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Wednesday, September 9, 2026

विश्व साक्षरता दिवस

 

आज की चुनौती

विश्व साक्षरता दिवस

एस. अनंतकृष्णन, चेन्नई, तमिलनाडु
10-9-26

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साक्षरता के बिना मानव
ज्ञानार्जन करने में असमर्थ है।
संत तिरुवल्लुवर ने
अपने दोहे में कहा है—

“கண்ணுடையர் என்பவர் கற்றோர்,
முகத்திரண்டு புண்ணுடையர் கல்லாதவர்.”

शिक्षित ही नयन वाले हैं,
अशिक्षितों के चेहरे पर
दो आँखें होते हुए भी
वे वास्तव में अंधे हैं।

विश्वभर के लोगों को
शिक्षित बनाने का संकल्प लेकर
8 सितंबर 1967 से
यूनेस्को द्वारा
विश्व साक्षरता दिवस

मनाया जाता है।

भारत में
सर्व शिक्षा अभियान
स्वर्गीय प्रधानमंत्री
अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में
2001 में प्रारंभ किया गया।
6 से 14 वर्ष तक के बच्चों को
मुफ़्त शिक्षा देने का
यह महत्वपूर्ण प्रयास था।

साक्षरता के अभाव में
मानव बहुत कुछ सीखने से
वंचित रह जाता है।
उच्च पद प्राप्त करने के लिए,
अच्छी नौकरी पाने के लिए
शिक्षित होना आवश्यक है।

शिक्षा के महत्व को समझाने,
सीखने की प्रेरणा देने
और सीखने के लिए
लोगों को प्रोत्साहित करने में
साक्षरता दिवस
अत्यंत आवश्यक और
महत्वपूर्ण है।

हर मानव में
पढ़ने, बोलने, लिखने
और समझने की क्षमता विकसित करना
साक्षरता का मुख्य उद्देश्य है।

हर एक शिक्षित व्यक्ति को
निरक्षर लोगों को
शिक्षित करने का
प्रयास करना चाहिए।

शिक्षा देते-देते ही
समाज का विकास होगा।

“स्वदेश में शासक पूजनीय होते हैं,
पर शिक्षित व्यक्ति
सर्वत्र पूजनीय होता है।”

साक्षरता ही मानव को
साहित्यकार,
वैज्ञानिक,
समालोचक,
वक्ता,
प्रवचनकर्ता,
लेखक और कवि
बनने की दिशा दिखाती है।

साक्षरता से
आत्मज्ञान प्राप्त करने की
दिशा भी प्रशस्त होती है।

वित्तीय व्यवस्था को
सही रूप में समझने,
हिसाब-किताब रखने
और आर्थिक जीवन को व्यवस्थित करने के लिए
साक्षरता आवश्यक है।

आज के युग में
संगणक (कंप्यूटर) का ज्ञान भी
शिक्षित व्यक्ति के लिए
अत्यंत आवश्यक है।

साक्षरता मानव को जागरूक बनाती है,
समाज को विकसित बनाती है
और विश्व को
स्वर्ग बना सकती है।

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