Search This Blog

Saturday, July 4, 2026

समय और कर्म

 समय और कर्म

एस.अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना 

6-7-26

------++-++++++

कर्म ईश्वरीय सृष्टियों में 

 एक समान नहीं।

 आहार विषय में,

 आकार विषय में 

 स्वास्थ्य विचार में 

 बुद्धि लब्धि में 

 अलग अलग।

धन ,तन,मन

में भी भिन्न-भिन्न।

 पानी में भी भिन्नता।

 अतः सभ्यता असभ्यता के कर्म  ,कृषि में पोशाक में, खाद्यान्न में भी फर्क।

अतः सद्कर्म बद्कर्म  सत्संग बद्संग का फल।

अनपढ़ कबीर का ज्ञान 

वाणी का डिक्टेटर बनना

 सत्संग का फल।

 मंगत मिश्र के तोते का

 वेद मंत्र बोलना,

 डाकू के तोते का 

 पकड़ो,मारो,लूटो कहना

 सत्संग और बदचलन का संग।

 अतः कर्म में फ़र्क।

 समय 

 समय तो सब के लिए बराबर।

 राजा हो या रंक

 समय तो किसी की परवाह नहीं करता।

 

संत कबीर का यह प्रसिद्ध दोहा 

काल करे सो आज कर, आज करे सो अब।पल में प्रलय होएगी,

 बहुरि करेगा कब।।

 समय को खोना,

मरण समान।

  कर्म  समय पर न 

करने पर 

पछताना पड़ेगा।

 समय का घाटा भरना

ईश्वर से भी असंभव।

 

आछे दिन पाछे गए, हरि से किया न हेत।

अब पछताए होत क्या, जब चिड़िया चुग गई खेत।

 एस. अनंत कृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु 

 सौहार्द सम्मान प्राप्त हिंदी प्रेमी सेवक अनुवादक 

 



 

 

 


 

 



 


 




No comments:

Post a Comment