कच्चा पक्का
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मेहंदी
एस. अनंतकृष्णन, चेन्नई 27-7-26.
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ईश्वर की अद्भुत सृष्टि
हरी मेहंदी।
निज रंग हरा तजकर
लाल रंग देनेवाली जटी बूटी।
नाखून में सुंदर लाल।
मेहंदी का गुण,
दवा समान।
शारीरिक ताप कम करनेवाली,
कीट नाशिनी,
ठंडक देनेवाली,
नाखून घाव भरनेवाली,
नाखून और हथेली को
लाल बनाकर
शोभा बढ़ानेवाली।
मेहंदी कला हजारों को जीवनदायिनी।
वधुओं के श्रृंगार करने का नौवा ,
खूब चलता है।
बाल बढ़ानेवाली
फटी एड़ियाँ भरनेवाली
ईश्वर का चमत्कार।
मरुदानी सम और कोई नहीं।
असल
आज की चुनौती – मेहंदी
मेहंदी
एस. अनंतकृष्णन, चेन्नई, तमिलनाडु
हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति
हथेलियों पर रचती मेहंदी,
हरियाली का सुंदर रंग।
सूखते-सूखते छोड़ जाती,
प्रेम और मंगल का प्रसंग।
दुल्हन के कोमल हाथों में,
सपनों की मुस्कान खिलाती।
गहरे रंग की मधुर छटा,
जीवन में उमंग जगाती।
तीज, करवा चौथ, उत्सवों में,
मेहंदी का अपना मान।
भारतीय संस्कृति की शोभा,
बढ़ाती इसका सम्मान।
क्षणभर की हरियाली लेकर,
लालिमा का देती संदेश।
जीवन भी ऐसा ही होता—
परिवर्तन उसका परिवेश।
मेहंदी हमें यही सिखाती,
प्रेम का रंग रहे सदा गहरा।
सद्भाव, स्नेह और अपनापन,
यही जीवन का सच्चा चेहरा।
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