अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस।
एस.अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना
30-7-26
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नमस्ते वणक्कम्।
मानव स्वार्थी,
मानव परार्थी।
ईश्वर ने उसको ज्ञान चक्षु दिया है।
उसके जीवन में
उसकी शक्ति इतनी बड़ी कि वह कृत्रिम सुख के लिए
आविष्कारों का पता लगाया।
वह तो सर्वभक्षी है।
अपने को खतरे से बचाने,
अपनी वीरता सिद्ध करने,
अपने आहार के लिए
वह शिकार करने लगा।
शिकारी जीवन में
जंगली जानवरों का नाश होने लगा।
खूँख्वार आदमखोर
बाघ के शिकार में
उसने बड़ी वीरता दिखाई।
परिणाम स्वरूप जंगलों में बाघ का वंश खत्म होने लगा।
उन बाघों की संख्या बढ़ाने,
बाघों के संरक्षण के लिए
एक दिवस की जरूरत पड़ी।
वही अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस।
घने जंगलों में
बाघ का शिकार,
और अन्य जंगली जानवरों का शिकार
अपराध है,और मना है।
मानव ने जंगलों का नाश किया।
जंगल संरक्षण दिवस।
विनाश काले विपरीत बुद्धि .
मानव के कर्म फल के प्रायश्चित के लिए
दिवस।
माता पिता की आत्मशांति के लिए
श्राद्ध कर्म।
प्राकृतिक जंगल,पशु-पक्षी आदि के संरक्षण के लिए
हर एक दिवस।
उस सिलसिले में
अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस।
हर साल 29 जुलाई में
2010से मनाया जा रहा है।
।उद्देश्य: बाघों की घटती संख्या रोकना और उनके सुरक्षित भविष्य के लिए काम करना।
पक्का
आज की चुनौती : अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस
अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस
एस. अनंतकृष्णन, चेन्नई, तमिलनाडु
हिंदी प्रेमी प्रचारक
30-07-2026
नमस्ते! वणक्कम्।
मानव स्वार्थी भी है,
मानव परार्थी भी है।
ईश्वर ने उसे
ज्ञान-चक्षु प्रदान किए हैं।
अपनी बुद्धि और शक्ति के बल पर
उसने कृत्रिम सुख-सुविधाओं के
अनेक आविष्कार किए।
वह सर्वभक्षी है।
अपनी रक्षा के लिए,
अपनी वीरता सिद्ध करने के लिए,
और अपने आहार के लिए
वह शिकार करने लगा।
शिकारी प्रवृत्ति के कारण
अनेक जंगली जीवों का
अस्तित्व संकट में पड़ गया।
खूँखार और आदमखोर कहे जाने वाले
बाघ का भी
अंधाधुंध शिकार हुआ।
परिणाम यह हुआ कि
जंगलों में बाघों की संख्या
तेजी से घटने लगी।
तब आवश्यकता पड़ी
बाघों के संरक्षण की,
उनकी संख्या बढ़ाने की,
और मानव को जागरूक करने की।
इसी उद्देश्य से
अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस मनाया जाता है।
घने जंगलों में
बाघ तथा अन्य वन्यजीवों का शिकार
कानूनन अपराध है।
मानव ने
जंगलों का विनाश किया,
प्रकृति का संतुलन बिगाड़ा।
कहा भी गया है—
"विनाश काले विपरीत बुद्धिः।"
जिस प्रकार
पूर्वजों की आत्मशांति के लिए
श्राद्ध-कर्म किया जाता है,
उसी प्रकार
प्रकृति, जंगलों, पशु-पक्षियों
और वन्यजीवों के संरक्षण के लिए
जागरूकता दिवस मनाए जाते हैं।
उसी श्रृंखला में
प्रत्येक वर्ष 29 जुलाई को
अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस
2010 से मनाया जा रहा है।
उद्देश्य—
बाघों की घटती संख्या को रोकना,
उनके प्राकृतिक आवास की रक्षा करना,
और उनके सुरक्षित भविष्य के लिए
सामूहिक प्रयास करना।
संदेश
बाघ बचेंगे तो जंगल बचेंगे,
जंगल बचेंगे तो प्रकृति बचेगी,
और प्रकृति बचेगी तो
मानव जीवन भी सुरक्षित रहेगा।
अंत में जोड़ा गया संदेश आपकी रचना के प्रभाव को और सशक्त बनाता है।
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