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Sunday, February 8, 2026

जीवन यात्रा

 नमस्ते वणक्कम्।

 जिंदगी का सफर।

 समय अपने आप कटता है

क्या जीवन भी अपने आप

 बचपन से बुढ़ापे तक।

 अनजान यात्रा।

शैशव पारकर बचपन 

 बचपन पारकर जवानी

जविवनी से प्रौढ

 प्रौढ़ है बूढ़ा

 यह प्रकृति गति

सहज गति 

 यह अनजान यात्रा।

प्रयत्न करें अप्रयत्न करें

नौकरी करें या न करें 

 जीवन की यात्रा चलती रहती है।

 रक्त संचार की यात्रा।

 साँस लेना छोड़ना

ये सहज क्रिया न तो

 जीवन यात्रा खत्म खत्म 

कर्म क्षेत्र में 

 भाग्यवान यात्रा 

 पहली श्रेणी में 

वातानुकूलित डिब्बे में।

दुर्भाग्यवान की  अनारक्षित डिब्बे में,

भगवान पर विश्वास रखो

‌जीवन की यात्रा 

 बचपन से बुढ़ापे तक

 जैसे सहज चलती हैं।

 वैसे स्वाभाविक आनंद से चलती हैं।

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