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Monday, July 27, 2026

भाषाई संघर्ष

 संघर्ष ।


नमस्ते वणक्कम्।


एस.अनंतकृष्णन।

जीवन में 

 संघर्ष ही संघर्ष है।

भले ही  ईश्वर के अवतार राम हो या कृष्णन।

 सामान्य मानव को 

नव रसों के अनुभव में संघर्ष करना ही पड़ेगा।

 काम क्रोध मद लोभ  संघर्ष के मूल में है तो

 ईर्ष्या आग में 

तेल का काम करती है।

 तन के लिए संघर्ष

 धन के लिए संघर्ष 

 मन की इच्छाओं की पूर्ति के लिए संघर्ष।

 एक वस्तु सुंदर लगी

ले ली,

उससे अधिक सुंदर 

 दीख पडें तो संघर्ष ज़्यादा।

 अब मेरी मातृभाषा तेलुगू  केवल मेरे लिए 

बोली के रूप में।

 पर मेरा प्रांत तमिल।

 पढ़ना लिखना साहित्य ज्ञान सब के सब तमिऴ भाषा में।

अब मेरा प्रांत तमिल 

 मेरी भाषा तमिल।

 अब सीमांकन के नेतृत्व में तेलुगु भाषियों के विरुद्ध  आंदोलन।

 कन्नड़ प्रांत में तमिल भाषियों के विरुद्ध।

 संघर्ष कहाँ से, कैसे किस रूप में शुरू होगा पता नहीं।

 खड़ी बोली हिन्दी के विकास के कारण 

 भोजपुरी,  अवधि, ब्रज भाषा और अनेक भाषाएं नदारद।

 तमिलनाडु में कठोर हिंदी विरोध।

 देखा देखी कर्नाटक प्रांत में हिंदी विरोध।

 देश में भाषाई संघर्ष।

 अब भारतीय भाषाएँ

जीविकोपार्जन का साधन नहीं।

 अंग्रेज़ों की कूटनीति और षडयंत्र  भारतीय भाषाओं को नालायक सिद्ध कर रही है।

 उच्च शिक्षा का माध्यम अंग्रेज़ी।

 जीविकोपार्जन की भाषा अंग्रेज़ी।

 केवल मंडी , पहरेदार, 

नौकरी नौकरानी की भाषा भारतीय भाषा।

 अब वे भी अंग्रेज़ी बोलने लग गये हैं।

 वैसे अंग्रेज़ी  देश भारत बन जाएगा।

एक समय भारतीय भाषाओं के विकास को लेकर संघर्ष होगा कि नहीं।

 क्योंकि आजकल तीन साल के बच्चे से लेकर सब अंग्रेज़ी को पसंद करने लगे हैं।

 भारतीय छात्रों को भारतीय भाषाएँ कठिन लग रही हैं।

आम शिक्षित जनता भी अंग्रेज़ी के पक्ष में।

  भाषा संघर्ष  का अंत नहीं।


एस. अनंत कृष्णन चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना।

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