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Saturday, July 4, 2026

अंग्रेज़ी

 अंग्रेज़ी स्कूल न तो हम कमा नहीं सकते।

 हिंदी  या तमिल दरिद्रता है, भाषा माधुर्य  ही  प्रधानता हो तो संस्कृत क्यों मृत भाषा।

 अंग्रेज़ी क्यों जन प्रिय भाषा।

 धन धन धन

 बाद में ही धर्म।

‌धन न तो मंदिर नहीं,

 ईश्वर के सिर पर हीरे का मुकुट नहीं।

 ऊँचे ऊँचे गोपुरम नहीं,

 धन के सामने धर्म नहीं।

सत्य नहीं, अहिंसा नहीं 

 शिक्षितों में ईमानदारी नहीं। 

 न्यायाधीश में न्याय नहीं,

  ऐसी हालत में भाषा किस खेत की मूली।

 हजारों भाषाओं का लापता। 

 अंग्रेज़ी माध्यम के स्कूल और जीविकोपार्जन न तो  भारतीय भाषाओं का अंत ज़रूर।

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