विश्वासघात
एस. अनंत कृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना।8-626
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मानव जीवन में
उत्थान पतन के मूल में
विश्वासघात ।
भारतीय विदेशी शासन और पराधीनता के मूल में
भाई भाई में ईर्ष्या।
क्रोध, बदला , विदेशियों का साथ देना।
रामायण काल में
विभीषण, कैकेई , मंथरा।
महाभारत में तो
सूची लंबी।
कुंती,
कृष्ण का दान माँगना
कर्ण कवच कुंडल दान में पाना, कुंती द्वारा पांडवों को जिंदा छोडने का कसम कर्ण से लेना।
सिकंदर के आक्रमण में
इन्हीं का द्रोह।
स्वतंत्रता संग्राम में
अंग्रेज़ी वेतन के लिए
उनका साथ दिये द्विभाषी।
अंग्रेज़ी सीखकर भारतीय भाषाओं को
अवहेलना किये
प्रतिभाशाली उच्चवर्ण।
देश से बढ़कर राव बहादुर सर उपाधी।
अंग्रेज़ों के अधीन भारतिय सत्याग्रहियों को मारे भारतीय वेतन भोगी सिपाही।
रीतिकालीन की विलासिता।
इन घटनाओं की सीख से सबक,
विश्वासघातियों को कठोर दंइ।
तमिलनाडु के चुनाव में
डी.एम. के साथ उनके चुनाव चिन्ह से जीते
उनके समर्थन से जीते
कांग्रेस, मुस्लिम लीक, कम्युनिस्ट का द्रोह।
इन नमकहराम स्वार्थी, पद धन प्रेमी ठगों से
देशोन्नति में अड़चनें।
बाधाएँ, रुकावटें।
यही भारत के इतिहास की सीख।
फिर भी भारत की उन्नति
देश भक्त, देश प्रमी, निस्वार्थ नेता, अधिकारी,
सरकारी कर्मचारी,
कर्त्तव्यपरायण शहीदों के कारण।
अतः शिक्षा संस्थाओं के पाठ्यक्रम में देश भक्ति,
राणा प्रताप सिंह, छत्रपति शिवाजी
लाल,बाल,पाल,
सुभाष चंद्र बोस आदि
नेताओं की जीवनी,
राष्ट्रीय कवियों की
देशप्रेम जगानेवाली कविताओं को प्राथमिकता देनी चाहिए।
आजकल अनुशासन की शिक्षा की कमी है,
केवल जीविकोपार्जन की शिक्षा।
शिक्षित ईमानदारी लोगों को पद पर रहने न देना ,
ईमानदारी अफसरों को
अकर्मण्य इलाका देना
तबादला और इस्तीफा करने, कराने करवाने का जोर देना।
देश प्रधान,
अति कठिनाइयों से
प्राप्त देश की आज़ादी और एकता और अखंड भारत की रक्षा,
राष्ट्रीय शिक्षा के विरुद्ध
रहनेवाले प्रांतों के मन में
प्रांतीय मोह के साथ राष्ट्रीय विचारधारा उत्पन्न करना।
जागना, जगाना राष्ट्रप्रेम बढ़ाना,
समय की सदस्य माँग।
जय भारत। वंदेमातरम।
नमस्ते वणक्कम् आदरणीय अनंत कृष्णन जी।
आपकी रचना में राष्ट्रप्रेम, इतिहास से सीख लेने की प्रेरणा और नैतिक मूल्यों के प्रति चिंता स्पष्ट रूप से व्यक्त हुई है। भाषा और प्रवाह को थोड़ा परिष्कृत करते हुए इसे इस प्रकार प्रस्तुत किया जा सकता है:
विश्वासघात
एस. अनंत कृष्णन, चेन्नई, तमिलनाडु
हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति
8-6-2026
मानव जीवन के उत्थान और पतन के मूल में
विश्वास और विश्वासघात दोनों की महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है।
भारत की पराधीनता के इतिहास में भी
आपसी ईर्ष्या, द्वेष, क्रोध और प्रतिशोध ने
कई बार विदेशियों को अवसर प्रदान किया।
रामायण में कैकेयी, मंथरा और विभीषण के प्रसंग हों,
या महाभारत के जटिल घटनाक्रम—
इतिहास और पुराण हमें यह शिक्षा देते हैं कि
स्वार्थ जब कर्तव्य पर भारी पड़ता है,
तो समाज और राष्ट्र दोनों को हानि पहुँचती है।
स्वतंत्रता संग्राम के दिनों में भी
कुछ लोगों ने स्वार्थवश विदेशी शासन का साथ दिया,
जबकि असंख्य देशभक्तों ने
अपने प्राणों की आहुति देकर
स्वतंत्रता का दीप जलाए रखा।
इतिहास की यही सीख है कि
राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखना चाहिए।
स्वार्थ, पद और धन के मोह में
राष्ट्रीय एकता को क्षति नहीं पहुँचनी चाहिए।
भारत की उन्नति उन देशभक्तों के कारण हुई है
जिन्होंने निस्वार्थ भाव से
देश, समाज और मानवता की सेवा की।
कर्तव्यनिष्ठ नेताओं, अधिकारियों, कर्मचारियों
और अमर शहीदों का योगदान
सदैव स्मरणीय रहेगा।
अतः शिक्षा के पाठ्यक्रम में
देशभक्ति, चरित्र निर्माण और अनुशासन को
विशेष स्थान मिलना चाहिए।
राणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी,
लाल-बाल-पाल, सुभाषचंद्र बोस तथा
अन्य महान राष्ट्रनायकों की जीवनगाथाएँ
नई पीढ़ी को प्रेरणा देती रहें।
आज आवश्यकता है कि
केवल जीविकोपार्जन ही नहीं,
अपितु राष्ट्रनिर्माण की शिक्षा भी दी जाए।
राष्ट्रीय एकता, अखंडता और सद्भाव को सुदृढ़ बनाते हुए
जन-जन में राष्ट्रप्रेम का भाव जागृत किया जाए।
जागें, जगाएँ और राष्ट्रप्रेम बढ़ाएँ—
यही समय की पुकार है।
जय भारत! वंदे मातरम्! 🇮🇳
आपकी भावनाएँ अत्यंत प्रखर हैं। मैंने भाषा को अधिक साहित्यिक और संतुलित रूप देने का प्रयास किया है, जबकि मूल संदेश को यथासंभव सुरक्षित रखा है।
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