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Sunday, July 5, 2026

इंसाफ़ की ताकत

 इंसाफ़ की ताकत।

 एस. अनन्तकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक 

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इंसाफ़  की ताकत 

अत्यंत महत्वपूर्ण।

पर इंसाफ़ देनेवाले 

 ज्ञानी होना चाहिए।

 धनलोलुपता वकील 

 अपने तर्क चातुर्य से

 अपराधी और खूनी को 

छुड़ा देता है।

 झूठे गवाह देना एक धंधा बन गया है।

 भ्रष्टाचारी मंत्री,

 हत्यारे अमीर

 अमीर कार चालक 

 सबको दंड देने बारह वर्ष।

 तब फ़ाइल गायब

‌गवाह गायब

 इंसाफ़ कमजोर।

 मुख्यमंत्री जयललिता 

अपराधिन

 शादी प्रतिवादी तर्क 

 खत्म, पर फैसला 

 उसकी मृत्यु के बाद।

 वह अब निरपराधिन नेत्री।

 उसकी सखी शशिकला

 चार वर्ष की ही सजा ।

 भारतीय न्यायालय धनियों के लिए।

एक गरीब चालक 

  ग़लती से टकराने पर तुरंत दंड।

एक प्रसिद्ध  अभिनेता पियक्कड़, कार चलाते 

 अनेकों की मृत्यु।

 बारह साल तक के मुकद्दमे में,

 फाइल, गवाह सब नदारद।

 अभिनेता के समर्थन में 

 सब ।

 वह साफ़ साफ़ दंड से बचा।

 मंदिर के पर्वत पर  दीप जलाने का फैसला,

पर शासक दल दीप जलाने नहीं दिया।

 हिंदू मंदिर अति प्राचीन।

 पर बीच में दर्गाह

 एक मुगल कब्र 

 न्याय का ताकत कमज़ोर।

 अदालत में धन की महिमा

 सत्य का हार, अधर्म की जीत।

 प्रेमचंद की कहानी 

 नमक का दारोगा।

 सत्य के पक्ष में न गवाह

न वकील।

  अपराधी काले धनी

 उसको बचाने

 वकीलों का तांता।

स्वतंत्रता संग्राम में 

 इंसाफ़ अति कमजोर।

  राजीव गांधी के मुकद्दमे  में न  सच्चाई का पता।

सिविल केस चलाते चलाते अमीर बन गया गरीब।

 न इंसाफ़।

 इंसाफ़ की देरी

 सत्य हरिश्चन्द्र की परेशानियाँ,

 लेखकों की ग़रीबी,

 प्रकाशकों की अमीरी।

 भारत के सड़कों के फुटपाथ चलने के लिए नहीं,

फुट पाथ की दूकानों के लिए।

 मंदिर भक्ति के लिए नहीं 

 व्यापारियों का केंद्र 

 मनमाना दाम धोखा।

ट्राफिक पुलिस का रिश्वत।

जन्म मृत्यु प्रमाण पत्र में 

 रिश्वत।

 थोड़े में कहें तो

 देवदर्शन में धन प्रधान।

 श्मशान में भी।

 इंसाफ़ की ताकत 

 दुर्बल ही लगता है,

 धन,पद, अधिकार, सिफारिश दोस्ती के कारण।

 तटस्थ इंसाफ 

यम के दरबार में,

पंचतत्व के चलन में।

जहाँ न अपील न उच्च उच्चतम न्यायालय।

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