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Sunday, September 13, 2020

 भगवद्गीता  मान्य ग्रंथ

भारतीयों के लिए

 अनुशासन और कर्त्तव्य के

 मार्गदर्शक ईश्वरीय देन।

फिर भी देशोन्नति के साथ,

धन का ही प्रधानता,

दया तो अति कम।

श्मशान भूमि में भी

 निर्दय व्यवहार।

अस्पताल में ,

शिक्षालयों में

निष्काम कर्त्तव्य मार्ग

कितने पालन करते हैं?

आनंदपूर्ण , संतोषजनक

शांतिपूर्ण जीवन बिताते हैं

पता नहीं, पर हर कोई

ईश्वर का गुण करते हैं।

गीता का योगदान करते हैं

पर माया या शैतान के वशीभूत

मानव दुखांत में 

सुखांत की खोज में।


अनंत कृष्णन,(मतिनंत)चेन्नै।

    नारी  चित्रलेखन।

 बेगार गुलाम नारी।

नर सत्तात्मक प्रशासन से मुक्त।

नर नारी की अर्द्ध शक्ति।

अर्द्ध नारीश्वर सम शक्ति।

परावलंबित नारी नहीं,

स्वावलंबित नारियां।।

शिक्षा उन्नति सही।

पर युवक युवतियों में

संयम की कमी, जितेंद्र कोई नहीं।

देवेंद्र को भी शाप,

शरीर भर योनी।

संयम रहित अगजग में

नारी की हिफाजत नारी।

चालक नारी चतुर बन 

पर्दा फेंक कर बाहर आती

यह एक महिला संघ का साहस।

नारियां वीरांगनाएं,

नारियां विमान चालक।

नारी उत्थान मातृसत्तात्मक शासन।

जय हो नारी शक्ति और स्वावलंबन।

नारी 


 एक जमाना था,

केवल खाना ,

अरद्धनग्न कपड़ा

सोना काफ़ी मानव मानते।

शिक्षा के विकास,

वैज्ञानिक सुख सुविधाएं

मानव को धन प्रधान बना दिया

नर नारी को कमाना हो

 गया जरूरी।

सेना, विमान चालक और

अन्यान्य क्षेत्रों में

नारी  भी चमकने लगी।

राजनीति में न अधिक।।

नारी के उत्थान में

नर भी साथ देता जहां

धोबी की बात पर

राम ने सीता को भेजा था जंगल।।

वहां पर्दा घूंघट निकालकर 

गाड़ी चलाना सोच विचार परिवर्तन भारत समाज की प्रगति।

स्वरचित स्वचिंतक एस.अनंतकृष्णन।चेन्नै।

 म🤫😀🤭🤔 हास्य 

मैं हूं रंगीला ,

मैं हूं अपने को

हरा तमिलवाला कहता हूं।

अजब हममें वैज्ञानिक

 तमिल वाले  हैं,गैर वैज्ञानिक।

भ्रष्टाचार में भी वैज्ञानिक , अवैज्ञानिक।

हम हिंदी से चिढ़ते नहीं,

हिंदी से न घृणा।

भगवान नहीं कहा करते,पर

विवश मानना पड़ा।

हम मंदिर जाया नहीं करते।

पर अर्द्धांगिनी जाया करती

हमारे पापों को भी प्रायश्चित करती, मन में भय पर कहते

नारी स्वतंत्रता में धकल नहीं करते।

अब एक मात्र नारा 

हिंदी- संस्कृत को आने नहीं देंगे

पर मत वोट मांगने 

उदय सूर्य चिन्ह कहेंगे।

 हिंदी पढ़ने को रोका नहीं करते।

अतः दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा जिंदा है

चुनाव के सिद्धांत में

हिंदी विरोध नारा मात्र है।

कैसे छोड़ सकते?

हिंदी वालों से हम 

हिंदी में ही वोट के लिए

अनुनय विनय करते हैं।

हिंदी से चिढ़ते नहीं,पर

अवैध संबंध ही रखते।

चुनाव में मजबूर हम।

अपने लाभ के लिए

सत्यता के लिए विरोध करना पड़ता है,पर लोगों में जागरूकता आ गई,पर आशा है "|

हरा तमिल नारा काम आएगा।

स्वरचित स्वचिंतक

अनंत कृष्णन एस।

 वाह !असर!

नौकरी मिलीबढिया,

संपत्ति की कमी नहीं,

शांति नहीं मिली अब,

एलकेजी आरक्षण,

अभी से चैन नहीं मिली!

पति पत्नी दोनों की कमाई,

क्रेडिट कार्ड से दब गई

बेचैनी की सीमा नहीं,

पाँच प्रतिशत भरते रहे

बैंक तो संतोष

मूल धन  तो जैसे के वैसे!

यही आधुनिक जिंदगी!

स्वरचित एस.अनंतकृष्णन

 नमस्ते। 

नव विचार ,नव चिंतन ,नव आशा 

नव भारत का निर्माण।

सुविचार सुख देता है तो बाद विचार बेचैनी। 

सुखप्रद कर्म कर सुफल जरूर।

सिरों रेखा लिखकर जन्म ,बदलना ईश्वर ही जान.

गुरु भक्ति से ईश्वर मिलान ,पर सद्गुरु की खोज कर.

धन प्रधान आश्रम आचार्य सही ,

पर फुटपाथ पर भी अर्द्धनग्न सिद्ध पुरुष।

मुफ़्त में देते सलाह ,सत्यता बताते।

धन प्रधान ही ईश्वर अनुग्रह नहीं ,

मन पवित्र तन पवित्र। 

दान धर्म ध्यान काफी। 

हज़ारों साधू भारत में 

बचाते हैं अपने ध्यान से। 

अत्याचार बढ़ते तो देखते हैं प्राकृतिक कोप.

धन से बढ़कर ईश्वरी तांडव शक्ति जान.

शान्ति संतोष ईश्वरीय सूक्ष्म शक्ति 

न माया मोह स्वार्थ विचार।

ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ  ध्यान प्राणायाम 

मनो अभिलाषा पूरी होने का मूल.

स्वचिंतक  अनंतकृष्णन


मित्रचिन्तन 



40.धर्म मार्ग पर कमाओ धन।

 वही तेरी होशियारी।

 वही  यारी  बिना भूले

करेगा तेरी सुरक्षा।।

39.कुचला कड़ुआ,

कभी न होता मीठा।

प्यार हीन है तो बदला दुख ही जान।।

 38.नाडी नसों को सही सलामत रखें तो शारीरिक-मानसिक कमजोरी न होगी जान।।

27.प्राप्त मानव जीवन को

सुचारू रूप से चलाएंगे तो

अड़चनें जीवन में नहीं जान।।

37.मनुष्य में मनुष्यता होने पर 

 अंग जंग में दुख नहीं जान।

36.परायों को निंदा कर जीने पर

     कभी पीड़ा नहीं जान।।

    सानंद ऊंचे जीवन जीने गहरे सोच विचार की जरूरत जान।।

35.सूखे पत्ते कभी न होंगे हरे।

सत्य के न पालकों का जीवन भी वही।।

34.त्यागमय जीवन ही है जीवन।

बाकी सब सूखे पेड़ समान जान।।33. இல்லை

32. आध्यात्मिक जीवन में नाच-गान भी साथ जान।।

31.न्याय के सामने  हिलने डुलने पर भी  स्तरीय पर्यटक होगा जान।।

30.अंधेरे में प्रकाश लाभ -सुखप्रद।

अड़चनें आने पर  दुखप्रद।।


१. नारियल के पेड़ के सिर गया तो

 फिर न उगेगा जान।

वैसे ही मानव अपने का 

न पहचानता तो प्रगति बाधक जान।

2.अनचाहा रोग को   चाहकर ,

   अपने शरीर में बसाना 

कांटे में फंसी मीन समान जान।।

3.पंचभूत से बने शरीर के पंचेंद्रियों को तत्काल के कल्याण में अर्पण करना है श्रेयस्कर।।

4.मरण तो अपने आप हमें बिना भूले आलिंगन कर लेगा ही।

अतः हमें उनकी चिंता न कर 

वि स्मरण कर  जीना  ही

 श्रेयस्कर  जान मान।।

5.पंचेंद्रिय  नियंत्रण रहित  जीना,

 आग जग नारियों के लिए अमंगल ही जान।

6.मन मोहक ईश्वर को अपने

में गुप्त रखना उचित नहीं जान।।

7.तन मन बिगड़कर जीने पर

ईश्वर की खोज में भटकना ही जीवन जान।।

8.छाया की खोज में चलने से 

 माया छोड़ अलौकिक तलाश ही श्रेष्ठ जान।

9. मन पार के भगवान को छिपाकर जीना जीवन नहीं जान।

10.नास्तिक विचार ईश्वर का अवहेलना अहंकार भावना जान।।

11.अनासक्त ईश्वर पर आसक्ति होना ही संत जीवन जान।।