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Tuesday, June 2, 2026

अनमोल वचन

 


अनमोल सीख।

 एस. अनंत कृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना 

3-6-26

+++++++++++

भारतीय सनातन धर्म में ही अनमोल सीख।

 क्योंकि आदि

 सभ्यता का केंद्र।

आदि धर्म ज्ञान की सीख।

यही देखिए,

 ब्रह्म सत्यं, जगत मिथ्या।

पाप कर्म का दंड।

 आत्मज्ञान के बिना 

 जीना मुश्किल।

 आत्मचिंतन का महत्व।

 संसार माया से भरा है,

 काम, क्रोध, मद,लोभ

 मानव  के नाश के कारण।

 स्वर्ग अलग कहीं  नहीं,

 भूलोक में ही नरक है

वही ग़रीबी,  रोग, असाध्य रोग, अंगहीनता,

 पागलपन ,बहरा,गूँगा अंधा, अनाथ, भिखारी,

 न जाने कितने   दुख,

 कारावास, अपमान,

  सब का दंड जरूर।

  बुढ़ापा मृत्यु ईश्वर का कानून,

‌पद, धन अधिकार,   सब बेकार।

भक्ति ,दया,दान, धर्म से मानव श्रेष्ठ।

 लौकिक सुख, सद्यःफल,

 नशीली वस्तुएँ,

 मानव पतन के कारण।

 अनमोल सीख अनेक।

 सुबह से लेकर रात तक के

अपने कर्मों को लिखो।

 सोने के पहले पढ़ो।

 कबीर ने कहा है

 बुरा जो देखन मैं गया,

बुरा न तिलिया कोई।

 जो दिल खोजा आपना,

 मुझसे बुरा न कोय।

 रहिमन पानी राखिए बिन पानी सब सून।

 पानी गये न ऊभरे,

 मोती,मानुष, चून।।

तिरुवल्लुवर ने कहा है

 संपत्तियों में बड़ी संपत्ति 

श्रवण संपत्ति।।

 वही सभी संपत्तियों में 

 सरताज।।

समय पर की गयी मदद,

लघु होने पर  भी,

वह मदद ब्रह्माण्ड से अति बड़ा।

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अनमोल सीख।

 एस. अनंत कृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना 

3-6-26

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भारतीय सनातन धर्म में ही अनमोल सीख।

 क्योंकि आदि

 सभ्यता का केंद्र।

आदि धर्म ज्ञान की सीख।

यही देखिए,

 ब्रह्म सत्यं, जगत मिथ्या।

पाप कर्म का दंड।

 आत्मज्ञान के बिना 

 जीना मुश्किल।

 आत्मचिंतन का महत्व।

 संसार माया से भरा है,

 काम, क्रोध, मद,लोभ

 मानव  के नाश के कारण।

 स्वर्ग अलग कहीं  नहीं,

 भूलोक में ही नरक है

वही ग़रीबी,  रोग, असाध्य रोग, अंगहीनता,

 पागलपन ,बहरा,गूँगा अंधा, अनाथ, भिखारी,

 न जाने कितने   दुख,

 कारावास, अपमान,

  सब का दंड जरूर।

  बुढ़ापा मृत्यु ईश्वर का कानून,

‌पद, धन अधिकार,   सब बेकार।

भक्ति ,दया,दान, धर्म से मानव श्रेष्ठ।

 लौकिक सुख, सद्यःफल,

 नशीली वस्तुएँ,

 मानव पतन के कारण।

 अनमोल सीख अनेक।

 सुबह से लेकर रात तक के

अपने कर्मों को लिखो।

 सोने के पहले पढ़ो।

 कबीर ने कहा है

 बुरा जो देखन मैं गया,

बुरा न तिलिया कोई।

 जो दिल खोजा आपना,

 मुझसे बुरा न कोय।

 रहिमन पानी राखिए बिन पानी सब सून।

 पानी गये न ऊभरे,

 मोती,मानुष, चून।।

तिरुवल्लुवर ने कहा है

 संपत्तियों में बड़ी संपत्ति 

श्रवण संपत्ति।।

 वही सभी संपत्तियों में 

 सरताज।।

समय पर की गयी मदद,

लघु होने पर  भी,

वह मदद ब्रह्माण्ड से अति बड़ा।


अनमोल सीख।

 एस. अनंत कृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना 

3-6-26

+++++++++++

भारतीय सनातन धर्म में ही अनमोल सीख।

 क्योंकि आदि

 सभ्यता का केंद्र।

आदि धर्म ज्ञान की सीख।

यही देखिए,

 ब्रह्म सत्यं, जगत मिथ्या।

पाप कर्म का दंड।

 आत्मज्ञान के बिना 

 जीना मुश्किल।

 आत्मचिंतन का महत्व।

 संसार माया से भरा है,

 काम, क्रोध, मद,लोभ

 मानव  के नाश के कारण।

 स्वर्ग अलग कहीं  नहीं,

 भूलोक में ही नरक है

वही ग़रीबी,  रोग, असाध्य रोग, अंगहीनता,

 पागलपन ,बहरा,गूँगा अंधा, अनाथ, भिखारी,

 न जाने कितने   दुख,

 कारावास, अपमान,

  सब का दंड जरूर।

  बुढ़ापा मृत्यु ईश्वर का कानून,

‌पद, धन अधिकार,   सब बेकार।

भक्ति ,दया,दान, धर्म से मानव श्रेष्ठ।

 लौकिक सुख, सद्यःफल,

 नशीली वस्तुएँ,

 मानव पतन के कारण।

 अनमोल सीख अनेक।

 सुबह से लेकर रात तक के

अपने कर्मों को लिखो।

 सोने के पहले पढ़ो।

 कबीर ने कहा है

 बुरा जो देखन मैं गया,

बुरा न तिलिया कोई।

 जो दिल खोजा आपना,

 मुझसे बुरा न कोय।

 रहिमन पानी राखिए बिन पानी सब सून।

 पानी गये न ऊभरे,

 मोती,मानुष, चून।।

तिरुवल्लुवर ने कहा है

 संपत्तियों में बड़ी संपत्ति 

श्रवण संपत्ति।।

 वही सभी संपत्तियों में 

 सरताज।।

समय पर की गयी मदद,

लघु होने पर  भी,

वह मदद ब्रह्माण्ड से अति बड़ा।








 

 



 

 






 

 

 



 



 






 


 





 

 


 

 

 



 


 



 नमस्ते वणक्कम् आदरणीय।

आपकी रचना में जीवन-दर्शन, आत्मचिंतन, भक्ति, नैतिकता और संतों की वाणी का सुंदर समावेश है। इसे थोड़ा परिष्कृत रूप में प्रस्तुत कर रहा हूँ।

अनमोल सीख

एस. अनंत कृष्णन, चेन्नई, तमिलनाडु

हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति

3-6-2026

भारतीय सनातन संस्कृति में

अनमोल सीखों का अथाह भंडार है,

क्योंकि यही आदि सभ्यता,

आदि ज्ञान और आध्यात्मिक चिंतन का केंद्र है।

वेद, उपनिषद और ऋषियों की वाणी

मानव को सत्य का मार्ग दिखाती है।

"ब्रह्म सत्य है, जगत मिथ्या" —

यह आत्मबोध का अमर संदेश है।

पापकर्म का दंड अवश्य मिलता है,

आत्मज्ञान के बिना जीवन अधूरा है।

आत्मचिंतन ही वह दीपक है,

जो अज्ञान के अंधकार को दूर करता है।

यह संसार माया से परिपूर्ण है।

काम, क्रोध, मद और लोभ

मानव पतन के प्रमुख कारण हैं।

स्वर्ग कहीं दूर नहीं,

और नरक भी किसी अन्य लोक में नहीं।

यहीं पृथ्वी पर

गरीबी, रोग, असाध्य पीड़ा,

अंगहीनता, अंधत्व, बहरापन,

अनाथ जीवन, भिक्षावृत्ति, अपमान और कारावास—

दुःखों के अनेक रूप दिखाई देते हैं।

बुढ़ापा और मृत्यु

ईश्वर के अटल नियम हैं।

पद, प्रतिष्ठा, धन और अधिकार

एक दिन यहीं रह जाते हैं।

भक्ति, दया, दान और धर्म ही

मनुष्य को श्रेष्ठ बनाते हैं।

नशीली वस्तुएँ और क्षणिक भोग

मानव पतन का मार्ग प्रशस्त करते हैं।

अनमोल सीखें असंख्य हैं।

प्रतिदिन अपने कर्मों का लेखा-जोखा लिखिए,

और सोने से पूर्व उनका अवलोकन कीजिए।

संत कबीर कहते हैं—

बुरा जो देखन मैं चला,

बुरा न मिलिया कोय।

जो मन खोजा आपना,

मुझसे बुरा न कोय॥

रहीम का संदेश है—

रहिमन पानी राखिए,

बिन पानी सब सून।

पानी गए न ऊबरै,

मोती, मानुष, चून॥

Tiruvalluvar ने कहा है—

सभी संपत्तियों में श्रेष्ठ संपत्ति

सुनने और सीखने की संपत्ति है;

वही समस्त संपत्तियों की सरताज है।

समय पर की गई सहायता,

चाहे कितनी ही छोटी क्यों न हो,

उसका मूल्य ब्रह्माण्ड से भी बड़ा होता है।

यही हैं जीवन की अनमोल सीखें,

जो मानव को मानवता के पथ पर अग्रसर करती हैं।

सादर। 🙏

தமிழில் ஒரு வரி: "அறம், கருணை, சுயசிந்தனை, இறைபக்தி — இவையே மனித வாழ்வின் உண்மையான அனமோலப் பாடங்கள்."

(அறம், கருணை, தன்னாய்வு, இறைபக்தி ஆகியவையே மனித வாழ்க்கையின் உண்மையான விலைமதிப்பற்ற பாடங்களாகும்.) 🙏🌹






 

 



 

 






 

 

 



 



 






 


 





 

 


 

 

 



 


 



 नमस्ते वणक्कम् आदरणीय।

आपकी रचना में जीवन-दर्शन, आत्मचिंतन, भक्ति, नैतिकता और संतों की वाणी का सुंदर समावेश है। इसे थोड़ा परिष्कृत रूप में प्रस्तुत कर रहा हूँ।

अनमोल सीख

एस. अनंत कृष्णन, चेन्नई, तमिलनाडु

हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति

3-6-2026

भारतीय सनातन संस्कृति में

अनमोल सीखों का अथाह भंडार है,

क्योंकि यही आदि सभ्यता,

आदि ज्ञान और आध्यात्मिक चिंतन का केंद्र है।

वेद, उपनिषद और ऋषियों की वाणी

मानव को सत्य का मार्ग दिखाती है।

"ब्रह्म सत्य है, जगत मिथ्या" —

यह आत्मबोध का अमर संदेश है।

पापकर्म का दंड अवश्य मिलता है,

आत्मज्ञान के बिना जीवन अधूरा है।

आत्मचिंतन ही वह दीपक है,

जो अज्ञान के अंधकार को दूर करता है।

यह संसार माया से परिपूर्ण है।

काम, क्रोध, मद और लोभ

मानव पतन के प्रमुख कारण हैं।

स्वर्ग कहीं दूर नहीं,

और नरक भी किसी अन्य लोक में नहीं।

यहीं पृथ्वी पर

गरीबी, रोग, असाध्य पीड़ा,

अंगहीनता, अंधत्व, बहरापन,

अनाथ जीवन, भिक्षावृत्ति, अपमान और कारावास—

दुःखों के अनेक रूप दिखाई देते हैं।

बुढ़ापा और मृत्यु

ईश्वर के अटल नियम हैं।

पद, प्रतिष्ठा, धन और अधिकार

एक दिन यहीं रह जाते हैं।

भक्ति, दया, दान और धर्म ही

मनुष्य को श्रेष्ठ बनाते हैं।

नशीली वस्तुएँ और क्षणिक भोग

मानव पतन का मार्ग प्रशस्त करते हैं।

अनमोल सीखें असंख्य हैं।

प्रतिदिन अपने कर्मों का लेखा-जोखा लिखिए,

और सोने से पूर्व उनका अवलोकन कीजिए।

संत कबीर कहते हैं—

बुरा जो देखन मैं चला,

बुरा न मिलिया कोय।

जो मन खोजा आपना,

मुझसे बुरा न कोय॥

रहीम का संदेश है—

रहिमन पानी राखिए,

बिन पानी सब सून।

पानी गए न ऊबरै,

मोती, मानुष, चून॥

Tiruvalluvar ने कहा है—

सभी संपत्तियों में श्रेष्ठ संपत्ति

सुनने और सीखने की संपत्ति है;

वही समस्त संपत्तियों की सरताज है।

समय पर की गई सहायता,

चाहे कितनी ही छोटी क्यों न हो,

उसका मूल्य ब्रह्माण्ड से भी बड़ा होता है।

यही हैं जीवन की अनमोल सीखें,

जो मानव को मानवता के पथ पर अग्रसर करती हैं।

सादर। 🙏

தமிழில் ஒரு வரி: "அறம், கருணை, சுயசிந்தனை, இறைபக்தி — இவையே மனித வாழ்வின் உண்மையான அனமோலப் பாடங்கள்."

(அறம், கருணை, தன்னாய்வு, இறைபக்தி ஆகியவையே மனித வாழ்க்கையின் உண்மையான விலைமதிப்பற்ற பாடங்களாகும்.) 🙏🌹


 

 


 

 

 



 


 



 नमस्ते वणक्कम् आदरणीय।

आपकी रचना में जीवन-दर्शन, आत्मचिंतन, भक्ति, नैतिकता और संतों की वाणी का सुंदर समावेश है। इसे थोड़ा परिष्कृत रूप में प्रस्तुत कर रहा हूँ।

अनमोल सीख

एस. अनंत कृष्णन, चेन्नई, तमिलनाडु

हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति

3-6-2026

भारतीय सनातन संस्कृति में

अनमोल सीखों का अथाह भंडार है,

क्योंकि यही आदि सभ्यता,

आदि ज्ञान और आध्यात्मिक चिंतन का केंद्र है।

वेद, उपनिषद और ऋषियों की वाणी

मानव को सत्य का मार्ग दिखाती है।

"ब्रह्म सत्य है, जगत मिथ्या" —

यह आत्मबोध का अमर संदेश है।

पापकर्म का दंड अवश्य मिलता है,

आत्मज्ञान के बिना जीवन अधूरा है।

आत्मचिंतन ही वह दीपक है,

जो अज्ञान के अंधकार को दूर करता है।

यह संसार माया से परिपूर्ण है।

काम, क्रोध, मद और लोभ

मानव पतन के प्रमुख कारण हैं।

स्वर्ग कहीं दूर नहीं,

और नरक भी किसी अन्य लोक में नहीं।

यहीं पृथ्वी पर

गरीबी, रोग, असाध्य पीड़ा,

अंगहीनता, अंधत्व, बहरापन,

अनाथ जीवन, भिक्षावृत्ति, अपमान और कारावास—

दुःखों के अनेक रूप दिखाई देते हैं।

बुढ़ापा और मृत्यु

ईश्वर के अटल नियम हैं।

पद, प्रतिष्ठा, धन और अधिकार

एक दिन यहीं रह जाते हैं।

भक्ति, दया, दान और धर्म ही

मनुष्य को श्रेष्ठ बनाते हैं।

नशीली वस्तुएँ और क्षणिक भोग

मानव पतन का मार्ग प्रशस्त करते हैं।

अनमोल सीखें असंख्य हैं।

प्रतिदिन अपने कर्मों का लेखा-जोखा लिखिए,

और सोने से पूर्व उनका अवलोकन कीजिए।

संत कबीर कहते हैं—

बुरा जो देखन मैं चला,

बुरा न मिलिया कोय।

जो मन खोजा आपना,

मुझसे बुरा न कोय॥

रहीम का संदेश है—

रहिमन पानी राखिए,

बिन पानी सब सून।

पानी गए न ऊबरै,

मोती, मानुष, चून॥

Tiruvalluvar ने कहा है—

सभी संपत्तियों में श्रेष्ठ संपत्ति

सुनने और सीखने की संपत्ति है;

वही समस्त संपत्तियों की सरताज है।

समय पर की गई सहायता,

चाहे कितनी ही छोटी क्यों न हो,

उसका मूल्य ब्रह्माण्ड से भी बड़ा होता है।

यही हैं जीवन की अनमोल सीखें,

जो मानव को मानवता के पथ पर अग्रसर करती हैं।

सादर। 🙏

தமிழில் ஒரு வரி: "அறம், கருணை, சுயசிந்தனை, இறைபக்தி — இவையே மனித வாழ்வின் உண்மையான அனமோலப் பாடங்கள்."

(அறம், கருணை, தன்னாய்வு, இறைபக்தி ஆகியவையே மனித வாழ்க்கையின் உண்மையான விலைமதிப்பற்ற பாடங்களாகும்.) 🙏🌹


नमस्ते वणक्कम् आदरणीय।

आपकी रचना में जीवन-दर्शन, आत्मचिंतन, भक्ति, नैतिकता और संतों की वाणी का सुंदर समावेश है। इसे थोड़ा परिष्कृत रूप में प्रस्तुत कर रहा हूँ।

अनमोल सीख

एस. अनंत कृष्णन, चेन्नई, तमिलनाडु

हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति

3-6-2026

भारतीय सनातन संस्कृति में

अनमोल सीखों का अथाह भंडार है,

क्योंकि यही आदि सभ्यता,

आदि ज्ञान और आध्यात्मिक चिंतन का केंद्र है।

वेद, उपनिषद और ऋषियों की वाणी

मानव को सत्य का मार्ग दिखाती है।

"ब्रह्म सत्य है, जगत मिथ्या" —

यह आत्मबोध का अमर संदेश है।

पापकर्म का दंड अवश्य मिलता है,

आत्मज्ञान के बिना जीवन अधूरा है।

आत्मचिंतन ही वह दीपक है,

जो अज्ञान के अंधकार को दूर करता है।

यह संसार माया से परिपूर्ण है।

काम, क्रोध, मद और लोभ

मानव पतन के प्रमुख कारण हैं।

स्वर्ग कहीं दूर नहीं,

और नरक भी किसी अन्य लोक में नहीं।

यहीं पृथ्वी पर

गरीबी, रोग, असाध्य पीड़ा,

अंगहीनता, अंधत्व, बहरापन,

अनाथ जीवन, भिक्षावृत्ति, अपमान और कारावास—

दुःखों के अनेक रूप दिखाई देते हैं।

बुढ़ापा और मृत्यु

ईश्वर के अटल नियम हैं।

पद, प्रतिष्ठा, धन और अधिकार

एक दिन यहीं रह जाते हैं।

भक्ति, दया, दान और धर्म ही

मनुष्य को श्रेष्ठ बनाते हैं।

नशीली वस्तुएँ और क्षणिक भोग

मानव पतन का मार्ग प्रशस्त करते हैं।

अनमोल सीखें असंख्य हैं।

प्रतिदिन अपने कर्मों का लेखा-जोखा लिखिए,

और सोने से पूर्व उनका अवलोकन कीजिए।

संत कबीर कहते हैं—

बुरा जो देखन मैं चला,

बुरा न मिलिया कोय।

जो मन खोजा आपना,

मुझसे बुरा न कोय॥

रहीम का संदेश है—

रहिमन पानी राखिए,

बिन पानी सब सून।

पानी गए न ऊबरै,

मोती, मानुष, चून॥

Tiruvalluvar ने कहा है—

सभी संपत्तियों में श्रेष्ठ संपत्ति

सुनने और सीखने की संपत्ति है;

वही समस्त संपत्तियों की सरताज है।

समय पर की गई सहायता,

चाहे कितनी ही छोटी क्यों न हो,

उसका मूल्य ब्रह्माण्ड से भी बड़ा होता है।

यही हैं जीवन की अनमोल सीखें,

जो मानव को मानवता के पथ पर अग्रसर करती हैं।

सादर। 🙏

தமிழில் ஒரு வரி: "அறம், கருணை, சுயசிந்தனை, இறைபக்தி — இவையே மனித வாழ்வின் உண்மையான அனமோலப் பாடங்கள்."

(அறம், கருணை, தன்னாய்வு, இறைபக்தி ஆகியவையே மனித வாழ்க்கையின் உண்மையான விலைமதிப்பற்ற பாடங்களாகும்.) 🙏🌹

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