मेरे दिमाग
मेरी बुद्धि
मेरा टंकण
उसके लिए पे मंट।
मेरी आमदनी का मार्ग।
हिंदी विरोध प्रांत में।
इसकी चिंता न तमिलनाडु सरकार का
न केंद्र सरकार
न प्रकाशक का
न आम जनता का।
भगवान भी मंदिर में
दक्षिणा देने पर ही
निकट दर्शन।
कौपीन पहने भक्त जंगल में।
स्वर्ण सिंहासन पर बैठे
आचार्य
दीक्षा पाने दस हज़ार।
जय जय धन देवता।
धन न तो ज्ञान का भी महत्व नहीं।
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