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Monday, February 9, 2026

विद्यार्थी जीवन

 विद्यार्थी जीवन 

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एस.अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना 

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10*2*26.

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विद्यार्थी  जीवन,

 आदर्श सर्वांगीण 

विकास का

 आधार शिला।

 होनहार बिरवान  के होत  चीकने  पात।

 हमारे जमाने में 

 गुरु अति आदरणीय रहे।

राजा भी उनके सामने 

 घुटने देकर विनम्र रहता था।

गुरु की माँग पर

 अंगूठा काट देते।

 वह गुरु शिष्य परंपरा 

 स्वार्थ जातिवाद 

 कर्ण के शाप की परंपरा 

 महान ग्रंथों  के कलंकित 

 गुरु परंपरा, सर्वशिक्षा 

 अभियान अब गुरु को

 अध्यापक बनाकर पेशेवर बना दिया।

 अब भी न गुरु तटस्थ।

ट्यूशन पैसे वेतन।

 पंद्रह हजार अप्रशिक्षित 

 निजी स्कूलों के अध्यापक का आदर

सरकारी स्कूल के अध्यापकों को नहीं।

 निजी स्कूलों के विद्यार्थियों का सम्मान 

 सरकारी स्कूलों के छात्रों में ,

मातृभाषा के माध्यम के  छात्रों  में 

एक हीनता ग्रंथी।

बुद्धि लब्धी में फर्क।

 तन मन धन  की प्रतिभा में फर्क।

आजकल के विद्यार्थी जीवन में 

 प्राचीन काल के जाति भाव,

 आधुनिक काल में  धन।

 विद्यार्थी जीवन  में 

आजकल धन की महिमा।

 ट्यूशन छात्र का सम्मान।

 पक्षपात 

 प्रतिभा  का महत्व नहीं।

दान के आधार पर 

धन के आधार पर

 स्कूलों में भर्ती।

 सरकारी स्कूल में 

 न खड़िया,

 न श्याम पट 

 सब के होने पर

 अध्यापक की नियुक्ति में देरी।

 अध्यापक  की नियुक्ति के बाद छुट्टी की  सुविधाएँ।

 निजी स्कूलों के अध्यापक  एक दिन भी

न देरी से  आने पर

 छुट्टी लेने पर वेतन में 

कटौती।

 आधुनिक समाज विद्यार्थी धन के महत्व पर  शिक्षा तोलते हैं।

 विद्यार्थी को हर फन मौला बनाने 

 अभिभावक उनको 

 आज़ादी नहीं देते।

आधुनिक विद्यार्थी जीवन 

 चिंताजनक है,

 मातृभाषा के महत्व को को मंद करनेवाले है।

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