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Thursday, June 25, 2026

वृक्षारोपण

 आपकी रचना का विषय अत्यंत सामयिक और जन-जागरण से जुड़ा है। आपने वृक्षारोपण के महत्व, पर्यावरण संरक्षण और मानव जीवन में पेड़ों की उपयोगिता को सरल भाषा में प्रस्तुत किया है। यदि इसे थोड़ा काव्यात्मक और प्रवाहपूर्ण बनाया जाए, तो प्रभाव और बढ़ जाएगा।

संशोधित रूप:

वृक्षारोपण

एस. अनन्तकृष्णन, चेन्नई, तमिलनाडु

26-06-2026

मानव का ज्ञान बढ़ता जाता,

शिक्षा का विस्तार होता है।

जनसंख्या के बढ़ते बोझ से,

धरती का श्रृंगार खोता है।

कारखाने, ऊँची इमारतें,

नगरों का विस्तार निराला।

जंगल कटते, झीलें मिटतीं,

प्रकृति ने संकट है पाला।

बढ़ता ताप, प्रदूषित जल,

दूषित होती जाती वायु।

मिट्टी का कटाव बढ़ा है,

प्रकृति दिखलाती है दाय।

इन संकटों से बचना है तो,

आओ मिलकर वृक्ष लगाएँ।

हरियाली से धरती महके,

जीवन में खुशियाँ भर जाएँ।

पेड़ हमें ऑक्सीजन देते,

फल, छाया और शुद्ध हवाएँ।

नीम, वट, आम, इमली, अमरूद,

स्वास्थ्य और सुख साथ में लाएँ।

जंगल होंगे तो पशु-पक्षी,

पाएँगे अपना सुरक्षित घर।

वृक्ष बचेंगे, जीवन बचेगा,

यही हमारा हो संकल्प अमर।

संदेश:

"एक वृक्ष सौ सुख देता है; आइए, आज एक पौधा लगाकर आने वाली पीढ़ियों को हरित भविष्य दें।"

यह संस्करण आपकी मूल भावना को बनाए रखते हुए भाषा, प्रवाह और काव्यात्मकता को अधिक प्रभावशाली बनाता है।

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