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Wednesday, February 11, 2026

रैन बसेरा

 रेन बसेरा 

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एस . अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना 

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12-2-26

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भारत आज़ादी के बाद 

 हिंदू मुस्लिम संघर्ष,

 अतिथि  हिंदू मुस्लिम 

 बेरहमी मजहबी लड़ाई

 देश का बँटवारा

 भारत से पाकिस्तान 

 पाकिस्तान से भारत 

 आये अतिथि

 हजारों गृह हीन

भारत शरणार्थी 

 उनके निवास में 

रेन बसेरा अधिक सहारा।

 गाँधीजी नेहरू जैसे

 पाश्चात्य प्रेमी

 एक मजहब के लिए 

अलग देश देकर भी

 धर्मनिरपेक्ष राज्य।

 नाम मात्र का समान अधिकार।

 अल्पसंख्यकों की सुविधाएं 

 उनके मजहब की शिक्षा 

 पाठशालाओं में।

पर बहुसंख्यक हिन्दूओं के लिए 

 अपने वेद ग्रंथ उपनिषद 

 आध्यात्मिक वर्ग   चलिना मना है।

विश्व भर में ऐसा देश नहीं है।

 भारतीय गरीब फुटपाथ वासी,

 वर्षा, आँधी तूफान 

 आदि में ठहरने

  रैन बसेरा।

 आज़ादी के 78साल के बाद  भी,

 चुनाव वोट के लिए 

 फुटपाथ वासियों को

 मताधिकार देकर 

 कष्ट दे रहे हैं।

 न उनके लिए स्थाई बसेरा।

उनके प्रति 

 स्थाई सहानुभूति 

नहीं है।

 चुनाव के समय 

चंद रूपये,

 ब्रियायाणी,

 शराब बस 

 रैन दिन  के बसारे हीन

 गरीब लोग।

 उनके छोटे मोटे 

व्यापार में लूटनेवाले 

जबर्दस्ती से रिश्वत लेनेवाले। 

ज़रा भी   उन अधिकारियों में  दया नहीं। न्याय नहीं।

 जन्म दिन प्रमाण पत्र के लिए रिश्वत,

 मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए 

 रिश्वत।

  रैन बसेरा हीन

‌गरीबों को सताकर 

 लूटनेवाले अधिकारी 

 राजनैतिक दल

‌तभी सोचना पड़ता है

 रैन बसेरों के  चिंतनीय स्थिति   रिश्वत विभाग 

बेकार।

 चुनाव आयोग बेकार।

 रैन बसेरे   शिक्षा भी

 उचित नहीं।

 भगवान और जनता की दृष्टि से पापी।


 

 

 

 


 

 

 


 






 

 

 



 




 

 


 

 


 

 


 






 







 


 






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