Search This Blog

Friday, June 5, 2026

विश्व विश्व पर्यावरण दिवसएस. अनंत कृष्णन, चेन्नई, तमिलनाडुहिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति6-6-2026 मानव आज विज्ञान के युग मेंनित नई ऊँचाइयाँ छू रहा है,किन्तु प्रकृति के नियमों से दूर होकरकृत्रिम सुखों में खो रहा है। बिजली के पंखे, वातानुकूलित कक्ष,फ्रिज में रखा बासी भोजन,जंगलों का अंधाधुंध विनाश,पहाड़ों का चूर्णीकरण,कारखानों का धुआँ और अपशिष्ट,धरती और जल का निरंतर दोहन। वाहनों का बढ़ता शोर,ऊँची-ऊँची इमारतों का विस्तार,गौरैया का शहरों से विलुप्त होना,खेतों का सिकुड़ना,रासायनिक खादों और कीटनाशकों का प्रयोग,झीलों और तालाबों का लुप्त होना—ये सब प्रकृति के संतुलन को बिगाड़ रहे हैं। परिणामस्वरूपवायु प्रदूषण, जल प्रदूषण,ध्वनि प्रदूषण, भूमि प्रदूषण,यहाँ तक कि विचार प्रदूषण भीमानव जीवन को प्रभावित कर रहे हैं।धरती का तापमान बढ़ रहा हैऔर पर्यावरण संकट गहराता जा रहा है। इसी चेतना को जगाने हेतुविश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है।यह हमें प्रकृति संरक्षण का संदेश देता है—प्लास्टिक का उपयोग कम करें,अधिक से अधिक वृक्ष लगाएँ,जल, जंगल और जमीन की रक्षा करें। आइए, हम सब मिलकर संकल्प लें— "पेड़ लगाओ, हरियाली लाओ,धरती को फिर से स्वर्ग बनाओ।" "प्रदूषण मिटाओ, पर्यावरण बचाओ,धरती को रहने योग्य बनाओ।" "जल है तो कल है,धरती का संरक्षण ही हमारा बल है।" "एक पेड़, एक जीवन;धरती बचाना हमारा सच्चा संकल्प है।" "कचरा फैलाना बंद करो,धरती को संवारना शुरू करो।" "पृथ्वी बचाओ, भविष्य बचाओ;पर्यावरण संरक्षण ही जीवन का आधार है।" आज का हर पौधाकल की सुरक्षित साँस है।आइए, हम सभी मिलकरप्रकृति की रक्षा का संकल्प लेंऔर आने वाली पीढ़ियों कोस्वच्छ, सुंदर और हरित धरती सौंपें। विश्व पर्यावरण दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।

 


विश्व पर्यावरण दिवस

एस. अनंत कृष्णन, चेन्नई, तमिलनाडु
हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति
6-6-2026

मानव आज विज्ञान के युग में
नित नई ऊँचाइयाँ छू रहा है,
किन्तु प्रकृति के नियमों से दूर होकर
कृत्रिम सुखों में खो रहा है।

बिजली के पंखे, वातानुकूलित कक्ष,
फ्रिज में रखा बासी भोजन,
जंगलों का अंधाधुंध विनाश,
पहाड़ों का चूर्णीकरण,
कारखानों का धुआँ और अपशिष्ट,
धरती और जल का निरंतर दोहन।

वाहनों का बढ़ता शोर,
ऊँची-ऊँची इमारतों का विस्तार,
गौरैया का शहरों से विलुप्त होना,
खेतों का सिकुड़ना,
रासायनिक खादों और कीटनाशकों का प्रयोग,
झीलों और तालाबों का लुप्त होना—
ये सब प्रकृति के संतुलन को बिगाड़ रहे हैं।

परिणामस्वरूप
वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण,
ध्वनि प्रदूषण, भूमि प्रदूषण,
यहाँ तक कि विचार प्रदूषण भी
मानव जीवन को प्रभावित कर रहे हैं।
धरती का तापमान बढ़ रहा है
और पर्यावरण संकट गहराता जा रहा है।

इसी चेतना को जगाने हेतु
विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है।
यह हमें प्रकृति संरक्षण का संदेश देता है—
प्लास्टिक का उपयोग कम करें,
अधिक से अधिक वृक्ष लगाएँ,
जल, जंगल और जमीन की रक्षा करें।

आइए, हम सब मिलकर संकल्प लें—

"पेड़ लगाओ, हरियाली लाओ,
धरती को फिर से स्वर्ग बनाओ।"

"प्रदूषण मिटाओ, पर्यावरण बचाओ,
धरती को रहने योग्य बनाओ।"

"जल है तो कल है,
धरती का संरक्षण ही हमारा बल है।"

"एक पेड़, एक जीवन;
धरती बचाना हमारा सच्चा संकल्प है।"

"कचरा फैलाना बंद करो,
धरती को संवारना शुरू करो।"

"पृथ्वी बचाओ, भविष्य बचाओ;
पर्यावरण संरक्षण ही जीवन का आधार है।"

आज का हर पौधा
कल की सुरक्षित साँस है।
आइए, हम सभी मिलकर
प्रकृति की रक्षा का संकल्प लें
और आने वाली पीढ़ियों को
स्वच्छ, सुंदर और हरित धरती सौंपें।

विश्व पर्यावरण दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।

No comments:

Post a Comment