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Friday, October 9, 2026

विश्व डाक दिवस

 विश्व डाक दिवस।

एस.अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु 

101026

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डाक विभाग अंग्रेज़ी की देन।

 भारत के इतिहास में 

कबूतर, हंस पक्षी, मेघ ,राजदूत, संदेश ध्वनि द्वारा।

 प्राचीन काल से आज तक के परिवर्तन

  महत्व पूर्ण है। 

रोज़ डाकिये की प्रतीक्षा में।

 वह दिन याद है

 तार के आते ही 

 सब रोने लगते।

 वह केवल अशुभ संदेश लाता था।

 मणि आर्डर का महत्व 

विश्व डाक दिवस 

 आजकल वह स्पीड पोस्ट, बचत बैंक , 

आदि सुविधाओं से भरा है। 

 डाक घर का नारा है

अहर्निशम सेवा महे।।

 आजकल मोबाइल आने के बाद डाक सेवा कम।

 डाकिये की चिट्ठी ही नौकरी देती।

 दूर के मित्र, नाते रिश्तेदारों से कुशल क्षेम के संदेश लाते।

 धन्य है डाक सेवा के 

 अन्वेषक।

जय विश्व डाक दिवस।

 डाक विश्व दिवस


विश्व डाक दिवस


एस. अनंतकृष्णन, चेन्नई, तमिलनाडु।

10-10-2026


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यादों में डाक सेवा


डाक विभाग अंग्रेज़ों की देन,

भारत के इतिहास में

संदेशों का अपना रहा है विशेष स्थान।


कबूतरों से संदेश भेजना,

हंस-पक्षियों की कल्पना,

मेघों के माध्यम से संदेश,

राजदूतों का संदेश पहुँचाना,

ध्वनि और संकेतों द्वारा संवाद करना—

प्राचीन काल से आज तक

संचार के अनेक रूपों में

महत्त्वपूर्ण परिवर्तन आया है।


रोज़ डाकिये की प्रतीक्षा में,

बीते दिनों की यादें ताज़ा होती हैं।


वह दिन आज भी याद है,

जब तार के आते ही

घर में हलचल मच जाती थी।

तार का नाम सुनते ही

मन में आशंका जाग उठती थी,

क्योंकि अक्सर वह

किसी अशुभ समाचार का संदेश लाता था।


मनीऑर्डर का भी

अपना विशेष महत्त्व था।

दूर रहने वाले परिजनों के लिए

वह आर्थिक सहारा बनता था,

और परिवार के चेहरों पर

खुशी की लहर दौड़ा देता था।


विश्व डाक दिवस!


आज डाक विभाग

स्पीड पोस्ट, बचत बैंक

और अनेक सुविधाओं से युक्त है।

जनसेवा के पथ पर चलते हुए

यह विभाग निरंतर

अपनी भूमिका निभा रहा है।


डाक विभाग का ध्येय-वाक्य है—


“अहर्निशं सेवामहे।”

अर्थात्—हम दिन-रात सेवा में तत्पर रहते हैं।


आज मोबाइल और इंटरनेट के युग में

डाक सेवाओं का उपयोग भले ही कम हुआ हो,

पर डाक सेवा का महत्त्व

आज भी कम नहीं हुआ है।


डाकिये के हाथों आई चिट्ठी

कभी नौकरी का समाचार लाती थी,

कभी दूर बैठे मित्रों का प्यार,

तो कभी नाते-रिश्तेदारों की

कुशल-क्षेम का संदेश।


वे चिट्ठियाँ केवल कागज़ नहीं थीं,

उनमें भावनाएँ बसती थीं,

अपनों का स्नेह झलकता था,

और दूरियाँ भी मिट जाती थीं।


धन्य हैं वे आविष्कारक,

धन्य है डाक सेवा,

जिसने दूरियों को घटाकर

मानव-हृदयों को जोड़ने में

अपना अमूल्य योगदान दिया।


जय हो डाक सेवा की!

जय हो विश्व डाक दिवस की!

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