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Thursday, July 2, 2026

न्याय की गूँज

 सत्य की गूँज।

एस. अनंत कृष्णन चेन्नई 

3-7-26.

+++++++++-

नमस्ते वणक्कम्।

  भारतीय सनातन वेद में 

  सत्य की गूँज यों

प्रकट करता है

सत्य मेव जयते।

 सत्य ही जीतता है,

असत्य की जीत,

 असत्य राजनैतिक समर्थन देश हित के लिए नहीं,

सत्य गूँजता है,

जब सत्य ज़ोर से

चीखता चिल्लाता है।

 पर सत्य की शोर उठने के पहले ही 

उसका गला घोंटा 

जाता है।

 कुंती ने कर्ण जन्म छिपाया,

 उसका बदनाम 

 शाश्वत।

 हरिश्चन्द्र के कष्ट अंत तक।

 कुरुक्षेत्र के युद्ध

‌सत्य के दबाने से

 एकलव्य की नाकामयाबी।

युद्ध कला के विरुद्ध 

जाँघ में मारने से दुर्योधन की मृत्यु।

सत्य के छिपाने से

 कर्म को शाप।

 छल से  भलें ही भगवान हो वामन अवतार लेकर 

 विराट क्षय अवतार लेना,

आजकल चुनाव में 

वोट के लिए नोट।

रुग्णावस्था में 

वृद्धों की इलाज में 

 वेंटिलेटर रखकर लूटना।

 न्यायालय  में 

अपराधियों के पक्ष में 

 वकील अपनी चालाकी 

तर्क से छुड़ाना,

 सी . ए. के द्वारा आयकर बचाने का सलाह।

ये सब चित्रपट ,

समाचार पत्र

 कहानी सब में गूँजता है,

पर बेकार।

 मृत्यु ही सत्य की गूँज

करोड़ पति हो या वस्त्र हीन भिखारी,

करोड़ों के भ्रष्टाचार नेता

रिश्वत खोर अधिकारी,

न्यायाधिपति हो

‌अन्यायाधि पति,

सब को तटस्थ दंड

 मृत्यु दंड।

 तभी सत्यधर्म गूँजता है।

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आज की चुनौती — सत्य की गूँज


सत्य की गूँजएस. अनंत कृष्णन, चेन्नई03-07-2026


नमस्ते! वणक्कम्।


भारतीय सनातन संस्कृति का उद्घोष है—"सत्यमेव जयते।"सत्य ही अंततः विजयी होता है,असत्य की विजयक्षणिक भ्रम मात्र होती है।


सत्य जब गूँजता है,तो अंतरात्मा को झकझोर देता है।किन्तु अक्सरउसकी गूँज उठने से पहले हीउसका गला घोंट दिया जाता है।


कुंती ने कर्ण का जन्म-रहस्य छिपाया,उसका परिणाम जीवनभर की पीड़ा बना।राजा हरिश्चन्द्र नेसत्य के लिएअंतिम क्षण तक कष्ट सहे।


कुरुक्षेत्र का महायुद्ध भीदबे हुए सत्य का परिणाम था।एकलव्य का त्याग,दुर्योधन का अंत,छल और नीति का संघर्ष—इतिहास आज भी प्रश्न करता है।


आज भी चुनावों में वोट के बदले नोट का खेल,

बीमार वृद्धों के उपचार के नाम पर लूट,

न्यायालयों में 

तर्क-कौशल से 

अपराधियों का बच निकलना,

और कर बचाने की युक्तियाँ—

समाचारों, 

कथाओं और चलचित्रों में प्रतिदिन गूँजती रहती हैं।


फिर भी एक सत्य अटल है—मृत्यु।


करोड़पति हो या निर्धन भिखारी,भ्रष्ट नेता हो या रिश्वतखोर अधिकारी,न्यायाधीश हो या सामान्य जन—मृत्यु सबको

एक समान न्याय देती है।


अंततः सत्य की गूँज समय के पार सुनाई देती है,

और वही मानव को सत्य धर्म का स्मरण कराती है।

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