शिव रात्रि
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एस.अनंतकृष्णन, चेन्नई
तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना
15-2-26
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शिव विश्वनाथ, लोकनाथ।
निराकार आकार
मेक्का में भी वही रूप।
वेटिकन सिटी में भी
शिव के आकार।
आ सेतु हिमाचल की
आध्यात्मिक एकता
शिव भगवान के नाम से
अक्षुण्ण है।
काशी रामेश्वर
शैव वैष्णव दोनों की
एकता के आधार।।
तमिल में नारा है
दक्षिण के शिव की जय।
देश देश के शिव की जय।
कैलाश से कार्तिक शिवपुत्र दक्षिण आये,
वे बन गए तमिल भगवान।
भारतीय एकता के सूत्र धारी शिव।
पुण्य कमाने काशी जाने के पहले
रामेश्वर जाना शास्त्र नियत सत्य है।
शिव शक्ति की महिमा अनंत।
आदि शिव अपनी शक्ति माया
द्वारा संसार को दुखी बनाकर
लोगों को अपनी ओर
ध्यान मग्न कराते हैं।
महान शिव की आराधना
फाल्गुन महीने में।
15-2-26 महाशिवरात्रि।
व्रत पद्धति
शिवरात्रि के दिन सबेरे से
दूसरे दिन के सबेरे तक
उपवास रखते हैं।
रात भर शिव नाम जपा करते हैं।
मंदिरों में पूजा
रात भर मेला लगता है।
चार काल पूजा करते हैं।
अभिषेक आराधना करते हैं।
भक्ति पूर्ण वातावरण में
शिव नाम जपकर
शिव के अनुग्रह के पात्र बनते हैं।
तमिलनाडु के शिव क्षेत्र में
रात भर जागकर
शिव का यशोगान करते हैं।
फाल्गुन महीने चतुर्थी तिथि में
एक शिकारी रात भर
बिल्व पेड़ पर बैठकर
बिल्वपत्र तोड़कर
एक एक करके नीचे डालता रहा।
पेड़ के नीचे शिवलिंग था।
उसके है अज्ञान के
इस कार्य शिव प्रसन्न हुए।
सुबह तक वह बिल्र्चव पत्र डालता रहा।
अनजान अर्चना शिव प्रसन्न।
वह दिन फाल्गुन महीने
चतुर्दशी में मनाया जाता है।
देव असुर समुद्र मंथन में
जो विषय निकला, उसे
शिव ने पिया।
शिव और पार्वती का विवाह हुआ।
अनेक कहानियां।
हरि अंत हरि कथा अनंत।
जो भी हो,
मानव मन में
शिवरात्रि शिवाराधना
मनोवांछित फल प्राप्त करने का मार्ग है।
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