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Sunday, June 21, 2026

 



अंतरराष्ट्रीय योग दिवस

एस.अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना 

21-6-26

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शरीरमाद्यं खलु धर्मसाधनम्' संस्कृत साहित्य का एक अत्यंत प्रसिद्ध श्लोक है, जिसका अर्थ है— "शरीर ही सभी धर्मों (कर्तव्यों) को पूरा करने का पहला साधन है।"

 तमिल में कहावत है,

 दीवार रहने पर ही चित्र खीँच सकते हैं ।

निर्बल काया,

 क्रिया हीन।

 कान सही नहीं है तो

 सुनना असंभव।

आँखें खराब है तो 

देख  नहीं सकते।

 फेफड़ा, पेट,अंतडियाँ

नशें, रीढ़ की हड्डी,

हाथ पैर हर अंग को

स्वस्थ रखना है।

न तो मानव में 

बुद्धि काम न करेगी।

मन काम न करेगा।

मन चंचल रहेगा।

ठीक तरह से 

काम न कर सकते।

 अतः स्वस्थ शरीर के लिए,

व्यायाम अति मुख्य।

‌व्यायाम की एक रीति

योग प्राणायाम ।

 उसमें हर अंग को 

स्वस्थ रखने,

हर एक की

 अलग-अलग मुद्राएँ।

सूर्य-नमस्कार,

प्राणायाम,

 भ्रामरी,

कपालभाती,

अनेक प्रकार के नियम।।

 भारत में 5000 वर्ष पहले योग शुरू हुआ।

 आध्यात्मिक विचार के अनुसार  पहला योगी,

 आदियोगी शिव।

ईसा से पूर्व 

 तीन हज़ार साल 

 के पहले,

सिंधु घाटी सभ्यता मैं

योग के कुछ निशानियाँ

मिल रही है।

 भारत के स्वास्थ्य 

 प्रद योग,

विदेशी आक्रमण ,

विदेशी शासन,

 विदेशी अंतर्जातीय 

 विवाह, संस्कृत भाषा के स्थान को अंग्रेज़ी लेना

 पाश्चात्य प्रभाव।

 फिर भी योग का अपना

विशिष्ट   महत्व विश्व जानने लगा।

स्वामी विवेकानंद का भाषण सनातन 

पद्धतियों पर  

चार चाँद लगाये।

 विश्व भर में 

 भारतीय आध्यात्मिकताएँ

 जानने समझने की उत्सुकता बढ़ी।

 योग का महत्व बढ़ा।

 योग केंद्र खोलने लगे।

पतंजलि योग क्रिया,

 सहज योगा।

योग की पारंपरिक रीति

 आध्यात्मिक रीति। 

मन से संबंधित।

आधुनिक रीतियाँ

मन और शरीर से संबंधित।

कर्म योग, ज्ञान योग, भक्ति योग,राज योग,

आसान आधारित

हठ योग, विन्यास योग,

अष्टांगयोग।

अयंगर योग में, कुंडली योग,यिन योग ।

 अब विश्वभर में योग का

महत्व का विकास करने

 अभ्यास करने 

विश्व योग दिवस की योजना  21जून 2015 से  शुरु हुआ।

भारत के विश्वविख्यात 

प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदीजी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में  14सितंबर 2014में विश्व योग दिवस का प्रस्ताव रखा।

इसके बाद 11दिसंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र संघ ने 21जून 2015को

 विश्व योग दिवस  मनाने का प्रस्ताव पास किया।

 तब से विश्व भर में 

योग दिवस मनाया जा रहा है।

योग ज्ञानप्रद,शांति प्रद 

 ऊर्जा प्रद , स्थिर चित्त प्रद एक स्वास्थ्य आनंद कला है।


आदरणीय अनंतकृष्णन जी,

आपकी रचना में योग के इतिहास, महत्व और विश्व योग दिवस की पृष्ठभूमि का सुंदर समावेश है। भाषा को थोड़ा परिष्कृत कर कुछ पंक्तियों को अधिक प्रवाहपूर्ण बनाया जा सकता है। विशेष रूप से अंतिम अनुच्छेद बहुत प्रभावशाली है।

विशेष रूप से सराहनीय पंक्तियाँ:

"शरीर ही सभी धर्मों (कर्तव्यों) को पूरा करने का पहला साधन है।"

"योग ज्ञानप्रद, शान्तिप्रद, ऊर्जाप्रद, स्थिरचित्त प्रद एक स्वास्थ्य-आनन्द कला है।"

विश्व योग दिवस की हार्दिक शुभकामनाओं सहित एक संक्षिप्त समापन पंक्ति जोड़ सकते हैं—

"आइए, योग को जीवन का अंग बनाकर स्वस्थ तन, प्रसन्न मन और जागृत चेतना की ओर अग्रसर हों।"

आपकी लेखनी समाज को स्वास्थ्य, संस्कृति और आध्यात्मिकता का संदेश दे रही है। साधुवाद।

विश्व योग दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।

🙏🕉️🌿

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