शांति और प्रेम दिवस
एस.अनंतकृष्तन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना
9-7-26
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मानव जीवन में
शांति और प्रेम?
दिवस?
रामावतार में
राम कहानी सुनाना
का मतलब अपना दुखड़ा रोना।
मानव प्रेम में
शांति दिवस कैसे?
विश्व शांति के लिए
प्रेम चाहिए।
मुस्कान चाहिए।
भारत का संदेश
अहिंसा परमो धर्म।
सत्य मेव जयते।
सर्वे जना सुखिनो भवन्तु।
जय जगत।
यह नारा,
वसुंधैव कुटुंबकम्
विश्वनाथ,
जगन्नाथ
अति प्राचीनतम् संदेश।
न जाने भारतीय संदेश
निभाने में भोग नहीं त्याग ही त्याग।
पर हर बात को पाश्चात्य देन मानना ,
हम अपने को पहचानने में भूल करते हैं।
पाश्चात्य स्वार्थता के कारण सम्मिलित परिवार का नाश।
धन कमाने विदेश में
भाईचारे की कमी।
अतः शांति और प्रेम रहित संसार में
भारत ही ऐसे सनातन धर्म संदेश
हर बात को उन्नीसवीं शताब्दी पाश्चात्य नारा
सही नहीं
भारतीय श्लोक नारा
सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः।सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत।ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥
अर्थ (भावार्थ):सभी लोग सुखी हों, सभी रोगमुक्त (निरोगी) रहें, सभी का कल्याण हो और किसी को भी कभी किसी दुःख का भागी न बनना पड़े। चारों ओर शांति ही शांति हो।
सोचो विचारों जानो पहचानो समझो
विश्व शांति और प्रेम
का नारा सनातन धर्म का है,
न पाश्चात्य देन।
भारत ही स्वतंत्रता संग्राम में ऐसा भजन गाया
हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई आपस में हैं भाई भाई।
न झगडाना कोई लड़ाई।
विश्व एकता , त्याग,
नश्वर जगत
अनश्वर सत्य,धर्म , प्रेम शांति।
नंगे बदन विश्व कल्याण
साधु संतों की भूमी
भारत में
शांति और प्रेम दिवस
पाश्चात्य देन नहीं,
वेद उपनिषद का संदेश।
पंच तत्व ही तटस्थ भगवान।
एस. अनंत कृष्णन, चेन्नई
सही रूप
शांति और प्रेम दिवस
एस. अनंतकृष्णन, चेन्नई (तमिलनाडु)
9-7-2026
मानव जीवन में
शांति और प्रेम का
क्या है सच्चा आधार?
रामावतार की कथा
केवल कथा नहीं,
मानव के दुःख-दर्द का
जीवन-संदेश है।
विश्व में शांति चाहिए,
तो प्रेम चाहिए,
मधुर मुस्कान चाहिए,
आपसी विश्वास चाहिए।
भारत का सनातन संदेश—
"अहिंसा परमो धर्मः।"
"सत्यमेव जयते।"
"वसुधैव कुटुम्बकम्।"
"जय जगत।"
यही तो है वह अमर पुकार,
जो वेदों और उपनिषदों से
युगों-युगों से गूँज रही है।
हर श्रेष्ठ विचार को
केवल पाश्चात्य देन मान लेना
अपने गौरव को भूल जाना है।
स्वार्थ, भोग और धन की दौड़ ने
संयुक्त परिवारों को बिखेरा,
भाईचारे की डोर को कमजोर किया।
भारत ने सदा त्याग,
सेवा और विश्व-बंधुत्व का मार्ग दिखाया।
"सर्वे भवन्तु सुखिनः,
सर्वे सन्तु निरामयाः।
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु,
मा कश्चिद् दुःखभाग्भवेत्।
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥"
यही है विश्व-कल्याण की प्रार्थना,
यही है शांति और प्रेम का
सनातन संदेश।
स्वतंत्रता संग्राम में भी
भारत ने गाया—
"हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई,
आपस में हैं भाई-भाई।"
विश्व-एकता, प्रेम, त्याग,
सत्य और धर्म ही
मानवता के शाश्वत आधार हैं।
ऋषियों, मुनियों और संतों की भूमि भारत
आज भी विश्व को यही संदेश देती है—
शांति और प्रेम किसी एक युग या देश की देन नहीं,
वे वेदों, उपनिषदों और सनातन संस्कृति की अमर धरोहर हैं।
पंचमहाभूतों में व्याप्त परमात्मा
संपूर्ण सृष्टि को
शांति, प्रेम और सद्भाव का आशीर्वाद दें।
— एस. अनंतकृष्णन, चेन्नई
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