माता-पिता और गुरु—तीनों
एस. अनंतकृष्णन, चेन्नई, तमिलनाडु
6-10-2026
मानव में मानवता भरना,
जीविकोपार्जन के योग्य बनाना,
सत्य-असत्य का विवेक समझाना,
विनम्रता और अनुशासन सिखाना,
अच्छे चाल-चलन का मार्ग दिखाना,
भरी सभा में निर्भय होकर
अपने विचार व्यक्त करने का साहस देना—
इन सबका मार्गदर्शक है शिक्षक।
अज्ञान के अंधकार को मिटाकर
ज्ञान का प्रकाश फैलाने वाला,
जीवन का सही मार्ग दिखाने वाला,
आत्मज्ञान की ओर ले जाने वाला
गुरु ही सच्चा देवस्वरूप है।
आधुनिक युग में
अध्यापक वह सीढ़ी है,
जिसके सहारे विद्यार्थी
अपने जीवन की ऊँचाइयों तक पहुँचता है।
इसीलिए शिक्षकों के प्रति
कृतज्ञता और सम्मान प्रकट करने के लिए
विश्व शिक्षक दिवस मनाया जाता है।
माता-पिता और गुरु—
तीनों ही हमारे जीवन के प्रथम देव हैं।
माता-पिता हमें जन्म देते हैं,
पालन-पोषण करते हैं
और जीवन के संस्कार प्रदान करते हैं।
गुरु हमें ज्ञान, विवेक और
सही दिशा का मार्गदर्शन देते हैं।
कबीरदास जी कहते हैं—
“गुरु और गोविंद दोनों
खड़े हों मेरे सामने,
तो पहले गुरु के चरणों में नमन करूँ;
क्योंकि गुरु ने ही
गोविंद तक पहुँचने का मार्ग दिखाया है।”
हम जीवन में कुछ बनते हैं,
हमारी उन्नति होती है,
हमारे भीतर संस्कार और विवेक जागते हैं—
तो उसके मूल में
माता-पिता, शिक्षा और शिक्षक का अमूल्य योगदान होता है।
इसलिए आज के दिन
अपने माता-पिता और सभी शिक्षकों को
हृदय से स्मरण करते हुए
उनके चरणों में सादर प्रणाम।
माता-पिता का सम्मान—
संस्कारों का सम्मान है।
शिक्षक का सम्मान—
ज्ञान का सम्मान है।
ज्ञान और संस्कारों का सम्मान—
मानवता का सम्मान है।
सादर प्रणाम।
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