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Monday, October 5, 2026

काव्य मराथान

 काव्य मराथन में   पहले औरआज दूसरा दिन।

 चेन्नई के सुप्रसिद्ध कवि श्री ईश्वर करुण जी ने मुझे नामित किया और इसी कड़ी में मैं आज  कविताएं  लिख रहा हूँ।


कविता २.


मैं कविता के देश में भटक रहा हूं। --शीर्षक।


 नमस्ते! वणक्कम!

 मैं हूं हिंदीतर भाषी।।

 भटक रहा हूं   शैली के लिए।

छंदों की गिनती में,

अलंकारों के शब्दों में

नव रसों के चिंतन में।

रूढी बद्ध लिखने में

ईश्वर का अनुग्रह न मिला

जैसे मिला कालीदास को।

आदी कवि वाल्मीकि को।

तुलसी को,सूर को।

कबीर जैसा मानसिक गुरु

अंधेरे में पैर दबकर "राम,राम"मंत्र।।

सब के मिश्रण में ,उनके रसास्वादन में

भटकता भटकता कुछ भीनहीं लिख पाया।।

आधुनिक खड़ी बोली की

मुक्त शैली ,नव कविता,है कू

उनको भी नियम बनाते तो

सोचा लिखना है जरूर।।

अपने सोच विचार की 

अभिव्यक्ति करना है जरूर।

लिखना शुरु किया

अपनी भाषा,अपने विचार ,

अपनी शैली।।

यही ईश्वरानुग्रह।।

यही ईश्वरानुभूति की प्रेरणा।

परिणाम भी अच्छा निकला।

मुख पुस्तिका के दलों ने

 मेरी कविता मान ली।।

एकाध ने" वाह"वाह",सुंदर,

रायें लिखी तो प्रेरित मैं

साहस होकर कुछ लिख रहा हूं।

कवि कुटुंब भी अपने कवि सूची में

मेरा नाम भी जोड़ दिया।

ऐसे ही दस से ज्यादा दलों ने

मुझे स्वीकारा।

 सब के प्रति आभारी हूं।।

मैं कविता के देश में

 भटक रहा हूं आज।।

स्वरचित कविता

एस.अनंतकृष्णन,चेन्नै।

७-१०-२०२०


पहला दिन।


कविता-1.-- अपने विचार अपनी शैली। 

शीर्षक = इंसानियत।

श्रीगणेश करता हूं, श्री गणेश जी की कृपा मिलें।

श्री नहीं तो श्रीहीन मनुष्य जंग में जीना दुश्वार।

लक्ष्मी है कायर है तो न निर्भर जीवन।

शक्ति है, लक्ष्मी है  , बुद्धि  है  

तीनों है चरित्र नहीं तो 

नर जीवन अपमानित नारकीय।।

सातों जनमों में अपमानित रावण जीवन।

सुयोधन बन गया दुर्योधन। 

मजहब अनेक मनुष्यता नहीं तो

मजहब महत्वहीन हो जाते।।

वल्लुवर की बात--

कछुए समान पंचेंद्रिय को काबू में रखें तो

सातों जनमों में सम्मान जान!!

अनुशासन श्रेष्ठता देने से

अनुशासन जान से श्रेष्ठ जान।

चाल-चलन अच्छी तो अगजग में 

सिर ऊंचा जान।।


स्वरचित स्वचिंतक अनंत कृष्णन  चेन्नै।

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