आज की चुनौती : अंधविश्वास
एस. अनंतकृष्णन, चेन्नई, तमिलनाडु
हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति
20-7-2027
अंधविश्वास
नमस्ते। वणक्कम्।
वैज्ञानिक प्रमाण और वास्तविकता के बिना जिन बातों पर विश्वास किया जाता है, उन्हें अंधविश्वास कहा जाता है।
जैसे—
इमली के पेड़ में भूत होना,
राहुकाल देखकर ही कार्य करना,
घर से निकलते समय किसी का "कहाँ जा रहे हो?" पूछना अशुभ मानना,
छींक आने पर रुक जाना,
बिल्ली का रास्ता काटना,
अकेले ब्राह्मण का सामने आना,
विधवा का सामने आना आदि अनेक धारणाएँ अंधविश्वास की श्रेणी में आती हैं।
तमिल का एक प्रसिद्ध भक्तिगीत कहता है—
दिन क्या करेगा?
कर्मफल क्या करेगा?
ग्रह क्या करेंगे?
निर्दयी यम क्या करेगा,
जब भगवान कुमारेश की कृपा प्राप्त हो जाए।
अर्थात भगवान पर विश्वास रखो। शकुन-अपशकुन और शुभ-अशुभ की अनावश्यक चिंता मत करो।
संत कबीर ने भी कहा है—
"जाको राखे साइयाँ, मारि सके न कोय।
बाल न बाँका कर सके, जो जग बैरी होय।।"
भक्ति का संदेश यही है कि ईश्वर पर विश्वास रखो, अपने कर्म करते रहो और अंधविश्वासों के जाल में मत फँसो।
हाँ, नमस्कार करना, बड़ों के चरण स्पर्श कर उनका आशीर्वाद लेना तथा मंदिर में साष्टांग प्रणाम करना अंधविश्वास नहीं हैं। ये हमारी संस्कृति, विनम्रता और स्वास्थ्यप्रद अभ्यास के प्रतीक हैं।
दुर्भाग्य से आजकल अभिवादन भी केवल हाथ हिलाने या सैन्य शैली के सैल्यूट तक सीमित होता जा रहा है। अनेक शिक्षित युवक-युवतियाँ भी साष्टांग प्रणाम की परंपरा से दूर होते जा रहे हैं।
आइए, विवेक अपनाएँ,
अंधविश्वास छोड़ें,
विज्ञान और सदाचार को स्वीकार करें ।
तथा ईश्वर में सच्ची श्रद्धा रखते हुए
कर्मपथ पर आगे बढ़ें।
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