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Saturday, June 27, 2026

नानी का घर

 नानी का घर 

एस . अनंत कृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु 

28-6-26.

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नाना नानी मामा के

 प्यार का केंद्र।

बचपन में मेरी इच्छाएँ

मेरी माँगें सब पूरी होती ।

नानी  मेरे आध्यात्मिक ज्ञान का आधार।

नाना मेरे शिक्षक।

 मामा मेरे आर्थिक सहायक।।

मैं नानी की देखरेख में पला।

मेरी हर कदम की प्रगति में मामा ही प्रधान।

मामाने साइकिल चलाना सिखाया।

मैं नानी को ही अम्मा बुलाया करता।

माँ को उसके नाम से

ही पुकारा करता जैसे 

 मामा बुलाया करते।

प्रेम मिला।

 आदर्श गुण मिले।

जीवन  की हर प्रगति में 

 नाना नानी मामा के साथ।

 उनके ऋण कभी चुका न पाता।

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आपकी रचना भावपूर्ण है और नाना-नानी व मामाओं के प्रति आपकी कृतज्ञता स्पष्ट रूप से व्यक्त होती है। भाषा को थोड़ा अधिक प्रवाहपूर्ण बनाकर इसे इस प्रकार प्रस्तुत किया जा सकता है:

नानी का घर

एस. अनंत कृष्णन, चेन्नई, तमिलनाडु

28-6-2026

नाना-नानी, मामाओं के

प्यार का था वह केंद्र।

बचपन की मेरी हर इच्छा,

हर माँग पूरी होती थी।

नानी थीं

मेरे आध्यात्मिक ज्ञान की आधारशिला।

नाना थे

मेरे प्रथम शिक्षक।

मामा बने

मेरे आर्थिक सहायक।

मैं नानी की गोद में पला,

उनकी ममता में बड़ा हुआ।

जीवन के हर कदम पर

मामाओं का ही साथ मिला।

उन्होंने ही मुझे

साइकिल चलाना सिखाया।

मैं नानी को ही

"अम्मा" कहकर पुकारता था,

और अपनी माँ को

उन्हीं के नाम से पुकारता,

जैसे मामा पुकारते थे।

उनसे मिला प्रेम,

संस्कार और आदर्श।

मेरे जीवन की हर प्रगति में

नाना, नानी और मामाओं का

अमूल्य योगदान रहा।

उनका यह ऋण

मैं जीवन भर

कभी नहीं चुका पाऊँगा।

यह समापन आपकी कृतज्ञता को और अधिक प्रभावशाली ढंग से व्यक्त करता है।

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