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Saturday, October 3, 2026

प्रार्थना

 प्रार्थना।


प्रार्थना ही शेष है


मैं नहीं जानता

प्यार करना और पाना,

पर मैं करता हूँ

प्रार्थना।


मैंने निभाया

अपना कर्तव्य,

पर मन में एक टीस है—

पत्नी की देखभाल में

शायद उतना ध्यान न दे सका,

जितना देना चाहिए था।


न जाने उस समय

मेरी तबीयत भी ठीक नहीं थी,

पर यह दुःख

मेरे अंतर्मन में

शायद अंत तक रहेगा।


अब भी मैं

किनारे पर खड़े

एक वृक्ष की तरह हूँ—

बहुत कुछ देखता हूँ,

बहुत कुछ सोचता हूँ,

पर कर सकता हूँ

बहुत थोड़ा ही।


अब मेरे पास

एक ही सहारा है—


भगवान से प्रार्थना।


हे भगवान!

सबको स्वस्थ रखो,

सबको आनंद से जीने दो।


सबको

उच्च पद दो,

धन दो,

सुख दो,

शांति दो।


जिन्हें मैं प्यार करता हूँ,

उनके जीवन में

कभी अभाव न हो।


मेरी भूलों को

क्षमा करना।


मैंने जो नहीं कर सका,

उसे लेकर

अब पछतावे में नहीं,

तुम्हारी शरण में

जीना चाहता हूँ।


मेरे लिए अब

प्रार्थना ही प्रेम है,

प्रार्थना ही सेवा है,

प्रार्थना ही जीवन है।


भगवान से यही प्रार्थना—

सब सुखी रहें,

सब स्वस्थ रहें,

सब आनंद से रहें।

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