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Friday, December 7, 2018

प्रकृति (मु )

चाँद -सी चंद लोग.
सूर्योदय -सूर्यास्त की लालिमा सा चंद लोग.
दोपहर की तपती धूप सी चंद लोग.
तारे से अति दूर से अपने
अस्तित्व  दिखाते कुछ लोग.
  समुद्र का तरंगों  जैसे बहु विचारवाले,
चंचल मन वाले, बीच समुद्र सा शांति प्रद.
उनमें कितने जीवन जंतु,
विषैले,आदमखोर,आहार प्रद, आय प्रद
अपूर्व, अनूठा जल पशु,
क्रूर, शांत, रंगीले,मन मोहक, घृणाप्रद,
 समुद्रतट की शीतल हवा,
समुद्र विसर्जन की अस्तियाँ,
गणेश की मूर्तियाँ, पाखाना,
आत्म हत्या या आनंदविभोर लहरों द्वारा आत्मसात,
 शोकमय, आनंदमय जीवात्माएँ.
कितनी कल्पनाएँ आकाश सा अनंत सीमाहीन,
सागर सा गहरा, गहरे सागर में परिचित अपरिचित
लाखों अंडज पिंडज, हैरान हो  मनुष्य को
सृजनहार सर्वेश्वर  का शरणार्थी  बन
चंद पल, ध्यान मग्न होना,
शरणागतवत्सल की कृपा पाने का मूल.

Saturday, December 1, 2018

सिरो रेखा (मु )

हस्त रेखा ,
सिरों रेखा
जन्म कुंडली
नव गृह
मुख्याध्यायन
सामुद्रिका  लक्षण
हस्ताक्षर  अध्ययन
अंग्रेज़ी  अक्षर परिवर्तन
कितने लोग ,
कितने ढंग
किसीको भगवान पर दृढ़
विश्वास   नहीं।
नकली रेखा ज्योतिष ,
नकली  नकली नकली
पुरोहित ,प्रायश्चित लोभी ,
 कोई दृढ़ भरोसा नहीं रखता
."सबहीं  नचावत  राम गोसाई ".

साहित्य (मु )

तस्वीर   में लेटी औरत.
 ओढने किताबों के पन्ने.
हाँ, मनुष्यता जब पशुता  को अपना बनाता है,
तब कोई  कवि लेखक या नारा
जन मानस को  सुप्त भावावेश  को
ऐसा जगा देता है ,
नारा लगाता है
करो या मरो .
जिओ और जीने दो
वंदेमातरम
यह नारा, साहित्य, गीत
रहता है "सारे जहाँ से अच्छा,
           हिंदुस्तान  हमारा हमारा!

नर हो, न निराश  करो मन को
कुछ काम करो कुछ नाम करो.

 देखो, साहित्य का प्रभाव!
मान-मर्यादा  की रक्षा
चित्र का किताबी आवरण
करत करत अभ्यास करत
जड़मति होत सुजान.
 किताब में छपी विषय
मान रक्षक
देश रक्षक
मूर्ख को आशाजनक
साहित्य समाज और राष्ट्र  उद्धारक.

Friday, November 30, 2018

भुर कुस निकालना (मु )

भुर कुस निकालना
तब होता है जब भृकुटि चढ़ता है
जब भृकुटि चढ़ता है ,तब भ्रष्ट होता है बुद्धि।
जब भ्रष्ट होता है बुद्धि ,तब बुरा समय आता है
तब हमारे पैर ही ठोकर खाता है
,जब बुरा समय आता है ,
जीभ से प्रकटी बात ,तीर सा चुभता है
तब क्रोधी पात्र भुरकुस निकालने लगता है।
आँखें लाल होती हैं
तब मज़हबी की गाली निकलती है या खानदान की।
वह इंसानियत को नष्ट कर ,
भुरकुस निकालकर
खानदानी ,जाति -संप्रदाय ,मजहबी
दलीय ,ग्रामीण महाभारत कुरुक्षेत्र।
भुरकुस निकालना स्थायी दुश्मनी मोल लेती है.
डा.रजनी कान्त द्वारा नए मुहावरा ,
इंसानियत की भूलें , नयी कल्पना ,
नया जागरण , मनुष्यता जगाना
तू तू मैं मैं से बचना ,
इतनी सीख ,
समझो ,सोचो ,जागो ,
भुरकुस निकालो कभी नहीं।

Thursday, November 29, 2018

pyar(मु )

मोहब्बत  मोह में हो तो
वह इश्क नहीं।
वह तन सुख।
धन से मुहब्बत हो तो
मन से प्यार नहीं
तो कभी न मिलेगा चैन।

Wednesday, November 28, 2018

जागो संकल्प करो (मु )

कुटुंब  दल
अगजग भारतीय  एक परिवार
 बनाने का दल.
फूल दल सा
हमें नहीं बिखरने देना.
हमें एकता चाहिए,

पैसे के या पद के या लोभ के या भयवश

देशद्रोही  के पक्ष न लेना.

देश की शक्ति जान
अगजग के लोग लूटे खूब.
फिर भी हम सिर ऊँचा कर
चल रहे हैं जान.

विदेशों को साथ देकर
विदेशों को सिंहासन पर
बिठाई विदेशी शक्ति को
कई स्वार्थी  देश द्रोही,
आंबी सा, वह तो लंबी सूची.

आज भी इत्र तत्र  कुछ द्रोही
देश को टुकडे करने में लगे हैं.

अंकुर से ही समूल
ऐसी द्रोही शक्तियों को
बढने न देना केवल सरकार को ही
नहीं हर देशभक्त  का अटल संकल्प.

जागना जगाना
हमारे फेमिली ग्रूप
कदम उठाना.
युवा शक्ति को जागना.
मिली विदेशी बहु शक्ति को
पनपने  न देना.
स्वरचित स्वचिंतक :यस.अनंतकृष्णन 

मज़हबी स्वार्थी तजो। (मु )

भगवान भगवान बोलते हैं ,
नहीं रखते भगवान पर विश्वास। 
प्रायश्चित करने मंदिर जाते हैं 
मंदिर की मूर्ती सजी 
सोने के कवच से ,
चमकी हीरे के मुकुट से। 
मंदिर बना लूट के पैसे से। 
कवच मुकुट दिए हैं 
भ्रष्टाचार के मंत्री। 
काले धन हुंडी में 
काले व्यापारी हाथ से 
मंदिर सजा है 
जैसे हिरण्य कश्यप जैसे 
सोचो समझो 
बनो प्रह्लाद। 
जागो जगाओ 
बनो भक्त ध्रुव। 
लौकिकता प्रायश्चित 
वे ही करते वे ही कराते 
जो धनी लालची हो 
धनी ही बच सकते हैं तो 
गरीबों पर भगवान की दया नहीं। 
सोचा विचारा अनुभूति मिली 
लुटेरे ही करते यज्ञ हवन। 
दशरत के यज्ञ फल 
उनको शोक मृत्यु। 
राम का अश्वमेध यज्ञ 
सीता का शोक -विरह।
ब्राह्मणो !यज्ञ करो ,
देखता हूँ भ्रष्टाचारियों के हार हो.
करोड़ों रूपये का खर्च करते 
सांसद -विधायक ,
पैसे लेकर खून करनेवाले 
मज़दूरी खूनी ,
मतदेनेवाले मतदाता ,
भ्रष्टाचारी नेता को 
आँखें मूँदकर उम्मीद करने वाले 
३०% दल के सेवक रहते 
कैसे हारते। 
जिन्होंने मंदिर तोड़े 
बगैर उनके कांग्रेस नहीं जीत सकता।

भगवान पर विशवास नहीं ,
बाह्याडम्बर पर विशवास ,
भगवान को छिन्न-भिन्न कर 
कहते हैं पुण्य मिलेगा। 
भक्त त्यागराज , भक्त रैदास ,
भक्त प्रह्लाद बनो ,
तजो -बाह्याडम्बर भक्ति .
तभी होगी देश की भलाई।
दान धर्म करो 
मजहबी स्वार्थी तजो.