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Tuesday, February 10, 2026

दीप और पतंगा

 दीपक और पतंगा

एस. अनंतकृष्णन,चेन्ने,तमिल्नाडु हिंदी प्रेमी,प्रचारक द्वारा रचित भावात्मक रचना

11-2-26.


दीपक तम मिटानेवाले  ,

दीप ज्योति में दिव्य शक्ति ।

दीप प्रकाश ही देव है। 

तमिल सिद्ध रामलिंग अडिकलार का मंत्र है

अनुग्रहित बृहद् ज्योति,अनुग्रहित बृहद ज्योति!

विशिष्ट बृहद् करुणा अनुग्रहित बृहद ज्योति !

पतंग निशाचर एकनिश्चित दिशा पर उडनेवाले,

रात की रोशनी दिशा निर्देशक ।

दीप के प्रकाश से आकर्षित  वह ,

चक्कर लगाकर थककर मर जाते हैं।

दीप माया है, पतंगों का प्यारा है।

अनजान पतंगा दीप को प्रेमी बनाकर

चक्कर लगाकर प्राण तज देता है।


दीप माया है तो पतंगा  माया मोहित

न समझता,चमकनेवाले सब सोना।

दीप की चारों ओर रोशनी ही रोशनी।

तब पतंगा दिशा हीन हो,माया में चक्कर लगाकर

अज्ञानता से  प्राण तज देता है। 

बाह्य आकर्षम मानव को दिशाहीन कर देता है।

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