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Friday, June 12, 2026

बाल श्रम दिवस

 नमस्ते आदरणीय अनंत कृष्णन जी।

आपकी रचना में बाल श्रम की सामाजिक विडंबना, गरीबी, उपेक्षा और बच्चों के शोषण के प्रति गहरी चिंता व्यक्त हुई है। इसे थोड़ा परिष्कृत और प्रवाहपूर्ण रूप में इस प्रकार प्रस्तुत किया जा सकता है:

विश्व बाल श्रम विरोधी दिवस

एस. अनंत कृष्णन, चेन्नई, तमिलनाडु

13-06-2026

मानव जीवन में

जीने के लिए धन की आवश्यकता है।

परंतु धनाभाव में भी

संतान का जन्म

ईश्वर की देन है।

किन्तु जब माता-पिता

पालन-पोषण में असमर्थ होते हैं,

तब जन्म लेती है

एक सामाजिक त्रासदी—

बाल श्रम।

कहीं पियक्कड़ पिता,

कहीं असहाय माँ,

कहीं पिता का नदारद होना,

कहीं जन्म लेते ही

शिशु का त्याग।

कुछ बच्चे अनाथालयों में पलते हैं,

कुछ अपराधियों के हाथों

शोषण का शिकार बनते हैं।

गरीबी, उपेक्षा और विवशता

बचपन का अधिकार छीन लेती है।

सौतेले व्यवहार की पीड़ा,

भूख और अभाव की मार,

नन्हे हाथों को

पुस्तकों की जगह

मजदूरी का बोझ दे देती है।

दयालु और संवेदनशील लोग

बाल श्रम के विरुद्ध

आवाज़ उठाते हैं,

समाज को जागृत करते हैं,

और ठोस कदम भी उठाते हैं।

भीख माँगना भी

एक संगठित धंधा बन गया है।

मासूम बच्चों को आगे कर

दया का व्यापार होता है,

पर उसे रोकने वाले

बहुत कम दिखाई देते हैं।

केवल एक दिवस मनाने से

समस्या का समाधान नहीं होगा।

आवश्यक है

जागरूकता, शिक्षा और संवेदना।

अमीर संतान के लिए तरसते हैं,

गरीबों के यहाँ

फुटपाथों पर बचपन पलता है।

यह भी जीवन का

एक कठोर सत्य है।

आओ मिलकर संकल्प लें—

हर बच्चे को शिक्षा मिले,

हर बच्चे को सम्मान मिले,

हर बच्चे को उसका बचपन मिले।

नारा लगाएँ—

"बाल श्रमिक रहने न देंगे,

बचपन का अधिकार देंगे।"

"पुस्तक, शिक्षा और मुस्कान,

हर बच्चे का हो सम्मान।"

"बाल श्रम का हो अंत,

शिक्षा से बने उज्ज्वल भविष्य अनंत।"

सादर।

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