नमस्ते वणक्कम्।
तमिऴ हिंदी सेवा
तिरुक्कुरल।
देवनागरी लिपि में
तमिल और हिंदी भावार्थ
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नमस्ते। वणक्कम्।
तमिऴ–हिंदी सेवा
तिरुक्कुरल
तमिल मूल
நிலத்தில் கிடந்தமை கால்காட்டும்;
குலத்தில் பிறந்தார் வாய்ச் சொல்.
देवनागरी लिप्यंतरण
निलत्तिल किडंतमै काल् काट्टुम्;
कुलत्तिल पिरन्दार् वाय्च् सोल्।
शब्दार्थ
நிலத்தில் (निलत्तिल) — भूमि में
கிடந்தமை (किडंतमै) — पड़ा हुआ (बीज)
கால் காட்டும் (काल् काट्टुम्) — अंकुर फूटने पर अपना स्वरूप प्रकट करता है
குலத்தில் (कुलत्तिल) — कुल में
பிறந்தார் (पिरन्दार्) — जन्मे हुए लोग
வாய்ச் சொல் (वाय्च् सोल्) — वाणी, बोली
हिंदी भावार्थ
जिस प्रकार भूमि में पड़े बीज का अंकुर यह बता देता है कि वह किस प्रकार का है, उसी प्रकार मनुष्य की वाणी उसके संस्कार, परिवार और कुल की पहचान करा देती है।
उदाहरण
कहा जाता है कि मंगत मिश्र के घर का तोता भी वेद मंत्र बोलता था, क्योंकि वह विद्वानों के वातावरण में पला था। इसके विपरीत यदि कोई तोता डाकुओं के बीच पले, तो उसकी बोली भी "पकड़ो, लूटो, मारो" जैसी होगी।
अर्थात् मनुष्य की वाणी उसके संस्कारों और वातावरण का दर्पण होती है। इसलिए मधुर, विनम्र और सदाचार पूर्ण वाणी ही श्रेष्ठ कुल और उत्तम संस्कारों की पहचान है।
एक छोटा-सा ध्यान देने योग्य बिंदु: इस कुरल का मूल संदेश "वंश" से अधिक "संस्कार और वाणी" पर है। तिरुवल्लुवर यह बताते हैं कि व्यक्ति की बोली उसके परिवार और संस्कारों का परिचय देती है।
நிலத்தில் /--- निलत्तिल==भूमि में
கிடந்தமை -- किडंतमै =गिरे बीज
கால்காட்டும்--कालकाट्टुम्
अंकुर के फूटने पर उसकी समृद्धि लीग पड़ेगा।
காட்டும் काट्टुम = दिखाएगा
குலத்தில் कुलत्तिल
कुल में
பிறந்தார் जन्म लिये लोगों की
வாய்ச் சொல்.
बोली।
तिरुक्कुरल में संत तिरुवल्लुवर कहते हैं कि खेत की मिट्टी के अनुसार अंकुर फूटेगा तो उसकी समृद्धि पनपना श्रेष्ठ रहेगा।
वैसे ही मनुष्य की नम्र बोली व्यवहार वंश के अनुसार होगा।
उदाहरण के लिए
मंडण मिश्र का तोता वेद मंत्र बोलेगा।
डाकू के घर में पले तोता बोलेगा कि पकड़ो, लूटो,मारो।
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