राह के काँटे
एस.अनंतकृष्णन, चेन्नई।
विधा--अपनी हिंदी, अपने विचार, अपनी स्वतंत्र शैली।
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राह /मार्ग
सही मार्ग न तो आगे बढ़ना मुश्किल।
अड़चनें ज्यादा है तो
आगे बढ़ना
उन्नति करना
अति मुश्किल।
पढ़ने राह के काँटे
रूपये।
एक धंधा करने रूपये।
व्यापार की प्रगति करने
बुद्धि चातुर्य।
भगवान के ध्यान में
चंचल मन।
परिवार चलाने में महँगाई।
कदम कदम पर राह के काँटें।
भूख तो राह के काँटों में बड़ा।
नाते रिश्तेदारों के प्रेम भी
राह के काँटे।
अविद्या, ग़रीबी, मधुशालाएँ
माया देवी, रोग राह के ही काँटे।
इन सब का सामना करके
आगे बढने चाहिए प्रयत्न।।
ईश्वरीय अनुग्रह।
ज्ञान दर्पण।
एस.अनंतकृष्णन , द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना
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