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Sunday, December 6, 2020

शिक्षा नीति

 नमस्ते। वणक्कम। 

प्रतियोगिता  क्रमांक --६९ 

६-१२-२०२० 

विषय --शिक्षा नीति 


शिक्षा नीति  भारत में ,

कृषि नीति भारत में 

चिकित्सा नीति भारत में 

आजादी के पहले और बाद। 

सर्व शिक्षा अभियान ,

अंग्रेज़ी नीति ,भारतीय नीति शास्त्र बंद। 

तीन साल के बच्चेको मातृभाषा भूलने 

बीस हज़ार से सात लाख तक दान। 

मातृभाषा  बोलने पर जुर्माना। 

मातृभाषा के माध्यम अपमान। 

बगैर मातृभाषा के नौकरी और शिक्षा। 

मातृभाषा माध्यम के स्कूल बंद। 

और दस सालों में अंग्रेज़ी ही 

मगर मच्छ  सामान मातृभाषा को निगलेगी। 

नगरीकरण नगर विस्तार के नाम खेती करने 

जमीन ही नहीं नदी झील में कारखाने। 

गुरु भक्ति ही नहीं रहेगी ,

पैसे लेकर सिखाने प्रशिक्षित अध्यापक कतार पर। 

प्रतिभाशाली विदेश में। 

शिक्षा नीति अति चिंताजनक। 

भारतीय संस्कृति आचार व्यवहार 

खान पान सभी में पाश्चात्य प्रभाव। 

परिणाम  न सम्मिलित परिवार ,

न पति पत्नी में आत्मीयता।

न माता पिता का आदर। 

तलाक अशांति के पति  पत्नी में  .

अनुशासन ममता हीन ईश्वरीय भय रहित 

स्नातक स्नातकोत्तर  क्या प्रयोजन। 

पैसे प्रधान गुणात्मक शिक्षा नहीं 

धार्मिक शिक्षा नहीं 

क्या प्रयोजन ?

स्वरचित स्वचिंतक अनंतकृष्णन ,चेन्नै।

Saturday, December 5, 2020

योगमाया

 नमस्ते। நமஸ்தே.

वणक्कम।। வணக்கம்.

 माया ।शैतान।  மாயை . சைத்தான்.


வணக்கம்.நமஸ்தே!

தமிழும் நானே.ஹிந்தியும் நானே.

கவி குடும்பம்..कवि कुटुंब।

இன்றைய தலைப்பு.

शीर्षक :माया-योगमाया ।மாயை யோகமாயை.

6-12-2020.

असली माया।। உண்மையான மாயை

नकली माया।। பொய்யான மாயை.

रंग माया। வண்ண மாயை.

रंगीली माया।।  கேளிக்கை மாயை

चमकती माया।। ஒளிரும் மாயை.

नर-नारी, प्रेमी-प्रेमिका माया।। ஆண்-பெண்,காதலன்-காதலி மாயை

धन माया, अहं माया।। தன மாயை,ஆணவமாயை

लोभ माया ,सत्ता माया,  பேராசை மாயை,

ஆட்சி மாயை

पद माया, अधिकार माया।। பதவி மாயை ,அதிகாரமாயை.

न जाने विविध माया।। அறியாத பல வித மாயைகள்.

माया से बचना अति मुश्किल।। மாயையில் இருந்து தப்பிப்பது அதிக கடினம்.

माया महाठगिनी  மாயை மஹா மோசக்காரி

 त्रिदेव भी न बचे।।  மூன்று. தேவர்களும் தப்பவில்லை.

मामूली मानव सद्य: फल के लोभी।।

சாதாரண மனிதன் உடனடி பலன் 

அடையும் பேராசைக்காரன்.

परिणाम असाध्य दुखी ईश्वरीय दंड।।

பலன் தீர்க்க முடியாத 

கடவுளின் தண்டனை.

+++++++++++++++++++

 योगमाया   योग साधना ध्यान। 

 யோகமாயைகடவுள் விருப்பம்- யோகசாதனை -தியானம்.

कितने करते वे सुखी।।

செய்கின்ற அளவிற்கு சுகம் அதிகரிக்கும்.


செய்யாத அளவிற்கு துன்பம்.

அதனால் மனிதனால் 

மாயையில் சிக்கி

மனிதன்  சொல்கிறான்--

உலகம் இன்னல் மயமானது.

யோகமாயை (ஈஸ்வரசக்தி மாயை)

பெற்ற மனிதன் சொல்கிறான்---

"பூமி சுவர்க்கம்."




नमस्ते।

वणक्कम।।

 माया ।शैतान। 

असली माया।।

नकली माया।।

रंग माया।

रंगीली माया।।

चमकती माया।।

नर-नारी, प्रेमी-प्रेमिका माया।।

धन माया, अहं माया।।

लोभ माया ,सत्ता माया,

पद माया, अधिकार माया।।

न जाने विविध माया।।

माया से बचना अति मुश्किल।।

माया महाठगिनी  त्रिदेव भी न बचे।।

मामूली मानव सद्य: फल के लोभी।।

परिणाम असाध्य दुखी ईश्वरीय दंड।।

 योगमाया   योग साधना ध्यान।

कितने करते वे सुखी।।

कितने न करते  दुखी।

अतः मनुष्य कहता है 

दुख भरा संसार।।

 योगमाया प्राप्त मानव कहता,

स्वर्ग है वसुंधरा।।

स्वरचित स्वचिंतक एस.अनंतकृष्णन,चेन्नै।।









कितने न करते  दुखी।

अतः मनुष्य कहता है 

दुख भरा संसार।।

 योगमाया पर्याप्त मानव कहता,

स्वर्ग है वसुंधरा।।

स्वरचित स्वचिंतक एस.अनंतकृष्णन,चेन्नै।।

Friday, December 4, 2020

युवक निर्दोष।

 नमस्ते। वणक्कम।

विधा --अपनी भाषा।अपनी शैली, अपने छंद।

शीर्षक :किस डगर पर चल पड़े युवा।।


 युवा अच्छे ,

शैतानियां शक्ति बड़ी।

भ्रष्टाचार ,रिश्वत, मतदाता के अंधविश्वास।

पैसे के बल पर शासक,

पैसे के बल पर  पदाधिकारी।

सिफारिश के बल पर,

दान धन के बल पर 

 कालेज की भर्ती।।

अंक  लेने रिश्वत।।

खबर पढ़ी अंग लेकर 

डाक्टरेट  । स्नातक। स्नातकोत्तर।

पुनः अंक गिनती कितने उत्तीर्ण।।

 समाचार पत्र  के भ्रष्टाचार खबर।।

आज तक किसी को दंड नहीं।

युवकों पर कोई   दोष नहीं।।

 सद्य: फल  ही प्रधान। प्राथमिकता।।

अतः ज्ञान चक्षु प्राप्त  मनुष्य,

कुकर्म कर रहे हैं।।

भगवान भी अति अदभुत ,

जवानी, बुढ़ापा, असाध्य रोग,

मच्छर रोग फैलाने तैयार।।

कोराना आतंकित करने तैयार।

बाढ , तूफान,आंधी, सुनामी, निस्संतान।।

   युवकों पर दोष नहीं

स्वार्थ समाज का दोष।।

स्वरचित स्वचिंतक एस.अनंतकृष्णन चेन्नै























 













जीवन साथी

 आयोजन ४

४-१२-२०२०

जीवन साथी।

 नमस्ते। वणक्कम।।

मैं हूं तेरा जीवन साथी,

जितने कहे,वे सब तीस साल तक।

१९९० के बाद नौकरी की तलाश में

मेरे साथी विश्व भर बिखर गये ‌‌।

मिलने मिलाने  कोई नहीं।।

बेटे बेटी सब अमेरिका,

आस्ट्रेलिया,कनाडा चले आते।

 मेरा गांव सूना पड़ा है।।

गांव में नये लोग,श्री पीढ़ी।।

मेरे जीवन साथी मोबाइल।।

  अंतर्जाल मिलन।।

 यही निर्णय पर पहुंचा,

नश्वर दुनिया में साथी घट रहे हैं।

शाश्र्वत साथी भगवान।।

ज्ञान के विस्फोट जमाने में

भगवद्गीता वेद शास्त्र बाइबिल कुरान

 गहराई से पढ़ने समय नहीं।

किस भगवान किस मंदिर जाऊं?

एक एक चेनल कई प्रवचन करता।

शिव महिमा,शीरडि पुट् टबर्ति साईं महिमा

राम महिमा कृष्ण महिमा,

मेरे जीवन साथी भगवान हैं,

बाकी साथी  पूर्णकालीन नहीं।

अंश कालीन भी नहीं।

आठवीं कक्षा तक के साथी  बारहवीं में नहीं।

बारहवीं के साथी कालेज में नहीं।

कालेज के साथी  नौकरी, शादी बिखर गये।।

मेरे जीवन साथी भगवान भजन।।

राम,कृष्ण, गीता, शिव विष्णु  भजन।

लौकिक  साथी कम होते जा रहे हैं,

सत्तर साल का बूढ़ा हूं,

मुख पुस्तिका में मुख न देखा,

स्पर्श न किया , आवाज न सुना साथी।

उनके भी साथी राम कृष्ण शिव गणेश 

दुर्गा लक्ष्मी सरस्वती सुंदर सुंदर तस्वीर।।

 वे भी फारवेड मैं भी फारवेड।।

अब जीवन साथी भगवान।।

स्वरचित स्वचिंतक अनंतकृष्णन चेन्नै।

Thursday, December 3, 2020

कागज

 नमस्ते। वणक्कम।।

शीर्षक : कलम कागज।

दिनांक --३-१२-२०२०-३.

  विचार अभिव्यक्ति बोली,

 बोली से चित्रलेखन।।

 चित्र लेखन से ताड़ के पत्ते।

ताड़ के पत्ते से शिलालेख।।

ताम्रपत्र लेख।। फिर कपड़ों पर।

कागज के आविष्कार,

कलम का आविष्कार दोनों

लिखित साहित्य की अति प्रगति।।

भूले बिसरे  लापता साहित्यों  की खोज।

प्रकाशन कलम कागज 

छापाखाने का आविष्कार।

ज्ञान के विकास के क्षेत्र में बड़ी क्रांति।।

भलाई में बुराई भी साथ साथ।।

कोरा कागज का है मन मेरा।

लिख लिया नाम तेरा,तेरा।

प्रेम पत्र ,बेनाम पत्र  प्रेम की कविताएं।

अश्लीलता,  चित्र, यूवकों को बिगाड़ने वाले।।

कलम द्वारा लिखित  विषय शाश्र्वत कैसे?

पत्थर पर के लेख भी घिस जाते हैैं।

कागज पर लिखने कलम ।।

आज तो संगणक  और

 कागज का महत्त्व।

कलम केवल हस्ताक्षर करने।।

A4Sheetaaका महत्त्व अधिक।।

स्वरचित स्वचिंतक अनंतकृष्णन चेन्नै

वक्त का खेल।

 नमस्ते। वणक्कम।।

"वक्त  की लाठी होती  बेआवाज।"

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विधि की विडंबना ही वक्त का खेल।।

साज़िश इंदिरा  गांधी की ,

पर अनुमान नहीं, अंगरक्षक ही ।

शिवाजी छत्रपति अफजल खां की साजीशें पता नहीं बघनखा।

महात्मा गांधीजी की सत्यता ,

भारी भीड़, नमस्कार की मुद्रा।।

 वक्त की लाठी होती बेआवाज।।

समुद्र तट पर कुतूहल खेल।।

न पता सुनामी का बदनामी करतूत।।

वक्त की लाठी होती  बेआवाज।।

 दस रुपए का लाटरी,

बनाया लखपति।

  शकुंतला दुश्यंत अंगूठी को जाना।

वक्त की लाठी होती बेआवाज।।

राम के पार स्पर्श अहल्या मुक्ति।

 हर जोतना सीता का मिलना,

महाराज जनक के जीवन में,

वक्त की लाठी होती बेआवाज।।

 कारण के जीवन में

 दुर्योधन का आना।

वक्त की लाठी होती बेआवाज।।

स्वरचित स्वचिंतक अनंतकृष्णन चेन्नै

Wednesday, December 2, 2020

भगवान याद आते हैं

 नमस्ते नमस्ते वणक्कम।

 तब भगवान याद आते हैं,

जब डाक्टर ऊपर हाथ दिखाकर

 प्राण बचाने की आशा  निराशा कर देते हैं।

करोड़ों की पूंजी  रात दिन  मेहनत 

वह चित्रपट की असफलता 

  याद दिलाती है  भगवान  की।।

सैकड़ों हजारों के खर्च,

गली गली घूम ना, हर मनुष्य के सामने हाथ जोड़ना,

चुनाव में हार जीत याद दिलाती है भगवान।

कम पूंजी करोड़ों लाभ भुला देती भगवान की याद।।

 भक्ति काल के राधाकृष्णन,

भव बाधा दूर करो राधा  

रीतिकालीन कवियों को

श्रृंगार अश्लीलता तब भूल जाते हैं भगवान को।

वीरगाथाकाल,रीतिकाल  दोनों

बना दिया भारत को गुलाम।

 वीरगाथाकाल में मुगल आगमन।

हिंदू गुलाम।

रीतिकाल में अंग्रेजों के आगमन

फ्रांसीसी आगमन दोनोें गुलाम।

आजादी के बाद  

नौ करोड़ की काली विघ्नेश्वर की मूर्त्तियां 

बनाकर विसर्जन के नाम अपमान।

गिरिजा घर, मस्जिद की संख्या अधिक।

 ईश्वर का सम्मान नहीं,ईश्वर के विसर्जन ,

पैर से धक्का देता, नहीं समझता ईश्वर का शाप

अपनाते हैं हिंदु।

तभी एक शैतानियां शक्ति ओवैसी का नारा

पंद्रह मिनट का समय भारत मुगल देश।।

तब याद आती है भगवान की।

 स्वरचित स्वचिंतक अनंतकृष्णन चेन्नै।।

 कबीर 

दुख में सुमिरन सब करें सुख में करै न कोय।

सुख में सुमिरन सब करें तो दुख काहे को होय।।