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Sunday, February 8, 2026

खामोशी

 खामोशी की ताकत

एस.अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक 

9-2-26.

खामोशी बेठो,

 राम नाम जपो

 बने लुटेरा

 रत्नाकर आदि कवि वाल्मीकि।

पत्नी का क्रोध,

चुप रह राम में मन लगाओ।

 जोरु का गुलाम 

 ध्यान मग्न रहा

 बना हिंदी साहित्य का चंद्रमा।

कामान्ध अरुण गिरी

वेश्यागमन में व्यस्त 

असाध्य रोगी बना,

आत्महत्या करने गोपुर से कूदा,

 भगवान ने बचाया,

कहा  चुप रह।

 चुप रहा  तमिल भाषा के दिव्य कवि बना

 अरुणगिरिनाथ।

 कंजूसी अमीर से

बुद्ध भिक्षा लेने गया,

अमीर ने बुद्ध की गाली दी।

 बुद्ध चुप रहे।

 अमीर ने पूछा तुम में कोई प्रक्रिया नहीं की।

इतना ही कहा देते हो दान।

 मैं न लेता वह दान आपके पास।

 आपने गालियाँ दी।

मैं न सुना, गालियां आपकी।

मौन की ताकत बड़ी।

मौन तपस्या से

असुर भी मन चाहा वर पाया।

 देव वर देकर थरथराने लगते।

खामोशी में ही आविष्कार।

 खामोशी में आत्मज्ञान।

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