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Saturday, February 14, 2026

जलसंकट

 जल संकट

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एस.अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना 

14-2-26

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जल संकट क्यों?

प्रकृति की देन।

मरुभूमि वहाँ पानी

की संभानाएँ नहीं।

जीव नदियाँ रहित भूमि।

वर्षा पर निर्भर भूमि।

 जो भी हो, सरकार की योजना,

नदियों का राष्ट्रीयकरण 

  देश को समृद्ध बनाने 

 जीवों को सुखी रखने 

आजकल  की वैज्ञानिक सुविधाएँ,

 दूर कर सकती है।

भारत में स्वार्थ राजनीति 

 बाह्याडंबर भक्ति,

 काली, विनायक सुंदर मूर्तियों के करोड़ों रूपए बेकार।

 इन रूपयों को जलसंकट दूर करने

 समाधि मूर्तियाँ छोटी कम खर्च में करके 

 वर्षा के पानी को सुरक्षित  रखने बाँध बाँधंने  पर 

 जल संकट नहीं के बराबर।

 चेन्नई नगर में मात्र 

 तीन हज़ार से अधिक झील नदारद।

 अधिक पढ़ें लिखे इंजनीयर कलक्टर 

 शासक दल के बेगार।

 कानून न्याय के विरुद्ध 

 इमारतें बनाने

 झील के ओझल होने

 पहाड़ चूर्ण होने,

गगनचुंबी इमारतें बनाने 

जंगलों को नगरीकरण नगर विस्तार 

 कृषी प्रधान देश को

उद्योग मंडल बनाना

जल प्रदूषण 

सब कारण है 

जलसंकट का।

 राजाओं ने राजमहल बनवाया।

धर्माचार्य साईं देव पुटृटभर्ति साईं

चेन्नई के लिए कृष्णा नदी नहर बनवाया।

राजनैतिक 





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