आपकी रचना में स्मृतियाँ, सामाजिक परिवर्तन और साइकिल के इतिहास का सुंदर समन्वय है। इसे थोड़ा परिष्कृत एवं काव्यमय रूप में इस प्रकार प्रस्तुत किया जा सकता है:
विश्व साइकिल दिवस
(पैरगाड़ी का महत्त्व)
एस. अनंतकृष्णन, चेन्नई
4-6-2026
पैरगाड़ी एक अनोखा वाहन,
सादा जीवन, उच्च विधान।
जब मैं आठ वर्ष का बालक था,
हमारे गाँव में साइकिल का मालिक
बहुत बड़ा अमीर माना जाता था।
किराये पर मिलती थी साइकिल,
एक घंटे का अधन्नी भाड़ा।
पर वह अधन्नी जुटाना भी
हम बच्चों के लिए था बड़ा कठिन।
उस समय वही सबसे तेज़ सवारी,
फिर भी नियमों की थी जिम्मेदारी।
सरकार को कर देना पड़ता था,
डबल सवारी अपराध कहलाती थी।
रात्रि में दीप जलाकर चलना,
अनिवार्य नियम माना जाता।
डायनमो की चमकती रोशनी
साइकिल की शान बढ़ाती जाती।
आज साइकिलों की संख्या घटी,
मोटर वाहनों की भीड़ बढ़ी।
किन्तु साइकिल का महत्त्व आज भी,
कहीं कम नहीं हुआ है।
न पेट्रोल चाहिए, न डीज़ल,
बस पैडलों का सतत प्रयास।
चलाने से व्यायाम भी होता,
स्वास्थ्य का मिलता है उपहार।
पेट्रोल के बढ़ते दामों पर,
कभी-कभी नेता और मंत्री भी
साइकिल चलाकर संदेश देते हैं
सादगी और बचत का।
सन् 1817 में जर्मनी के
Karl Drais ने
लकड़ी की, बिना पैडल और बिना चेन वाली
प्रारम्भिक पैरगाड़ी का निर्माण किया।
फिर सन् 1839 में
Kirkpatrick Macmillan ने
पैडल युक्त साइकिल का विकास किया।
यही क्रम आगे बढ़ता गया,
और आज गियर वाली आधुनिक साइकिलों तक पहुँच गया।
साइकिल केवल वाहन नहीं,
स्वास्थ्य, पर्यावरण और सादगी की पहचान है।
विश्व साइकिल दिवस पर
आइए इसका महत्त्व समझें और अपनाएँ।
साइकिल चलाना स्वास्थ्यप्रद है,
और प्रकृति के प्रति हमारा सुंदर योगदान भी। 🚲🌿
संदेश:
"पैडल घुमाइए, स्वास्थ्य पाइए;
प्रदूषण घटाइए, पर्यावरण बचाइए।"
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