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Friday, October 2, 2026

महात्मा मोहनदास करमचंद गांधीजी।

 

धन्य महात्मा गांधी

राष्ट्रपिता महात्मा मोहनदास करमचंद गांधी जी—
यही है उनका व्यक्तिवाचक नाम।

उन्होंने भारत के स्वतंत्रता संग्राम को
जन-जन का आंदोलन बना दिया।
नरम दल के प्रमुख नेताओं में
उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।

सत्य और अहिंसा,
सत्याग्रह और उपवास—

यही उनके प्रमुख अस्त्र-शस्त्र थे।

उनकी प्रेरणा से
स्वतंत्रता संग्राम को
एक नई दिशा और
जनसामान्य की व्यापक भागीदारी मिली।

धन्य हैं महात्मा गांधी!

उनकी दूरदर्शिता का एक महत्वपूर्ण पक्ष
हिंदी के प्रचार और प्रसार से भी जुड़ा था।

भारत जैसे बहुभाषी राष्ट्र में
एक ऐसी संपर्क भाषा की आवश्यकता को
उन्होंने अनुभव किया,
जो विभिन्न प्रदेशों के लोगों को
आपस में जोड़ सके।

इसी भावना से
सन् 1918 में मद्रास में
दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा

की स्थापना उनके मार्गदर्शन और प्रेरणा से हुई।

दक्षिण भारत में हिंदी सीखने और
हिंदी प्रचार के लिए इस संस्था ने
लंबे समय तक महत्वपूर्ण कार्य किया।

गांधीजी के रचनात्मक कार्यक्रमों में
हिंदी-प्रचार भी प्रमुख रहा।

उनकी कल्पना में
भाषा केवल भाषा नहीं थी—
वह जन-जन को जोड़ने का माध्यम थी।

एक संपर्क भाषा,
राष्ट्र की एकता की भावना,
और भारत की अपनी भाषाओं के प्रति सम्मान—

इन सबको साथ लेकर चलना
उनकी दूरदर्शी सोच का हिस्सा था।

आज भी उनके हिंदी संबंधी विचारों पर
विचार करना प्रासंगिक है।

धन्य मोहनदास करमचंद गांधी जी!

धन्य महात्मा गांधी जी!

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