Search This Blog

Sunday, September 20, 2026

सबसे प्यारा अपना घर


आज का काव्य-पाठ

सबसे प्यारा अपना घर

एस. अनंतकृष्णन, चेन्नई, तमिलनाडु

अपने घर में

आज़ादी से जीना,

मनचाहा खाना-पीना,

मनचाहे समय सोना-जागना,

मनचाहे समय बाहर घूमना—

यही तो है

अपने घर की स्वतंत्रता।

माँ का प्यार,

पत्नी का दुलार,

अपनेपन का संसार—

अपने घर में

अपना राज।

प्यारे घर में

बेटे-बेटी,

बहू-दामाद

प्रेम, आदर और सत्कार दें,

हमारी माँग पूरी करें—

फिर भी कभी-कभी

अपनी इच्छा की

एक छोटी-सी पूर्ति में

उनकी थोड़ी-सी उदासीनता

हमें भारी लगती है।

लगता है—

हमारी इच्छा ही

उनके लिए बाधा बन गई।

अपने घर में

जी चाहे, जब चाहें,

जो चाहें, वह करें;

किसी से संकोच नहीं,

किसी से अनुमति नहीं।

अपने घर में

अपना नियम,

अपना अधिकार,

अपना राज।

पराए घर में

हम आश्रित होते हैं,

और वे

हमारे आश्रयदाता।

अपने घर की स्वतंत्रता

और पराए घर की मर्यादा में

यही तो अंतर है।

मातृभूमि भी

हमारा अपना घर है।

फिर वहाँ क्यों

मनमाना थूकना,

मनमाना कूड़ा फेंकना,

कतार तोड़कर आगे बढ़ना,

रिश्वत को प्राथमिकता देना?

अपराध के आरोप झेलने वाले

सांसद, विधायक और मंत्री भी

यदि चुनाव जीतकर

जनप्रतिनिधि बन जाते हैं,

तो यह प्रश्न

हमारे सामने खड़ा होता है—

क्या अपने घर में

अपने नियमों का अर्थ

मनमानी करना भी है?

नहीं!

अपने घर का राज

जिम्मेदारी का राज हो,

स्वतंत्रता के साथ

अनुशासन का राज हो,

अधिकार के साथ

कर्तव्य का राज हो।

अपना घर सबसे प्यारा,

अपनी मातृभूमि सबसे न्यारी।

घर हो या देश—

अपना राज तभी सुंदर है,

जब उसमें

सबका सम्मान,

सबकी सुरक्षा

और सबका हित हो।

अपने घर में

अपना नियम,

अपना कानून,

अपना राज।

एस. अनंतकृष्णन

चेन्नई, तमिलनाडु

हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा

स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना।

No comments:

Post a Comment