वृक्ष एवं मानव।
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एस. अनंत कृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना
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10-6-26.
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मानव को जीने के लिए
शुद्ध प्राणवायु की ज़रूरत है।
पेड़ कार्बन्डै
आक्सैड चूसकर
शुद्ध आक्सिजन देते हैं।
आदिकाल में मनुष्य
पेड़ के खोखले में
रहता था।
मनुष्य और आवास।
पेड़ के स्वादिष्ट फल,
पौष्टिक आहार है।
पेड़ के सूखे पत्ते खाद।
पेड़ की लकड़ी ईँधन ।
पेड़ ही हमारे घर की
खिड़की और दरवाजे।
ठंड प्रदेश में ,
जंगलों में ,
पाश्चात्य देशों में
लकड़ी के घर।
लकड़ी से ही नावें
कुर्सी मेज अल्मारी दरवाजा।
आदि मानव का मान रक्षक लकडी की छाल।
मानव जीने के लिए
पानी चाहिए,
वह भी पेड़ों पर के कारण।
भू क्षरण के रक्षक।
खजूर, आम,इमली,कटहल केला, अमरूद ,नारियल
नारंगी सेब आदि फल।
वाहन के चक्र
ये सब पेड़ के कारण।
चंदन पेड़ की महक,
सागौन की लकड़ी
बेहद मजबूत, टिकाऊ और दीमक-प्रतिरोधी होती है। यह पानी और मौसम की मार आसानी से झेल सकती है।
मानव और पेड़
दोनों में पेड़ परोपकारी।
मानव के जीने का आधार।
कबीर का यह दोहा
पेड़ की गुणवत्ता और मानव संसाधन के लिए
बढ़िया है।
वृक्ष कबहुँ नहिं फल भखै, नदी न संचै नीर।परमारथ के कारने, साधुन धरा सरीर।।
मानव परोपकार के गुण के शिक्षक पेड़ होते हैं।
नमस्ते वणक्कम्।
आपकी रचना में वृक्षों के महत्व, मानव जीवन से उनके गहरे संबंध तथा परोपकार की भावना का सुंदर वर्णन है। भाषा और प्रस्तुति को थोड़ा परिष्कृत कर इसे इस प्रकार प्रस्तुत किया जा सकता है—
वृक्ष एवं मानव
एस. अनंत कृष्णन, चेन्नई, तमिलनाडु
10-6-2026
मानव को जीने के लिए
शुद्ध प्राणवायु की आवश्यकता है।
वृक्ष कार्बन डाइऑक्साइड को ग्रहण कर
जीवनदायिनी ऑक्सीजन प्रदान करते हैं।
आदिकाल में मानव
वृक्षों के खोखलों में आश्रय पाता था।
मानव और उसके आवास का
वृक्षों से अटूट संबंध रहा है।
वृक्षों के स्वादिष्ट फल
पौष्टिक आहार बनते हैं।
सूखे पत्ते उत्तम खाद,
लकड़ी ईंधन का आधार है।
घर की खिड़कियाँ, दरवाजे,
कुर्सियाँ, मेज और अलमारियाँ,
नावों से लेकर अनेक उपयोगी वस्तुएँ
वृक्षों की देन हैं।
शीत प्रदेशों और वनों में
लकड़ी के घर बनाए जाते हैं।
आदिमानव के तन की रक्षा भी
वृक्षों की छाल ने ही की थी।
मानव के लिए जल आवश्यक है,
और वर्षा चक्र में भी
वृक्षों की महत्वपूर्ण भूमिका है।
वे भूमि क्षरण रोककर
धरती की रक्षा करते हैं।
खजूर, आम, इमली, कटहल,
केला, अमरूद, नारियल,
संतरा, सेब और अनेक फल
वृक्षों का अमूल्य उपहार हैं।
चंदन की सुगंध,
सागौन की दृढ़ता,
प्रकृति की अनुपम देन हैं।
सागौन की लकड़ी मजबूत, टिकाऊ
और दीमक-प्रतिरोधी होती है।
मानव और वृक्ष दोनों जीवित हैं,
पर वृक्ष निस्वार्थ परोपकारी हैं।
वे मानव जीवन के आधार हैं
और सेवा का संदेश देते हैं।
संत कबीर का यह दोहा
वृक्षों के परोपकार को सुंदरता से व्यक्त करता है—
"वृक्ष कबहुँ नहिं फल भखै, नदी न संचै नीर।
परमारथ के कारने, साधुन धरा सरीर।।"
वास्तव में,
वृक्ष मानव को परोपकार,
त्याग और सेवा का पाठ पढ़ाते हैं।
मानव यदि वृक्षों के गुण अपनाए,
तो समाज और संसार
दोनों अधिक सुखी और समृद्ध बन सकते हैं।
भावार्थ:
"वृक्ष एवं मानव" रचना हमें बताती है कि वृक्ष केवल प्रकृति की शोभा नहीं, बल्कि मानव जीवन के सच्चे संरक्षक, पोषक और परोपकार के महान शिक्षक हैं। 🌳🙏
नमस्ते वणक्कम्।
आपकी रचना में वृक्षों के महत्व, मानव जीवन से उनके गहरे संबंध तथा परोपकार की भावना का सुंदर वर्णन है। भाषा और प्रस्तुति को थोड़ा परिष्कृत कर इसे इस प्रकार प्रस्तुत किया जा सकता है—
वृक्ष एवं मानव
एस. अनंत कृष्णन, चेन्नई, तमिलनाडु
10-6-2026
मानव को जीने के लिए
शुद्ध प्राणवायु की आवश्यकता है।
वृक्ष कार्बन डाइऑक्साइड को ग्रहण कर
जीवनदायिनी ऑक्सीजन प्रदान करते हैं।
आदिकाल में मानव
वृक्षों के खोखलों में आश्रय पाता था।
मानव और उसके आवास का
वृक्षों से अटूट संबंध रहा है।
वृक्षों के स्वादिष्ट फल
पौष्टिक आहार बनते हैं।
सूखे पत्ते उत्तम खाद,
लकड़ी ईंधन का आधार है।
घर की खिड़कियाँ, दरवाजे,
कुर्सियाँ, मेज और अलमारियाँ,
नावों से लेकर अनेक उपयोगी वस्तुएँ
वृक्षों की देन हैं।
शीत प्रदेशों और वनों में
लकड़ी के घर बनाए जाते हैं।
आदिमानव के तन की रक्षा भी
वृक्षों की छाल ने ही की थी।
मानव के लिए जल आवश्यक है,
और वर्षा चक्र में भी
वृक्षों की महत्वपूर्ण भूमिका है।
वे भूमि क्षरण रोककर
धरती की रक्षा करते हैं।
खजूर, आम, इमली, कटहल,
केला, अमरूद, नारियल,
संतरा, सेब और अनेक फल
वृक्षों का अमूल्य उपहार हैं।
चंदन की सुगंध,
सागौन की दृढ़ता,
प्रकृति की अनुपम देन हैं।
सागौन की लकड़ी मजबूत, टिकाऊ
और दीमक-प्रतिरोधी होती है।
मानव और वृक्ष दोनों जीवित हैं,
पर वृक्ष निस्वार्थ परोपकारी हैं।
वे मानव जीवन के आधार हैं
और सेवा का संदेश देते हैं।
संत कबीर का यह दोहा
वृक्षों के परोपकार को सुंदरता से व्यक्त करता है—
"वृक्ष कबहुँ नहिं फल भखै, नदी न संचै नीर।
परमारथ के कारने, साधुन धरा सरीर।।"
वास्तव में,
वृक्ष मानव को परोपकार,
त्याग और सेवा का पाठ पढ़ाते हैं।
मानव यदि वृक्षों के गुण अपनाए,
तो समाज और संसार
दोनों अधिक सुखी और समृद्ध बन सकते हैं।
भावार्थ:
"वृक्ष एवं मानव" रचना हमें बताती है कि वृक्ष केवल प्रकृति की शोभा नहीं, बल्कि मानव जीवन के सच्चे संरक्षक, पोषक और परोपकार के महान शिक्षक हैं। 🌳🙏
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