दीपक और सबेरा
एस. अनंत कृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना
22-7-27
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रात का अंधेरा,
दिन का उजाला
मानव जीवन को
सोने जगाने
प्रकृति का देन।
अंधेरे रात में
लघु दीप हमारे
प्रकाश देता हैं।
उस दीप के प्रकाश में
पतंगा अपने जान देता है।
उल्लू की आँखें प्रकाशित होती हैं।
जुगनू चमचमाती है।
धूप में छाया की तरह
अंधेरे में दीपक का प्रकाश।
थकामांदा मानव
आराम से सोने का समय।
अंधेरे में जीने
निशीचर
ईश्वर की सृष्टि में अद्भुत।।
सबेरे सूर्योदय,
मुर्गी ,पक्षियों का कलरव,
प्रकाश मय वातावरण में जगना जगाना,
व्यस्त मानव समाज।
ग्वाले का दूध दुहना,
समाचार पत्र वाले का व्यस्त रहना
मंदिरों में घंटी बजना,
बच्चों का स्कूल जाना।
आराम के बाद
दिन में ज्ञानार्जन,
धनार्जन
अहर्निशं सेवा में
ऐसे काम करनेवाले
पुलिस विभाग,
वैज्ञानिक प्रगति
हमेशा व्यस्त
रेल, विमान,बस
के आवागमन सेवा,
डे डूटी, नैट डूटी करनेवाले कर्मचारी
दिन में सोना, रात में काम।
अंधेरा का आनंद
जनसंख्या की वृद्धि
यह भूलोक दिवा रात
दीपक का उजाला,
सबेरे सूर्य का प्रकाश
मानव जीवन में सुख दुख का आना।
ईश्वरीय सूक्ष्म लीला
न समझ सकता मानव का ज्ञान।
जन्म लेना सबेरा
मृत्यु जीवन का अंधियारा।
यही दीपक और सबेरा
सुख दुख का अद्भुत ज्ञान।
आपकी रचना में दीपक और सबेरा के माध्यम से जीवन, प्रकृति, कर्म और जन्म–मृत्यु का सुंदर दार्शनिक चित्रण है।
आज की चुनौती
दीपक और सबेरा
एस. अनंत कृष्णन, चेन्नई, तमिलनाडु
हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति
रात का अंधेरा,
दिन का उजाला—
मानव जीवन को
सुलाने और जगाने
प्रकृति का अनुपम उपहार।
अंधेरी रात में
छोटा-सा दीपक
अपना प्रकाश बिखेरता है।
उसी दीपक की लौ पर
पतंगा प्राण न्योछावर कर देता है।
उल्लू की आँखें
अंधकार में भी देख पाती हैं,
जुगनू अपनी चमक से
रात को आलोकित करता है।
जैसे धूप में छाया,
वैसे अंधेरे में दीपक का प्रकाश।
थका-माँदा मानव
आराम से सो जाता है।
रात्रि में विचरण करने वाले निशाचर भी
ईश्वर की अद्भुत सृष्टि हैं।
सबेरे सूर्योदय होता है,
मुर्गे की बाँग,
पक्षियों का मधुर कलरव,
प्रकाशमय वातावरण में
जगना और जगाना।
ग्वाले का दूध दुहना,
समाचार-पत्र वाले की व्यस्तता,
मंदिरों में घंटियों का नाद,
बच्चों का विद्यालय जाना—
सब जीवन की गति का संकेत हैं।
आराम के बाद
दिन में ज्ञानार्जन,
धनार्जन और सेवा का क्रम चलता है।
पुलिस विभाग,
वैज्ञानिक,
रेल, विमान और बस सेवाएँ—
सब निरंतर कार्यरत रहते हैं।
कुछ दिन में काम करते हैं,
तो कुछ रात की ड्यूटी निभाते हैं।
अंधकार का भी अपना आनंद है,
प्रकाश का भी अपना महत्व।
यह दिवा-रात्रि का क्रम,
दीपक का उजाला
और सूर्य का प्रकाश—
मानव जीवन में
सुख-दुःख का संदेश देते हैं।
ईश्वर की सूक्ष्म लीला को
मानव का ज्ञान
पूर्णतः नहीं समझ सकता।
जन्म है सबेरा,
मृत्यु है जीवन का अंधियारा।
यही दीपक और सबेरा
हमें सुख-दुःख का
अद्भुत ज्ञान कराते हैं। :::**
यदि चाहें, मैं इसे �और अधिक **काव्यात्मक, छंदबद्ध और प्रभावशाली** रूप भी दे सकता हूँ।
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