बचपन की खट्टी-मीठी यादें।
एस. अनंत कृष्णन चेन्नई
8-7-26.
बचपन में खट्टी-मीठी यादें
मेरे जन्म लेने के बाद
माँ के छे बच्चे,
आर्थिक अभाव या कर्म फल।
दो तीन साल पलकर
बच्चे मर जाते।
कडुवी बातें बचपन की।
सत्रह साल तक ग़रीबी,
रुग्णावस्था में माँ,
मीठी बातें बचपन में नहीं।
दीपावली पटाखे,
नये वस्त्र कल्पना की बातें।
बचपन की बातें खट्टी अंगुली
न मीठी।
अब 76साल की उम्र में
न आर्थिक अभाव,
पर मेरी स्वस्थ अर्द्धांगिनी
मेरी सेविका,
मेरी सलाहकार
मेरी शुभ चिंतिका
चल बसी।
बचपन में आर्थिक अभाव
आर्थ नाद।
बुढ़ापे में न आर्थिक अभाव।
मेरी प्राण प्रिया का निधन।
न बचपन में मीठी बातें
न अब बुढ़ापे में।
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