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Saturday, April 4, 2026

प्रकृति

 प्रकृति के अनेक रंग।


एस. अनंत कृष्णन चेन्नई 

5/3/26

प्रकृति के विविध गुण 

 सब कुछ जानना समझना,

 मानव बुद्धि से असंभव।।

 सफेद रंग की चमेली,

 मनमोहक सुगंध 

 गुलाब की खुशबू 

 ऐसे भी सुंदर फूल 

 गंध हीन।

ऐसे भी फूल बड़े रंगीले

 पर बदबू से भरा।

 प्रकृति के गगन रंग 

 नीले काले उजाले।

 सूर्योदय सूर्यास्त के समय  लाल पीले।

 इंद्रधनुष के साथ रंग।

पानी समुद्र का खारा।

 वहीं पानी भाप बनकर 

काले बादल बिजली चमक वज्र ध्वनि 

 बरसने पर मीठा।

 विभिन्न भाषाओं के 

भिन्न-भिन्न लिपियाँ।

 क्रोटन्स के रंग-बिरंगे पत्ते।

हर एक पेड़ पौधों के

 पत्ते देख किसी कवि ने लिखा है,

 कैंची नहीं ईश्वर के हाथ में, कटि पत्तियाँ न्यारी।

 एक ही माँ बाप के बच्चे,

 सुंदर ,भद्दा काला गोरा, लंबा नाटा।

 मधुर स्वर कठोर स्वर।

 चतुर, चालाक, ठग

 ईमानदारी, 

 रामावतार के नील रंग,

 कृष्णावतार के श्याम रंग।

प्रकृति की सृष्टि में 

 रंग-बिरंगे, विभिन्न स्वभाव के जानवर,

 पालतू जानवर,

 जंगली जानवर।

हाथी ,ऊँट, हिरन 

 हिरन के भेद,

 सींगवाला,

 हिंदी वाला

 हर एक सृष्टि में 

अति विचित्रता।

 खून का लाल रंग

 पर उसमें भेद वर्गीकरण।

 सोचते सोचते 

 प्रकृति के रंग गुण

 ईश्वर की सृष्टि अति सूक्ष्म।

 नवरत्नों के रंग।

 सोना, चाँदी,

प्लाटिनम् के रंग।

 अति अनुपप

 अति अपूर्व।

 अति अनूठा।

 प्रकृति के रंग असंख्य।

 गुण में अति विविधता।

वचन की कीमत

 वचन की कीमत।

एस. अनंत कृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना 

4-4-26

++++++++++++

प्राण जाए पर वचन न जाए,

 यह मुहावरा मानव जीवन के अनुशासन और न्यायप्रियता के लिए 

 अनुकरणीय हैं।

 मानव मानव पर 

 भरोसा रखने

 वचन का पालन 

 अत्यंत आवश्यक है।

 भारतीय इतिहास में 

 वचन निभाने की कहानियाँ  मानव के 

 आदर्श चरित्र का उदाहरण है।

 आजकल के सांसद ,

विधायाक  बदनामी 

इसलिए है  कि  वे वचन 

निभाते नहीं,

 हर चुनाव में वही

वचन देते रहते हैं।

 धन के आधार पर 

 जय पराजय,

 तीस प्रतिशत अविश्वसनीय मत दाता 

 वोट ही नहीं देते।

 30% विपक्षी।

 10% गठन बंधन वोट।

 हिंदी में मतदाता  मत देने विश्वास  नहीं, 

 मत का भिन्नार्थ 

 सार्थक है।

 मत देना मत 

 ये वादा निभाते नहीं,

ऐसे विचार 

 हर एक के मन में,

 30%  अल्पमत के शासन।

 कच्ची सड़कें,

 पानी की तंगी 

 हर चुनाव में दूर करने का वादा।

  चुनाव आयोग करोड़ों के भ्रष्टाचार धन खर्च 

 रोकने असमर्थ।

 वचन निभाने अधिकारी ,प्रशासक,

 जनकल्याण योजना को

लागू करने बाधक हैं।

  हुमायूं ने राखी बाँधकर 

 राजपूत रानी  को सुरक्षा की वादा की, निभाया।

 उनका नाम आज भी आदरणीय है।

 चंद्रधरशर्मा गुलेरी की कहानी एक ही 

 लोकप्रसिद्ध  है

 उसने कहा था,

उसमें नायक अपने लड़कपन की प्रेमिका के

 पति की जान बचाने 

 अपनी वादा  निभाने

 प्राण दिये, 

वह सैनिक लहना सिंह का पात्रा मृत्यु शय्या पर उसके स्मरण चित्र पाठकों के मन में चिर स्मरणीय।

 अतः वचन की कीमत 

अमूल्य है,

 कर्ण ने वचन निभाने 

 कुंती का समर्थन किया।

 अतः मानवता निभाने

 वचन निभाना 

 चरित्र बल के लक्षण हैं।

Thursday, April 2, 2026

कोष

 खजाने का राज़ 

 एस. अनंत कृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना।

3-4-26.

 खजाने की खोज में 

 जंगलों में भटकने वाले,

सागर में गोता लगाने 

वाले,

 साधु संतों से

 खजाने के राज़

 जानने  भटकने वाले,

 बलवान दुर्बलों से लूटकर खजाना भरने वाले,

 अश्वमेध यज्ञ करके 

 दुर्बल राजाओं के धन से

 खजाना भरनेवाले,

 जन्मकुंडली के आधार पर खजाना मिलने के 

ख्वाब देखनेवाले।

 सरकार की खजाना खाली हैं तो देश अकाल।

 न वेतन, न पेंशन,

न देशोन्नति।

 राजकोष

 मुगलों ने की उर्दू भाषा के प्रभाव से बन गया

 खजाना।

 लोभी  अपने धन को 

 खजाने में गाड़कर रखते।

 लोभी का धन 

 खजाने के रूप में 

 पाते किस्मतवाले।

 

 




 


Wednesday, April 1, 2026

संकल्प की मशाल। एस. अनंत कृष्णन, चेन्नई , ।

 संकल्प की  मशाल।

एस. अनंत कृष्णन, चेन्नई  , तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना।

2-4-26.

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मानव तो अपने जीवन में 

 नाम पाना चाहता है।

धन कमाना चाहता है।

अपना गौरव चाहता है।

 स्वाभिमान चाहता है।

पदोन्नति चाहता है।

 नेता, अभिनेता बनना ,

 गायक बनना,

 देश की सेवा करना,

 सैनिक बनना

 समाज सेवा करना,

आध्यात्मिक सेवा में लगना,

भगवान के दर्शन में ध्यान लगाना,

कवि बनना और कवयित्री बनना,

ज्ञान पीठ, साहित्य अकादमी पुरस्कार पाना,

विमान का चालक बनना,

वैज्ञानिक बनना 

 विविध विचार।


हर एक की अपनी अपनी तमन्नाएँ हैं,

  अपना अपना मंजिल है,

अपनी आकांक्षाओं के

 शिखर पर पहुंचने 

 संकल्प की मशाल जलाना चाहिए।

वह प्रकाश देकर 

 प्रेरित करेगा।

 अग्रसर होने के लिए 

‌प्रोत्साहित करेगा।

Monday, March 30, 2026

नयी सुबह का सूरज

 नयी सुबह का सूरज

एस.अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना 

31-3-26

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मानव सदा अपने  जीवन में उजाला ही चाहता है।

अंधकार मय जीवन 

 दुखपूर्ण ही है।

 हर कोई अपने जीवन में 

 सूर्योदय की प्रतीक्षा करता है।

 व्यापार में बड़ा लाभ 

 जिस दिन होगा,

वहीं नयी सुबह का सूरज होता है।

छात्र के परीक्षा फल में 

 अधिक अंक मिलें तो वहीं उसके जीवन में 

 नयी सुबह का सूर्योदय होता हैं।

बेकार युवक को नौकरी मिलने के दिन 

नयी सुबह की नयी किरणें जीवन में।

निस्संतान दंपति को जिस दिन पुत्र होता है,

वह सुबह उसके जीवन

 सार्थकता का सूर्योदय होता है।

 हर  मनुष्य के सुदीर्घ प्रार्थना मनोवांछित इच्छा पूरी होने पर  वह दिन 

 नयी सुबह,

 नयी आशा का

  सूर्योदय होता है।

 पदोन्नति के दिन 

की नयी सुबह  

नयी लालिमा अति आनंदोल्लास  की सुबह होती है।




Sunday, March 29, 2026

लोभ की जंजीरें

 लोभ की जंजीरें 

 एस.अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना 

30-3-26

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लोभ की जंजीरें 

बाँध  मन की चंचलता में 

फँस जाएंँगे तो

वह भवसागर के

 भँवर में ले जाकर 

बचने न देंगी।

  अपने पास सर्वसंपत्ति होने पर भी नाते-रिश्तेदारों और अड़ोस पड़ोस के

 आनंदोल्लास देखकर 

 लोभी का दिल जलेगा ही।

लोभ की जंजीरें आजीवन रहेंगे ही।

 सुंदरता देखकर जलन,

  लोभी की वस्तुएँ जैसी

  अन्यों के साथ देखकर

 अति दुख का एहसास होगा ही।

 समान वस्तुएँ होने पर भी,

 रंग  भेद, उनकी सुंदर

 देखरेख से मानसिक दुख  होगा ही।

 शांति क्या है? संतोष क्या है? आनंद क्या है?

 मृत्यु पर्यन्त जानने का

 प्रयत्न लोभी जानेगा, समझेगा ही नहीं।

 अभाव! अभाव! अभाव!

 यही उनके  सहज प्रवृत्ति होगी।

 लोभी सेदूसरों की तरक्की सहा नहीं जाता।

 लोभ की जंजीरें तोड़ने का प्रयास भी नहीं करता।

 संताप भरे विचार

 चिंतन से  तड़प तड़प कर घुट घुटकर  उदास चेहरे से ही इस लोक की लीला समाप्त कर देगा।

Saturday, March 28, 2026

अकाल की कल्पना

 कल्पना का जाल

एस.अनंतकृष्णन, चेन्नै

तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक 

29-3-26

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मानव ज्ञान चक्षु प्राप्त पशु।

  जिज्ञासु प्रवृत्ति वाला मानव

विचारशील और चिंतन शील।

  यथार्थ घटनाएँ,

 वास्तविक दृश्य

उसकी है कल्पना का आधार।

पक्षी को देखा,

उड़ने की कल्पना,

 परिणाम हवाई जहाज का आविष्कार।

 दृश्य, दृश्य से विचार चिंतन सच्चाई के आधार पर  कल्पना,

परिणाम आदर्शोंन्मुख यथार्थवाद।

 रंग-बिरंगी बिल्लियों को देखा, सोचा, मानव की एकता की कल्पना की।

एक ही बिल्ली ने बच्चे दिये नाना रंग के।

कल्पना जागी,

 कवि ने लिखा

 भले ही रंग भिन्न-भिन्न,

 पर एक ही माँके बच्चे।

 आगे इस की कल्पना,

एक ही भारतवासी,

भारत माौ एक

 कश्मीरियों के ,

 उत्तर प्रदेश के गोरे लोग,

दक्षिण के काले लोग

 भिन्न-भिन्न भाषाएँ,

 आसेतु हिमाचल में 

 विचारों की एकता,

 आध्यात्मिक एकता,

कैलाश का शिव,

रामेश्वर का शिव

 लोकनाथ विश्वनाथ 

 एकता की यथार्थता

 आदर्श एकता प्रेरणा।

 उत्तर के बाढ़ भरी जीव नदियाँ,

दक्षिण के सूखे इलाके,

  यथार्थ में कल्पना 

 जोड़ों नदियों को,

 व्यर्थ पानियों को 

 नदियों को जोड़कर 

 देश को समृद्ध बनाओ।

उत्तर के गेहूँ, दक्षिण के चावल, पान सुपारी।

 समृद्ध कृषि प्रधान भारत भूमि

विश्वभर के अन्नदाता,

 पाश्चात्य बर्फीले,

आहार सामग्रियों का अभाव,

 अतः भारत को औद्योगीकरण के नाम से 

 मरुभूमि मत बनाओ।

 सोना चांदी,रकम

 भूखे के सामने कुछ नहीं 

 खेती की प्रधानता पर ध्यान रखो,

 विश्व भर को भूख से बचाओ,

स्वर्ण उगलते कृषी भूमि को कारखानों की  भूमि

 बनाकर भावी पीढ़ियों के लिए भारत को अकाल-ग्रस्त मत बनाओ।

 मैदान टच कहानी याद रखो,

 मैदान ने वर पाया,

 जिसको वह छुएगा,वह सोना बनना है,

वर मिल गया,

 उसकी मनोकामना पूरी हुई।

 पत्नी बेटे माँ बाप जिसको भी स्पर्श करता,

 बन जाता सोना।

 भूखे लगी, खाने भोजन पर हाथ रखा तो

 भोजन सोना।

समझा भोजन ही प्रधान।

 यह साधारण कल्पना नहीं,

 भारत के कृषी संपन्न देश को नगरीकरण, नगर विस्तार के नाम से 

 मरुस्थलीय प्रदेश बनाना

 सही नहीं,

 झीलों का नदारद करना

 समृद्ध भारत भूमि को

 मृग मरीचिका बनाना है।

वहाँ मरुभूमि को कृषि प्रधान बना रहे हैं,

 यहाँ कृषी प्रधान को

‌सद्यःफल के लिए 

 नगर विस्तार।

 भारतीय सहनशीलता 

 पाश्चात्य भाषा धन दे रही है,

 पर पारिवारिक शांति नष्ट कर रही है।

 तलाक बढ़ रहा है।

 जितेंद्रियता, मर्यादा पुरुषोत्तमता  अशांति ला रही है।

  यही कल्पना कीजिए,

 भारत को कृषी प्रधान बनाइए।

न तो  भावी पीढ़ी अकाल पीड़ित  दाने दाने के लिए तड़पेगा ही।

 यह कल्पना भावी अकाल भारत की सावधानी।