friday, October 19, 2018

मैं आ गया घर.

घर  आ गया।

मैं जवानी से बुढ़ापे तक भटकता रहा.
बच्चे हुए ,न  पूरे नाम की याद।
न जन्म दिन की याद ;
न नक्षत्र की याद.
बच्चोको पालना है,
बच्चों  को अच्छी शिक्षा देना है.
बच्चों को पत्नी  को सुखी रखना है.
अब  घर वापस आगया।
जवानी  ें दौड़ घूप।
अब बुढ़ापा आगया।
शरीर शिथिल।
विचार शिथिल।
घर आया तो बच्चे विदेश  में.
बेटी ससुराल   में.
पत्नी  बुढ़ापे   में ,
वही रसोई घर।
धोबिन ,रसोइया ,धाय।
अब      मैं और  वह
बुढ़ापा  आगया।
जवानी में दोनों अकेले मिलने
बहुत कष्ट उठाते ;
माँ -बाप -बहन -भाई।
आते -जाते रिश्तेदार।
अब भी वैसा ही प्यार।
कोई नहीं घर में ;
एकांत हमारा राज्य ;पर
दिल   में पुत्र -पुत्री।
पोते -पोती की तस्वीरें जमाकर
अकेले बूढ़े-बूढ़ी
एक दुसरे को गोली देकर
आशा निराशा काल की याद में
नन्हें नन्हें बच्चों की याद में
दिन कटा रहें हैं ,
मैं आ गया घर.


विष ही निकला--दुःख प्रद .


सब में अनुकूलता
सब में प्रतिकूलता
एक न्यायाधीश का फैंसला
दुसरे बदलते।
चारों के फैंसले ,
एक महिला न्यायाधीश से न माना।
आज केरल में क्रांति
चारों न्यायाधीश के फैसले के विरुद्ध।
कोई भी न करता आत्ममंथन।
अदालत पर.न विश्वास .
छात्र पर अध्याकिया ने बलात्कार।
आश्रमाचार्य शिष्या पर बलात्कार
अवैध सम्बन्ध का अदालत ने मान्यता।
बहिरंग चुम्बन करने का आंदोलन।
कहीं भी न रहा निष्कलंक वातावरण।
ऋषि -मुनियों के देश में
अपहरण की कथाएं राम राज्य में ,
कृष्ण राज्य में
कलियुग में तो
खान वंश बन गया गांधी वंश।
न हिन्दू में अनुशासन।
न मुसलामानो में ,न ईसाई में.
आत्मंथन छोड़
पराई का मंथन।
समलिंग विवाह अनुमति।
आत्ममंथन भारत का वेदना से भरी।
आध्यात्मिक भूमि ,आज बदल रहा है
बलात्कार की भूमि।
पुरुष रक्षक संघ
पुरुष प्रधान देश में.
तलाक शब्द रहित देश में
तलाक मुकद्दमा संख्या अधिक।
हमारा आत्ममंथन
भावी पीढ़ी सोच
विष ही निकला--दुःख प्रद .