आज की चुनौती
कल्पनाओं के पंख
एस. अनंतकृष्णन, चेन्नई, तमिलनाडु
13-09-2026
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कल्पनाओं के पंख
जेट विमान से भी तेज़,
हवा से भी तेज़।
कल्पनाओं के घोड़े
रंक को राजा बना देते हैं।
करोड़पति बनना आसान है।
चलचित्र देखते-देखते
कथा-नायक, कथा-नायिका बनना आसान है।
लता मंगेशकर,
मुहम्मद रफ़ी बनना आसान है।
उद्योगपति बनना आसान है।
कल्पनाओं के पंख
पल भर में दुनिया घुमा देते हैं,
राजमहल बना देते हैं।
बंजर खेत को
हरा-भरा बना देते हैं।
सप्तलोकों का भ्रमण करा देते हैं।
कल्पनाओं के पंखों पर
कर्ण जैसे दानी,
राम जैसे मर्यादा पुरुषोत्तम,
कृष्ण जैसे गीताचार्य,
आदिकवि वाल्मीकि
बन सकते हैं।
देवेंद्र बनकर
उर्वशी, रंभा और तिलोत्तमा के
नृत्य देख सकते हैं।
हीरे की खान के
मालिक बन सकते हैं।
सारे संसार को
अपने काबू में ले सकते हैं।
कल्पनाओं में जीना
राजभोग है।
परंतु—
कल्पनाओं के पंख
जैसे ही छूटते हैं,
सब कुछ व्यर्थ लगता है।
क्योंकि कल्पना उड़ाती है,
पर वास्तविकता ही जीवन जीना सिखाती है।
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