आशा
एस. अनंत कृष्णन, चेन्नै, तमिलनाडु
हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति
विधा — अपनी हिंदी, अपनी सोच, अपने विचार, अपनी स्वतंत्र शैली
15-7-2026
मानव जीवन
आशा के आधार पर चलता है।
शादी करते हैं
इस आशा से कि
वैवाहिक जीवन
सुखमय और आनंदमय रहेगा।
आशा रहती है—
सुपुत्र-सुपुत्री होंगे,
उन्हें खूब पढ़ाएँगे,
अच्छी नौकरी मिलेगी,
योग्य बहू और दामाद मिलेंगे,
और संतान
बुढ़ापे में प्रेमपूर्वक
देखभाल करेगी।
आशा न हो तो
जीवन निराशा बन जाता है।
निराशा अनेक रोगों का कारण बनती है।
प्रेम में असफलता,
नीट परीक्षा में असफलता,
व्यापार में घाटा—
इन परिस्थितियों में
कुछ लोग निराश होकर
आत्महत्या जैसा कदम उठा लेते हैं।
पतझड़ में खड़े वृक्ष
हमें धैर्य का संदेश देते हैं।
उन्हें विश्वास रहता है
कि फिर बसंत आएगा।
चातक पक्षी
वर्षा की आशा करता है।
किसान
अच्छी वर्षा की आशा में
बीज बोता है।
पेड़-पौधे
ऋतु आने पर
फल-फूल देने की आशा रखते हैं।
आशा न हो तो
जीना दुश्वार हो जाए।
तपस्वी की आशा होती है
कि भगवान का अनुग्रह मिलेगा।
मनौतियाँ, दान, धर्म और पुण्य—
सबके पीछे
मोक्ष की आशा भी रहती है।
आशा ही
मानव को कर्मशील बनाती है।
यदि आशा न रहे,
तो मनुष्य निष्क्रिय हो जाएगा।
जैसे सेना की सतर्कता से
देश सुरक्षित रहता है,
वैसे ही आशा के सहारे
मानव जीवन
सदैव आगे बढ़ता रहता है।
एस. अनंत कृष्णन, चेन्नै, तमिलनाडु
हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति
विधा — अपनी हिंदी, अपनी सोच, अपने विचार, अपनी स्वतंत्र शैली
15-7-2026
मानव जीवन
आशा के आधार पर चलता है।
शादी करते हैं
इस आशा से कि
वैवाहिक जीवन
सुखमय और आनंदमय रहेगा।
आशा रहती है—
सुपुत्र-सुपुत्री होंगे,
उन्हें खूब पढ़ाएँगे,
अच्छी नौकरी मिलेगी,
योग्य बहू और दामाद मिलेंगे,
और संतान
बुढ़ापे में प्रेमपूर्वक
देखभाल करेगी।
आशा न हो तो
जीवन निराशा बन जाता है।
निराशा अनेक रोगों का कारण बनती है।
प्रेम में असफलता,
नीट परीक्षा में असफलता,
व्यापार में घाटा—
इन परिस्थितियों में
कुछ लोग निराश होकर
आत्महत्या जैसा कदम उठा लेते हैं।
पतझड़ में खड़े वृक्ष
हमें धैर्य का संदेश देते हैं।
उन्हें विश्वास रहता है
कि फिर बसंत आएगा।
चातक पक्षी
वर्षा की आशा करता है।
किसान
अच्छी वर्षा की आशा में
बीज बोता है।
पेड़-पौधे
ऋतु आने पर
फल-फूल देने की आशा रखते हैं।
आशा न हो तो
जीना दुश्वार हो जाए।
तपस्वी की आशा होती है
कि भगवान का अनुग्रह मिलेगा।
मनौतियाँ, दान, धर्म और पुण्य—
सबके पीछे
मोक्ष की आशा भी रहती है।
आशा ही
मानव को कर्मशील बनाती है।
यदि आशा न रहे,
तो मनुष्य निष्क्रिय हो जाएगा।
जैसे सेना की सतर्कता से
देश सुरक्षित रहता है,
वैसे ही आशा के सहारे
मानव जीवन
सदैव आगे बढ़ता रहता है।
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