Search This Blog

Saturday, December 13, 2025

रंग-बिरंगे संसार

 रंगों का संसार।

एस. अनंतकृष्णन, चेन्नई 

१३-१२-२५.

रंगों का संसार 

 अति सुन्दर,

 अति आकर्षक,

 अति आनंद प्रद।

अति मनोरंजक।

  ऊँचे ,ऊँचे पेड़।

 जड़ी बूटियाँ

 चचींडा,बैंगनी,

नबैंगनी के भिन्न-भिन्न आकार,

 मन

 विविध  कटि पत्तियों।ष

 रंग-बिरंगे फूल,

 विविध आकार के फल।

विविध स्वाद,

  रंगीले लाल पीले 

 सूर्योदय सूर्यास्त।

 चंद्रोदय, चमकते तारे।

काले नीले उजाले बादल,

 समुद्र की लहरें, बुलबुले।

 रंग-बिरंगे पक्षी, 

विभिन्न कलरव।

पशु ओं में बड़े हाथी,

 हिरन , सींगवाले हिरन,

 खरगोश , गंभीर सिंह,

चीता,बाघ, भेड़िया,सियार

 सब के गुणों से मिश्रित 

 विभिन्न आकार के मनुष्य,

 सदगुण बदगुण,

रंगीले आदमी,

चित्रकार,  विभिन्न राग, अनुराग, ताल छंद, लय

 स्वर।

 सफेद रंग के सूर्य प्रकाश 

 के साथ रंग इंद्र धनुष।

 गगन चुंबी  गोपुर,

राजमहल।


 रंगों का संसार,


मौसमों के चक्र

 चिलचिलाती धूप,

 कंपकंपी सर्दी

 पत्ते हीन पतझड़।

 वर्षा के मेंढक टर्राना,

मोर के नाच,

हरे भरे पेड़, फूलों का वसंत

 रंगों का संसार 

 अद्भुत, आश्चर्यजनक।

भगवान की लीला।

 आनंद प्रद, संतोष प्रद, शांति प्रद।

+++++++





 

 


 



 


 


 

 


 







 



 

 










Thursday, December 11, 2025

मांसाहारी पशु की सुरक्षा

 पशुओं की सुरक्षा।

एस. अनंतकृष्णन, चेन्नई 

12-12-25.

---------------------

पशुओं की सुरक्षा चाहिए,

 क्या यह संभव है?

 अनेक पशु मंदिरों के

 खंभों मैं देखते हैं,

 जिनका नामो 

निशान अब नहीं।

 हैदराबाद गया तो

 वहाँ  शाकाहारी भोजनालय अति 

   दुर्लभ है।

 गली के कुत्तों की सुरक्षा में ब्लू क्रास,

 तोते के ज्योतिष 

 को रोकने वाले 

 पशु पक्षी रक्षक,

मकड़ी के जाल में 

फँसे कीड़े देख

 पछताने लोग

 माँसाहार  खाने के इच्छुक।

कसाई की दुकानों में,

 भीड़, 

 स्वादिष्ट माँसाहार भोजन,

स्वादिष्ट आकर्षित विज्ञापन,

शाकाहारी और माँसाहारी

 के सम्मिलित  भोजनालय,

 अभयारण्य के पशुओं का नदारद।

 ऐसा है मधुशाला खोलकर,

 मधु पीना देश , परिवार,

 व्यक्ति का नाश।

 अंग्रेज़ी माध्यम स्कूल की अनुमति देकर 

 मातृभाषा  माध्यम का प्रचार ।

 व्यर्थ काम ।

  पशु रक्षा वनाधिकारी

  रिश्वत रोकने का विभाग 

 फिर भी चंदन पेड़ की चोरी,

हाथी दांत की चोरी,

 हिरन का शिकार 

 सब चलता रहता है।

 कठोर दंड विधान नहीं,

  अतः पशु  की सुरक्षा कैसे?

 ऊँट का माँस, बकरी का माँस, गो माँस, गोवधशाला 

 सब वैध।

 सबहीं नचावत राम गोसाईं।

 मछुआरे के जीवन,

 मधुशाला कारखाने के मज़दूर,

 सिगरेट कंपनी के मज़दूर 

अंग्रेज़ी माध्यम के लूट

 सब की सुरक्षा के सामने 

 पशु की  सुरक्षा की समस्या  अनावश्यक।

 कसाई की दूकान,

 विदेशी मजहबों की बढ़ती जनसंख्या,

 मज़हबी परिवर्तन 

 यही प्रधान या

 पशु की सुरक्षा।

 सोचिए, 

क्या

 कसाई    की दूकान बंद करने का कानून लागू कर सकते हैं?

 मधुशाला कारखाने बंद कर सकते हैं?

 खूँख्वार  जानवरों के शिकार राजा करते थे।

 मानव कल्याण मानव सुरक्षा,

 १००%मतदेना

 आदि प्रधान।

 न पशु की सुरक्षा।

 मांसाहारी मनुष्य के होते

 यह तो असंभव।



 


 

 

 

 



 

 

 

 

 

 

 






 



 

 

 

 


 

 



Wednesday, December 10, 2025

ट्राफ़िक जाम

 ट्राफ़िक जाम।

( यातायात अवरोध)

एस.अनंतकृष्णन, चेन्नई।

11+12-25

-----------------------

यातायात अवरोध 

 यानै ट्राफ़िक जाम।

 वाहनों के आविष्कार,

आर्थिक विकास 

नगर विस्तार 

परिणाम यातयात अवरोध।

जीवन यात्रा मैं 

सम्मिलित परिवार 

   बुद्धि कौशल,

 आर्थिक व्यवस्था 

 ईर्ष्या, प्रतिशोध,

 लोभ, अहंकार , 

 जीवन यात्रा के अवरोध।

 जब मैं बच्चा था,

तब की आर्थिक व्यवस्था ,

 पैर गाड़ी जिसके पास है,

 वही अमीर।

 आज़ादी है के बाद 

भारत का विकास आश्चर्यजनक।

मोटर कार देखना  भी 

 एक विचित्र बात थी।

 इंजन लगा द्विचक्र गाड़ी

धीरे धीरे उसकी संख्या बढ़ी।

 अब बाहर जाता हूँ

 पैर गाड़ी का पता नहीं, 

स्कूटर, बैक भी कम।

 कार की संख्या ज़्यादा।

परिणाम  यातायात 

अवरोध।

 प्राचीन काल में 

 वाहनों   की कमी,

 पैदल यात्रा 

 तब जंगल, 

पहाड़ नदियाँ

 यात्रा की बाधाएँ।


 आजकल आवागमन के 

 साधनों के कारण,

 नगर विस्तार के कारण 

 ट्राफ़िक जाम।

यात्रा की सुविधाएँ अधिक। 

पक्की सड़कें,

नेशनल है वे।

   जितनी सुविधाएँ,

 बढ़ती है,

 उतने अवरोध 

 जीवन यात्रा में।

पुल , पूल पर पुल

 वाहन खरीदने 

 कर्जा लेने की सुविधा।

 महँगाई,

 शिक्षा की महँगाई

 इलाज की महँगाई।

नये नये रोगों का निदान 

 इलाज की सुविधाएँ।

 आर्थिक व्यवस्था 

 जीवन यात्रा के बाधक।

 लगता है ट्राफ़िक जाम 

 आवागमन की सुविधा के कारण नहीं,

 देश की आर्थिक प्रगति भी।

 जापान में आकाश मार्ग पर के नये वाहन का पता लगाया है।

 पैर गाड़ी जैसा छोटा वाहन

 आकाश में उडने के लिए।

 घर घर में उड़ान।

 तब होगा आकाश

 मार्ग पर ट्राफ़िक जाम।

 विज्ञान वरदान है

अमीरों का।

 ट्राफ़िक जाम की देरी

की चिंता नहीं।

जो भी हो ट्राफ़िक जाम 

 समय की बरबादी।

 भारत जैसे देश में 

 आंबुलन्स जाना 

बड़े शहरों में 

अति मुश्किल।

पराया धन

  पराया धन

एस.अनंतकृष्णन, चेन्नई 

10-12-25.

++++++++++++


पराया धन, 

 तमिलनाडु में 

 संतान लक्ष्मी को

 ग्रामों में कहते थे,

 एक हमारा धन,

 दूसरा पराया धन।

मतलब है

लड़का अपना धन है,

 लड़की पराया धन।

 जीवन में धन कमाना,

 सनातन धर्म के अनुसार 

दान धर्म करना।

 अन्नदान,गोदान,भूदान  कन्या दान।

   पराया धन  

   अपहरण 

  महा पाप।

 मानव की चल संपत्ति 

 अचल संपत्ति सब 

  परायों के लिए।

 पीढ़ी दर पीढ़ी 

 लोगों के लिए।

 अन्न धन

 किसान के मेहनत से।

वह परायों के लिए।

वृक्ष फल न भखै,

 नदी न संचय नीर।

 परमार्थ के कारणे

 साधु धरा शरीर।

 कपड़ा बुनकर बनाता है

 वस्त्र धन दूसरों के लिए।

 शरीर ढकने कपड़े चाहिए,

मानव की कमाई कपड़े खरीदने केलिए।

 कपड़ा बुनकर का नहीं,

बेचने के लिए।

तब पराया धन  

 बदलाव के लिए।

 सुनार का आभूषण 

 परायों के लिए।

 परायों का धन सुनार के लिए।

 देश है अपना धन।

ज़मीन अपना।

 धन तो चंचल है,

 परायों के हो जाते हैं।

मित्रता भी धन है।

 विद्या धन ,

 परायों को देते देते

 ज्ञान की वृद्धि होती है।

इस जहां में सब के सब 

 परायों के लिए।


Monday, December 8, 2025

मैं पैसा बोलता हूँ

 पैसा बोलता है।

एस.अनंतकृष्णन, तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना 

9-12-25

++++++++++++


 मैं पैसा हूँ।

 मैं ही बोलता हूँ।

 अधिक कोई बोले,

 भले ही सत्य हो,

भले ही ईमानदारी बातें हो

 मैं उनके जेब में न तो

 उसकी बातें न सुनता कोई।

पांडेय बेचन शर्मा उग्र 

 मेरे बारे में मेरे ही मुख से 

 सुनाया है बहुत।

 मैं रुपया हूँ।

 मेरी मधुरिमा मेरे झनझनाहट के सामने

 शिव का डमरू, सरस्वती की वीणा, मुरलीधर का बाँसरी,  सब मधुर ध्वनियाँ बेकार।

आजकल चुनाव में 

 विधायक, सांसद 

 सैकडों रूपयों के खर्च करें,

 वोट के लिए नोट दें तो

 मतदाता न देखते

 पात्र कुपात्र के विचार।

 भ्रष्टाचारी नेता भ्रष्टाचार रूपयों से अदालत में 

 जाने पर नामी वकीलों का तांता इसके पक्ष में।

 अध्यापक , पुलिस, डाक्टर सब मेरे बेगार।

 गरीब अपराधी को 

 पकड़ते ही लाठी का मार।

 अमीर अपराधी का सम्मान।

 वहाँ पैसा मैं ही बोलता हूँ।

 आराम की विमान यात्रा,

 पाँच नक्षत्र होटल में ठहरना,

 पैसे मेरा कारण।

 मेरी आत्मकथा में 

 पांडेय बेचन शर्मा उग्र ने

लिखा है,

 संक्षेप में मेरी महिमा,

 लड़कियों की इज्ज़त लूटो,

 साथ खून करो,

साफ़ साफ़ बच जाओगे।

धर्मों को त्याग दो,

 रूपये के शरणार्थी बनो।


सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज। अहं त्वा सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा शुचः॥

अर्थ: सभी धर्मों (कर्तव्यों/उपायों) को त्याग कर, केवल मेरी (भगवान की) शरण में आओ। मैं तुम्हें सभी पापों से मुक्त कर दूँगा, शोक मत करो।

मैं पैसा हूँ। मैं रूपया हूँ।

Sunday, December 7, 2025

क्रोध

 क्रोध।

एस.अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना।

8-12-25.


क्रोध   चाहिए 

 क्रोध न करना।

 अन्याय के  विरोध में 

 क्रोध दिखाना चाहिए।

 वह क्रोध भी तभी  

तभी दिखाना जब 

 क्रोध  का पता लगें कि

 न्याय पूर्ण हो।

विदेशियों का आक्रमण।

 मंदिरों का तोड़ मरोड़।

 आज़ादी के बाद 

धर्म निरपेक्षता के नाम 

 दो हज़ार साल पुराना मंदिर।

मुगलों के आने के पहले मंदिर।

न्यायधीश के इंसाफ के बाद भी।

 तमिल राष्ट्र कवि भारतियार ने कहा

 रौद्र का अभ्यास कर लो।

 जग भलाई के लिए 

 अत्याचार की चरम 

  सीमा पर  भगवान 

 जन्म लेते हैं।

  क्रोध न सीखने पर

 अन्याय चरम सीमा पर 

 पहु़ँचता।

 आज़ादी अहिंसा से नहीं,

 भारतीय लाठी का मार सहते रहे।

 दूसरी ओर  देशभक्त 

 गर्म दल अंग्रेज़ी 

 के तार खंभ, थाना

 मार्ग जिला देश 

 सब को चूर्ण कर रहे थे।

   पर बिना सोचे विचारे 

 बांग्लादेश,  लोभ वश 

 ईर्ष्या वश क्रोध 

 सही नहीं।।  

 क्रोध तो एक क्षण मैं 

 खूनी बना देता है।

पियक्कड़ों का क्रोध 

 निंदनीय है।

 माता पिता गुरु का क्रोध

 जीवन प्रगति के लिए।। आजकल की  ताज़ी खबरें 

 माता ने  सिनेमा जाने,

पैसे न दिए माता की हत्या।

अध्यापिका ने गाली दी,

 अध्यापिका की हत्या।।

 ऐसे क्रोध मूर्खता दंडनीय।

 क्रोध बिना 

सोचे विचारे होने पर 

 जिंदगी भर पछताना होगा।।

Saturday, December 6, 2025

अंतिम परीक्षा

 अंतिम परीक्षा 

+++++++++

एस.अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना 

7-12-25

++++++++++++++

माता पिता कहते थे,

 बारहवीं कक्षा जीवन 

 मोड़ की अंतिम परीक्षा।

उच्च शिक्षा भर्ती का बुनियाद।

 स्नातकोत्तर तक 

खूब पढ़ना।

  फिर नौकरी।

परीक्षा खत्म।

 आगे ही परीक्षा ही परीक्षा।।

 अंतिम परीक्षा अंतिम साँस तक।

 योग्य पति या पत्नी,

 प्रेमी या प्रेमिका 

 चुनने की कठोर परीक्षा।

सुपुत्र   को शिक्षा देने की परीक्षा।

 कुपुत्र को दूख लेख की परीक्षा।

 बहु या दामाद चुनने की परीक्षा।

 उद्योग धंधों में 

 पदोन्नति की परीक्षा।

 व्यापारी को  ग्राहक की परीक्षा।

 बीमार पड़ने पर

 खून, एकस्रे,स्केन की परीक्षा।

   अंतिम परीक्षा कहाँ तक।

 बहू की परीक्षा,

 दामाद की परीक्षा।

 अंतिम परीक्षा अंतिम साँस तक।।

 चुनाव की परीक्षा।

योग्य प्रतिनिधि चुनने की परीक्षा।

 नेता के भाषण और वादा

 को जानने की परीक्षा।

 कदम कदम पर 

चोर, डाकू, उचक्कों की परीक्षा।

 नकली साधु संतों की परीक्षा।

 नकली अंगहीन भिखारी की परीक्षा।

 अंतर्जाल ठगों की परीक्षा 

 अंतिम साँस तक

 परीक्षा ही परीक्षा ।

 अंतिम परीक्षा लेने

 आत्मा नहीं रहती जहाँ में।




 

 

 

 


 

 

 

 

 

 



 मन