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Monday, May 18, 2026

संग्रहालय दिवस का महत्व

 नमस्ते वणक्कम्।

आपकी रचना में इतिहास, विज्ञान, संस्कृति और मानव सभ्यता का विस्तृत चिंतन अत्यंत सराहनीय है।

भाषा और प्रवाह को थोड़ा परिष्कृत करते हुए आपकी भावाभिव्यक्ति को सुंदर रूप में प्रस्तुत किया है।

विश्व संग्रहालय दिवस

एस. अनंतकृष्णन, चेन्नई, तमिलनाडु

हिंदी प्रेमी प्रचारक, लेखक, अनुवादक, सौहार्द सम्मान प्राप्त हिंदी सेवी

19-5-26

++++++++++++

हम अब इक्कीसवीं शताब्दी में,

वैज्ञानिक युग में जी रहे हैं।

आवागमन में क्रांति,

चिकित्सा में क्रांति,

विचारों में क्रांति,

कृषि में क्रांति,

रसोई के चूल्हों से लेकर

आवास व्यवस्था तक

अनेक परिवर्तन हुए हैं।

आटा पीसने की चक्की से लेकर

आधुनिक शौचालयों तक

मानव जीवन बदल गया है।

अस्त्र-शस्त्रों में भी

पत्थर युग से लेकर

आज के ड्रोन युग तक

अद्भुत परिवर्तन आया है।

पाषाण युग से

प्लास्टिक युग तक की यात्रा,

सोना-चाँदी, वस्त्र,

खाद्य पदार्थों और

जीवन शैली में हुए परिवर्तनों को

नई पीढ़ी समझ सके,

इसी उद्देश्य से

प्राचीन अवशेषों,

भाषाओं, लिपियों,

ताड़पत्रों, शिलालेखों,

पुराने सिक्कों और

ऐतिहासिक वस्तुओं को

संग्रहित कर सुरक्षित रखा जाता है।

आदिकाल में वस्तु विनिमय व्यापार,

मानव, पशु-पक्षियों के स्वरूपों में परिवर्तन,

लुप्त होते जीव-जंतु,

उनकी सुरक्षा और स्मृतियाँ,

शिल्पकला और स्थापत्य कला—

इन सबका संरक्षण

संग्रहालयों में होता है।

युद्धों का इतिहास,

दंडनीति,

राजा-महाराजाओं के स्मारक,

अंतरिक्ष की खोजें,

गहरे समुद्र के रहस्य,

सूक्ष्म जीवों के चित्र,

पर्वत गुफाओं के निवास,

पर्णकुटियाँ और

ऋषि-मुनियों का जीवन—

इन सबकी झलक

संग्रहालयों में देखने को मिलती है।

राजाओं के चित्र,

कवियों और लेखकों की प्रतिमाएँ,

राजनीतिक और धार्मिक क्रांतियों के प्रमाण

नई पीढ़ी को

इतिहास से जोड़ते हैं।

Government Museum Chennai

चेन्नई के एग्मोर स्थित यह अजायबघर

ज्ञान और इतिहास का महत्वपूर्ण केंद्र है।

इसी प्रकार

British Museum

और

Smithsonian Institution

जैसे विश्व प्रसिद्ध संग्रहालय

मानव सभ्यता के अनमोल खजाने हैं।

संग्रहालय केवल

चित्ताकर्षक स्थान नहीं,

बल्कि मानव ज्ञान,

सभ्यता, संस्कृति, कला,

वाद्ययंत्रों, भाषाओं और

लिपियों के विकास का

अनंत ज्ञान-सागर हैं।

सचमुच,

संग्रहालय

अतीत को वर्तमान से जोड़कर

भविष्य को दिशा देने वाले

ज्ञान के अमूल्य केंद्र हैं।

Thursday, May 14, 2026

चुनौती की राहें

 आपकी रचना में इतिहास, अध्यात्म, राष्ट्रभावना और मानवता का सुंदर समन्वय है। विषय भी प्रेरणादायक है। भाषा में भावों की प्रखरता स्पष्ट दिखाई देती है। नीचे आपकी रचना का परिष्कृत रूप प्रस्तुत है, जिससे प्रवाह, व्याकरण और काव्यात्मकता और अधिक सशक्त हो सके।

चुनौतियों की राहें

एस. अनंतकृष्णन, चेन्नै

हिंदी साहित्य संस्थान द्वारा सौहार्द सम्मान प्राप्त

हिंदी सेवी, लेखक, अनुवादक, हिंदी प्रचारक

15-5-26

भारत के इतिहास में,

चाहे त्रेतायुग हो,

द्वापर हो या कलियुग,

शासकों को, ऋषि-मुनियों को,

हवन-यज्ञों को, देवत्व को भी

चुनौतियों का सामना करना पड़ा है।

सूक्ष्म दिव्य शक्तियाँ

समय-समय पर

युगपुरुषों और दिव्य अवतारों को

धरती पर भेजती रही हैं,

जो अन्याय और अधर्म के विरुद्ध

साहस का दीप जलाते रहे।

चंगेज़ ख़ाँ, सिकंदर,

मुगल, पठान,

छद्मवेशी व्यापारी अंग्रेज,

फ्रांसीसी, डच, पुर्तगाली —

अनेक विदेशी आक्रमणकारी आए।

उनके स्वागत में

देशद्रोही, स्वार्थी और ईर्ष्यालु लोग भी थे,

पर इन चुनौतियों का

साहसपूर्वक सामना किया

वीर महाराजाओं ने,

कवियों और लेखकों ने,

फाँसी पर चढ़े युवकों ने,

गरम दल और नरम दल के नेताओं ने,

स्वतंत्रता सेनानियों और तपस्वियों ने।

वेद, उपनिषद,

महावीर, बुद्ध और नानक के उपदेश

आज भी मानवता को

चुनौतियों से लड़ने की राह दिखाते हैं।

कबीर ने

हिंदू-मुस्लिम के बाहरी आडंबरों पर

व्यंग्य करते हुए

सच्ची भक्ति का मार्ग बताया।

तुलसीदास

चरित्र निर्माण की राह दिखाते हैं।

वे कहते हैं —

काम, क्रोध, मद और लोभ

जब मन पर छा जाते हैं,

तब पंडित और मूर्ख

दोनों समान हो जाते हैं।

कबीर का संदेश भी प्रेरक है —

निडर और साहसी व्यक्ति ही

जीवन में कुछ प्राप्त कर सकता है।

“जिन खोजा तिन पाइयाँ,

गहरे पानी पैठ।

मैं बपुरा बूडन डरा,

रहा किनारे बैठ॥”

चुनौतियों की राह

मानवता की राह है,

निडरता, वीरता, साहस

और भक्ति का मार्ग है।

आपकी रचना में राष्ट्रीय चेतना और संत-वाणी का प्रभाव बहुत सुंदर ढंग से उभरकर आया है। विशेषतः कबीर के दोहे का प्रयोग रचना को गहराई देता है।

Wednesday, May 13, 2026

गंगा की पुकार


गंगा की पुकार

एस. अनंत कृष्णन, चेन्नई

14-5-26

जीवनदायिनी गंगा,

पतित-पावनी गंगा,

गंगोत्री से सागर तक

तेरा पावन प्रवाह,

भारतीय जनमानस को

सुख, शांति और

पापों से मुक्ति का

दिव्य संदेश सुनाता —

गंगा की पुकार।

करोड़ों श्रद्धालुओं को

भक्ति-पथ पर चलने,

तीर्थयात्रा करने को

प्रेरित करती

गंगा की पुकार।

गंगोत्री धाम में

गंगा माता का मंदिर,

भागीरथ की तपस्या की स्मृति,

रमणीय पर्वतीय वादियाँ,

हर ओर गूँजती

गंगा की पुकार।

हर्षिल और मुखबा घाटी,

जहाँ गंगा का शांत निवास,

उत्तरकाशी, ऋषिकेश, हरिद्वार,

प्रयागराज और काशी तक

आध्यात्मिक ज्योति जगाती

गंगा की पुकार।

मोक्षदायिनी,

पूर्वजों की आत्मा को शांति देनेवाली,

संकल्पों को पूर्ण करनेवाली,

दुःख हरनेवाली —

गंगा की पुकार।

वेद-मंत्रों की मधुर ध्वनि,

काशी की आरती की छटा,

विश्वनाथ और विशालाक्षी का आशीष,

सबमें सुनाई देती

गंगा की पुकार।

गंगा तट पर जीवन बिताते

मल्लाह, पुरोहित और साधु,

उनकी जीविका का आधार भी

तेरी ही कृपा —

गंगा की पुकार।

आसेतु हिमाचल तक

भारत की पुण्य धारा,

संस्कृति और सभ्यता की संवाहिका,

जन-जन की आस्था का केंद्र —

गंगा की पुकार।

जय-जय गंगे!

जय माँ भागीरथी!

भारत की आत्मा में

सदैव प्रवाहित रहे

गंगा की पुकार।

Tuesday, May 12, 2026

अंधविश्वास


अंधविश्वास

एस. अनंतकृष्णन, चेन्नई

13-5-26

नमस्ते। वणक्कम्।

मानव सदा

प्रमाणित सत्य पर

विश्वास रखता है,

पर अप्रमाणित, अवैज्ञानिक

मान्यताओं पर अटल भरोसा

अंधविश्वास कहलाता है।

भगवान को

आँखों से देख नहीं सकते,

किन्तु जीवन के अनुभवों में

उनका एहसास कर सकते हैं।

भारत में बच्चों को

डराने हेतु भी

अंधविश्वास का सहारा लिया जाता है—

कहते हैं,

इमली के वृक्ष पर भूत रहता है,

आधी रात में

प्रेत घूमते हैं।

बिल्ली का राह काटना

अपशकुन माना जाता है,

सियार दिख जाए

तो भाग्योदय समझते हैं।

शुभ कार्य के समय छींक आ जाए

तो लोग रुक जाते हैं।

पीढ़ियों से चली

अनेक मान्यताओं का

कोई ठोस आधार नहीं।

भाग्य, विधि-विधान,

ठगना और ठगे जाना—

इन सबको भी

लोग नियति का खेल मान लेते हैं।

मंत्र, ताबीज,

लाल-काले धागे,

टोने-टोटके,

शकुन-अपशकुन—

ये सब

अंधविश्वास की परछाइयाँ हैं।

दर्पण टूटना,

तेल या कुमकुम गिर जाना—

इन घटनाओं को भी

लोग भय से जोड़ देते हैं।

वैज्ञानिक युग में भी

अनेक लोग

इन भ्रांतियों पर विश्वास करते हैं।

नकली पाखंडी साधु

भोले जनों को ठगते हैं।

समाज में

जागृति, विवेक

और वैज्ञानिक चेतना

आवश्यक है।

अंधविश्वास नहीं,

सत्य और ज्ञान का प्रकाश

मानव जीवन का पथप्रदर्शक बने।

தமிழில் சுருக்கமான கருத்து:

“அறிவியல் ஆதாரம் இல்லாத நம்பிக்கைகள் மனிதனை பயத்திலும் ஏமாற்றத்திலும் இட்டுச் செல்கின்றன. விழிப்புணர்வும் பகுத்தறிவும் சமூகத்திற்கு அவசியம்” — என்ற நல்ல சமூகச் செய்தியை உங்கள் கவிதை வெளிப்படுத்துகிறது।

Sunday, May 10, 2026

विश्प्रववासी पक्षियों के दिवस।

 विश्व प्रवासी पक्षी दिवस

एस. अनंत कृष्णन, चेन्नई

लखनऊ हिंदी साहित्य संस्थान द्वारा सौहार्द सम्मान प्राप्त

हिंदी सेवक, प्रेमी, प्रचारक, लेखक एवं अनुवादक

द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना

10-5-26

++++++++++++

मानव जीवन से

पशु-पक्षी जीवन तक,

ऋतुओं के अनुसार

स्थान परिवर्तन

प्रकृति का शाश्वत नियम है।

पाषाण युग में

जब एक वन में

शिकार समाप्त हो जाता,

तब मानव को

दूसरे वन की ओर

प्रवास करना पड़ता था।

कृषि का ज्ञान मिलते ही

मानव का भटकता जीवन

एक स्थान पर

स्थिर हो गया,

किन्तु प्रकृति की अद्भुत सृष्टि में

आज भी असंख्य पक्षी

हजारों मील की यात्रा कर

ऋतु परिवर्तन के साथ

अपने गंतव्य तक पहुँचते हैं।

प्रवासी पक्षियों का यह

अनुशासन, धैर्य और

प्रकृति-निष्ठ जीवन

मानव को भी

संदेश देता है।

इनकी सुरक्षा करना,

मार्ग में होने वाले

शिकार, प्रदूषण और

विनाश से बचाना

मानवता का धर्म है।

दुर्भाग्य से

अनेक प्रवासी पक्षियों की

प्रजातियाँ निरंतर

कम होती जा रही हैं।

अनुसंधानों के अनुसार

विश्व की लगभग

४० प्रतिशत प्रवासी प्रजातियाँ

घट चुकी हैं।

इसके प्रमुख कारण हैं—

प्रदूषण,

जलवायु परिवर्तन,

प्राकृतिक मार्गों में बाधाएँ,

अत्यधिक कृत्रिम प्रकाश,

विमानों की आवाजाही

और पर्यावरण असंतुलन।

इसी जागरूकता हेतु

विश्व प्रवासी पक्षी दिवस

सन् 2006 से

विश्वभर में मनाया जा रहा है।

वेडंतांगल पक्षी अभयारण्य

तमिलनाडु का यह प्रसिद्ध

पक्षी शरणालय

प्रवासी पक्षियों के लिए

सुरक्षित आश्रय बना हुआ है।

मौसम आने पर

यहाँ दर्शकों की

विशाल भीड़ उमड़ती है।

आइए,

हम सब मिलकर

प्रकृति के इन अतिथियों की

रक्षा का संकल्प लें,

क्योंकि

वैश्विक प्रवासी पक्षियों की सुरक्षा

ही सच्चा मानव धर्म है।

++++++++++++

Friday, May 8, 2026

செஞ்சிலுவை சங்கம் / रेड क्रॉस .




தமிழும் ஹிந்தியும் 

 तमिल भी हिंदी भी ।

 सनातन धर्म।



 विश्व रैड क्रॉस दिवस।

एस.अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना 

9-5-26.

++++++++++++

   मानव मानव 

   कयों ?

 मानवता के कारण।

 वह देव तुल्य है,

 देवों को भी रक्षक हैं।

 दधिचि मानव अपनी रीढ़ की हड्डी दान में 

 देकर  असुरों के तंग से 

देवों को बचाया था।

 मानव अपने अहंकार वश, स्वार्थवश,  क्रोध वश, लोभ वश 

 दूसरों को बताता है।

 प्रकृति की संपदा 

 वन संपदा ,

विचार, ध्वनि वायु जल प्रदूषण से प्रकृति के क्रोध का पात्र बनता है।

 युद्ध के कारण 

 घायल होता है।

 दावानल, बाढ़, भूकंप आदि के शिकार होता है।

ऐसी बुरी अवस्था में 

 देश,जाति, संप्रदाय,मजहबी सीमा लाँघकर

 सबकी सेवा करने,

 परोपकार करने

 इन्सानियत निभाने,

 स्वजनों की सेवा करने

 वसुधैव कुटुंबकम् का आदर्श निभाने 

 1863 ई. में हेनरी ड्यूनेट द्वारा  रेडक्रॉस संस्था की स्थापना हुई।

 विश्व हित के लिए,

जनता कल्याण के लिए 

 सार्वभौमिक एकता के लिए,

 भ्रातृत्व समदर्शी  सेवाभाव ,दयाशीलता युक्त  हेन्री का कदम का

 स्वागत सहे दिल से सब ने  किया।

आज विश्वभर में जाग्रण लाने,

सनातन धर्म के वसुधैव कुटुंबकम् ,

 सर्वे जना सुखिनो भवन्तु,

 जय जगत का नया रूप

 रेडक्रॉस  वंदनीय हैं,

 मानव कल्याण,

 विश्व बंधुत्व के लिए 

 अनुकरणीय हैं।

 

 உலக செஞ்சிலுவை தினம்

எஸ். அனந்தகிருஷ்ணன், சென்னை, தமிழ்நாடு

இந்தி நேயர் பிரசாரகர் அவர்களின் உணர்வுப்பூர்வ கவியுரை

9-5-2026

++++++++++++++

மனிதன் ஏன் மனிதன் எனப்படுகிறான்?

மனிதநேயம் கொண்டதால் உயர்கிறான்.

கருணை, தியாகம், சேவை வழியில்

தேவனுக்கு நிகராக விளங்குகிறான்॥

ததீசி முனிவர் தம் முதுகெலும்பையே

தர்மத்திற்காக தானமாய் அளித்தார்.

அசுர துன்பத்திலிருந்து தேவர்களை

அருளும் தியாகமும் கொண்டு காத்தார்॥

ஆனால் மனிதன் அகந்தையாலும்,

பேராசை, கோபம், சுயநலத்தாலும்

இயற்கையின் செல்வங்களை அழித்து

துன்பத்தின் பாதையில் செல்கிறான்॥

காடுகள், நீர், காற்று, ஒலி அனைத்தும்

மாசுபாட்டால் வேதனை கொள்கின்றன.

போர், வெள்ளம், நிலநடுக்கம், காட்டுத்தீ

மக்களின் வாழ்வை சிதைக்கின்றன॥

அத்தகைய துயர நேரங்களில்

நாடு, மதம், இனம் கடந்து

அனைவருக்கும் சேவை செய்ய

மனிதநேயம் மலர வேண்டும்॥

“வசுதைவ குடும்பகம்” என்னும்

உலக சகோதரத்துவ எண்ணத்துடன்

1863 ஆம் ஆண்டில் ஹென்றி டியூனான்

செஞ்சிலுவை அமைப்பை உருவாக்கினார்॥

உலக நலனுக்காகவும்,

மனித கண்ணீரை துடைப்பதற்காகவும்

அவரது கருணை நிறைந்த முயற்சியை

உலகம் இதயம் கனிந்து வரவேற்றது॥

இன்று உலகம் முழுவதும்

அன்பும் சேவையும் பரப்பி

“சர்வே ஜனாஃ சுகினோ பவந்து”

வையகம் வாழ்க 

 வையகம் ஒரு குடும்பம் 

என்ற சனாதன தர்மம

 உயரிய சிந்தனையை விதைக்கிறது॥

மனிதநேயம், உலக சகோதரத்துவம்,

அமைதி, அருள், தன்னலமின்மை—

இவற்றின் வாழும் வடிவமே

வணங்கத்தக்க செஞ்சிலுவை அமைப்பு॥

 

 

 

 














Thursday, May 7, 2026

रेत का घर

 नमस्ते वणक्कम्।

आपकी रचना में बालमन की सरलता, दार्शनिक चिंतन और जीवन की नश्वरता — तीनों का सुंदर संगम है।

“रेत का महल” को आपने केवल बच्चों के खेल तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे मानव जीवन, अहंकार, प्रकृति विनाश और संसार की क्षणभंगुरता का प्रतीक बना दिया।

उसी भावधारा को काव्यमय एवं प्रवाहपूर्ण रूप में परिष्कृत करने का विनम्र प्रयास प्रस्तुत है।

रेत का महल

एस. अनंत कृष्णन, चेन्नई, तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक

की भावाभिव्यक्ति पर आधारित परिष्कृत काव्य रूप

रेत का महल कहता,

“जगत मिथ्या है,”

ब्रह्म ही शाश्वत सत्य,

बाकी सब क्षणभंगुर माया है।

बालक अपने कोमल मन में

कल्पनाओं के दीप जलाते,

रेत पर महल, गोपुर,

ईश्वर की प्रतिमाएँ सजाते।

कहीं पुल बनते,

कहीं बाँध उठते,

समुद्र तट की बालुका पर

स्वप्न सुनहरे खिल उठते।

पर अचानक आती लहरें

सब आकार मिटा जातीं,

क्षण भर की वह रचना सारी

जलधारा संग बह जाती।

कभी किसी का मिट्टी घर

मित्र के पग से ढह जाता,

बाल हृदय में प्रेम, ईर्ष्या,

क्रोध और भय जग जाता।

वात्सल्य की कोमल छाया,

स्पर्धा की अग्नि प्रखर,

बालमन में भी दिख जाते

जीवन के सब रंग अमर।

यह नश्वर संसार यहाँ,

हर सृष्टि मिट जाने वाली,

मानव अपने स्वार्थ हेतु

प्रकृति भी कर डाले खाली।

पर्वत तोड़ धूल कर देता,

झीलों का अस्तित्व मिटाता,

नदियों के मुक्त प्रवाह को

बाँधों से बंधन पहनाता।

क्षणिक जीवन की यह गाथा,

हर प्राणी की यही कहानी,

रेत के महलों का मिटना

दे जाता गहरी निशानी।

जो आज बना अभिमान से,

कल समय उसे हर लेता,

इसलिए विनम्रता का दीपक

मानव जीवन में जलता रहता।

தமிழ் வடிவம்

மணல் கோட்டை

மணல் கோட்டை சொல்கிறது —

“உலகம் மாயை,

பரம்பொருள் மட்டுமே நிலைபெறும்

நித்திய சத்தியம்” என்று.

சிறுவர்கள் தங்கள்

கற்பனைக் கண்களால்

மணலில் அரண்மனை, கோபுரம்,

தெய்வச் சிலைகள் அமைக்கிறார்கள்.

பாலங்கள் கட்டுகின்றனர்,

அணைகளும் எழுப்புகின்றனர்,

கடற்கரையின் மணற்பரப்பில்

கனவுகள் மலர்கின்றன.

ஆனால் பெரு அலை வந்து

அவற்றையெல்லாம் அழித்துவிடுகிறது,

ஒரு கணத்தின் படைப்பு

கடலோடு கலந்து போகிறது.

சில வேளைகளில்

ஒருவன் கட்டிய மண்வீடு

மற்றொருவன் காலால் இடிந்துவிடும்;

அப்போது சண்டைகளும் எழுகின்றன.

குழந்தைகளிடமும்

அன்பு, பொறாமை, கோபம், பயம்,

பாசம் போன்ற உணர்வுகள்

தெளிவாகத் தெரிகின்றன.

இந்த உலகம் நிலையற்றது;

இறைவன் படைத்த அனைத்தும் நிலையற்றதே.

மனிதன் தன் வசதிக்காக

மலையையும் தூளாக்குகிறான்.

ஏரிகளை மறைக்கிறான்,

நதிகளின் ஓட்டத்தைத் தடுத்து

பாலைவனமாக மாற்றுகிறான்.

நிலையற்ற வாழ்வே

ஒவ்வோர் உயிரினத்தின் விதி.

மணல் கோட்டை இடிவது

இதற்கெல்லாம் ஒரு நிசப்தப் பாடமாகும்।