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Friday, June 19, 2026

सुनीति संग्रह

 நறுந்தொகை —सुनीति संग्रह – अनुवादक---एस. अनंतकृष्णन, सौहार्द सम्मान  प्राप्त तमीलनाडु चेन्नै का हिंदी प्रेमी प्रचारक 


कवि—अति वीर राम पांडियन 

 युवकों के आवश्यक सुमार्ग दिखानेवाले ग्रंथ .

सुनीति ग्रंथ ।

काल —  सोलहवीं शताब्दी।

 सरल शब्दों के नीति ग्रंथ

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கடவுள்வாழ்த்து –प्रार्थना



 பிரணவப் பொருளாம் பெருந்தகை ஐங்கரன்

 சரண அற்புத மலர் தலைக்கு அணிவோமே .


ஓம் என்னும் பிரணவ மந்திரத்தின் பொருளான விநாயகப் பெருமானின் பாத கமலங்களை வணங்குவோம்


ओम्  के प्रणव मंत्र के भगवान विघ्नेश्वर के चरण कमलों की वंदना करेंगे। 


வெற்றி வேற்கை வீர ராமன்

 கொற்கையாளி குலசேகரன் புகல் 

நற்றமிழ் தெரிந்த நறுந்தொகை

 தன்னால் குற்றம் களைவோர் குறைவிலாதவரே.

 

कोट्रै नगर के अधिपति,

कुल के मुकुठाधिपति अति वीर पांडिय के सुनीति वचनों का संग्रह .इस सुग्रंथ को जानकर अपने दोषों को मिटाने वालों के जीवन में कोई कमी न रहेगी। 


सभी सुखों को पाकर जीवन में सुखी जीवन बिताना चाहिए।


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ग्रंथ

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1. अक्षर ज्ञान दाता दिव्य गुणवान  है।


२. शिक्षा की विशेषता दोषरहित स्पष्ट बोलना है। 

3. धनियों  की विशेषता अपने नाते-रिश्तों के दुख के समय उचित सहायता देकर साथ देना है।

4. ब्राह्‌मणों की विशिष्टता अनुशासन सदाचार के साथ वेद पढना। 

5. राजाओं की विशिष्टता न्याय पूर्ण शासन करना। 

६. व्यापारियों की विशेषता ईमानदारी से धन कमाना

7. किसानों की विशेषता खाद्यान्न का उत्पन्न करना और खाना 

8. मंत्रियों की विशेषता दूरदर्शी होना।

 9. सेनापति की विशेषता धीर वीर साहसी निर्भय दिल।

10. भोजन की शोभा अतिथियों और मेहमानों के साथ खाना।

11. स्त्रियों की विशेषता विवाद प्रतिवाद न करना। 

12.गृह्स्थिनी की शोभा पति की सेवा करना । 

13. व्यभिचारी की शोभा शरीर की चमक।

14.विनम्रता ज्ञानियों की शोभा।

15.दरिद्रों की शोभा गरीबी में श्रेष्ठता।

 16 .ताड के पेड  फल देकर उसके बीज उगने पर ऊँचा होता है, पर छाया नहीं दे सकता।

17. बरगद के बीज अति लघु होने पर भी वह उगकर बहुत बडे पेड होने के बाद उसकी छाया में बडे हाथी, घोडे,रथ,बडी पैदल सेना आदि के साथ राजा भी ठहर सकते हैं। 

18.बाह्य आकार, सुंदर बाह्य रूप के लोग बडे मनुष्य नहीं है। 

19.छोटे रूप,बाह्याडंबर  रहित सीधे सादे लोग वास्तव में छोटे नहीं है।

20. बच्चे सब अच्छे नाम न लेंगे। 

21 .सभी नाते-रिश्ते सच्चे रिश्ते नहीं है। 

22. वैवाहिक पत्नी सब प्यारी पत्नी नहीं है।

23.जितना भी दूध गरम करो, गाय के दूध का स्वाद कम न होगा।

24. आग में तपाने पर भी  सोने की सुगंध न बदलेगी।

25. पीसने पर भी चंदन की खुशबू नहीं बदलेगी। 

26. आग में डालकर अगर लकड़ी को जलाने पर भी सुगंध के धुएँ ही निकलेगा।

27. समुद्र मंथन करने पर भी कीचड़ नहीं होगा, साफ़ रहेगा। 

28. दूध से मिलाकर  कड़वी लौकी पकाने पर भी उसकी कड़ुआहट दूर न होगी।

29.अनेक सुगंधित वस्तुएँ मिलाकर पकाने पर भी लहसून की बदबू न मिटेगी।

30. स्वयं के कर्म  पर निर्भर है  श्रेष्ठता और निम्नता।नाम या बदनाम।

31.छोटों की गलतियों और अपराधों का सहना बड़ों का कर्तव्य है। 

32. छोटे लोगों के बडे बडे अपराधों को सहना बडे लोगों के लिए दुर्लभ है। 

33. मूर्खों की मित्रता भले ही सैकडों साल हो वह समुद्री शैवाल जैसे जड न पकडेगा। 

34.  बडे सज्जनों की मित्रता भूमि फा़डकर जड पकडेगी। 

35. भीख माँगकर याचना करके अध्ययन करना अच्छी बात है।

तमिल का ज्यों त्यों अनुवाद —

सीखना अच्छा है,सीखना अच्छा है,भीख माँगकर भी सीखना अच्छा है।


  36.  अनपढ़ लौगों को अपनी कुल श्रेष्ठता बोलना धान के भूसों के समान बेकार है।


37. ब्राह्मण,क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र आदि चार वर्णों में शिक्षित ही श्रेष्ठ है। अशिक्षित होने पर वह निम्न ही है। 

38.कुल जो भी हो,उच्च कुल हो या निम्न ,उनमें शिक्षितों को ही आदर-सत्कार और स्वागत करेंगे।

39.ज्ञानी को राजा भी चाहेगा। 


40. हाथियों की सूँड लंबे होने पर भी उन में दानशीलता नहीं है। 


41.बिल्ली में नहीं है तपस्या और दया। 


42.ज्ञानी को नहीं है सुख और दुख।


43.दीमक को नहीं अमीरी गरीबी का फरक।

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