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Saturday, February 28, 2026

माँ

 माँ की ममता 

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एस.अनंतकृष्णन, चेन्नई 

 स्वरचित रचना 

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बंधन रहित स्नेह,

माँ रूपी कवच।


मेरे रूप होने के पहले

मेरे चेहरे देखने के पहले,

मेरे स्वर सुनने के पहले,

माँ के हृदय प्रेम तो

 माँ की तुलना में और कोई नहीं।

 जन्म लेने के बाद,

रोग रहित , अहर्निशम्

जागकर पालनेवाली है माँ।

पालने में, कंधों पर ढोकर 

 रक्षा करनेवाली है माँ।

प्यार का जन्मस्थान,

त्याग का प्रतिबिंब,

गहरे प्रेम की देवी,

बंधन रहित स्नेह, माँ रूपी कवच।

मां से रूठो

माँ से लड़ो,

फिर भी ढूँढकर

 अपने प्यार जताने वाली है माँ।

 हमारे कष्ट के समय,

हमारे रोते समय,

 दिलासा देने वाली है माँ।

माँ के मन में  द्रोह नहीं, धोखा नहीं, प्रेम ही प्रेम में इंगित माँ।

 सर्वस्व विस्मरण करके,

माँ के गोद में सोते

 बचपन ही स्वर्णकाल व

स्वर्गकाल  मेरे।

माँ अपने बारे में चिंतित नहीं,

सदा-सर्वदा चिंतित हैं

 अपने संतान के बारे में।

जान लेने हजारों,

 जान देने एक ही नाता माँ।

ढाई अक्षर मंत्र माँ ही

 मेरे जन्मदात्री।

मेरे प्रथम आराधना देवी माँ ही।

प्यार बताने हजारों होने पर भी 

 प्यार जताने माँ के बराबर माँ ही।

हजारों छुट्टियाँ आने पर भी,माँ के कार्यालय रसोई की छुट्टी नहीं।

उम्र के अंतर न देखती माँ,

माँ के दुलार में 

पचास वर्ष के  बेटे भी शिशु समान।

वर्षा के भीगी मुझे,

 अपने आँचल से पोँछी,

 माँ देखकर 

वर्षा को भी  होगी ईर्ष्या।

माँ प्यार का खान।

 माँ प्यार का कोष।

प्रेमचंद उपन्यास सम्राट की कहानी मेँ,

 माँ का जिक्र देखिए,

 माँ को जलाओ,तो

 दया का सुगंध निकलेगा।

 पीसो तो दया का रस निकलेगा।

 थोड़े में कहें तो

 मातृत्व   वर्णनातीत 

 प्रेम और दया के प्रतिबिंब है।

























Thursday, February 26, 2026

खोटा व्यापक

 खोटा सिक्का 

से. अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना 

27-2-26

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खोटा शब्द आजकल 

 व्यापक अर्थ में।

मिलावटी चावल,

 मिलावटी कानून 

 नकली वेषधारी

 खोटा आदमी

 नकली संन्यासी,

 नकली ज्योतिष 

 भ्रष्टाचारी राजनीतिज्ञ,

नकली तेल,

 नकली कार पार्ट्स

बनावटी श्रृंगार 

 न जाने यूट्यूब में 

 फेसबुक में 

 कदम कदम पर 

 खोटा ही खोटा।

 खोटा पुलिस अधिकारी 

 बीस साल के बाद 

 पकड़ा नकली पुलिस।

 खोटा प्रमाण पत्र

 आजकल की खबरें 

 अफ़वाहें खोटा खोटा

 नकली बैंक संदेश।

 नकली मुखपुस्तिका दोस्त।

 मोबयिल  में खोटा लघु संदेश।

जवाब देते  ही लूट।

 खोटा डाक्टर।

 फूँकफूँककर कदम रखना है,

न तो ठगनवाले,

 सन्नद्ध तैयार।

Wednesday, February 25, 2026

प्रकृति

 प्रकृति का न्याय 

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एस.अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना।

26=2=26.

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प्रकृति का न्याय 

 अति उत्तम।

 वह तटस्थ न्याय 

  उसका प्रदूषित करने पर विपरीत न्याय।

 ऋतुओं का चक्र 

 नियमानुसार।

 सूर्योदय सूर्यास्त नियमानुसार।

 मौसमी फल, सब्जियाँ

 नियमानुसार।

 समय पर वर्षा।

स्त्री-पुरुष  आकर्षण,

शिशु का जन्म,

 बचपन, जवानी, बुढापा 

नियमानुसार  मृत्यु।

 कर्मफल का पुरस्कार दंड।

पंचतत्व हवा,पानी, अग्नी , भूमि,आकाश 

 आदि की करुणा,

समान।

 न उनमें जाति, मजहब,

संप्रदाय के भेद भाव।

 न राग-द्वेष।

 प्रकृति के कोप में भी 

 न राग-द्वेष।

प्रकृति सदा तटस्थ।

लेकिन प्रकृति रचना के गुण,

अलग-अलग।

 फूल सा कोमल,

 काँटों सा चुभना।

विषैला साँप,

खूँख्वार जानवर,

 माँसपक्षिणी,

 आदमखोर।

 बल, दुर्बल 

 दयालू निर्दयी

 द्रोही ठगी

 प्रेमी त्यागी 

 कंजूसी 

दानी लोभी

 यह प्रकृति का न्याय।

अति सूक्ष्म मानव ज्ञान के अपार।

 बीज अति छोटा

 वटवृक्ष अति बड़ा।

 कटहल भी है, ब्लू बेरी

 आम शैशव में एक स्वाद

 कच्चा आम खट्टा,

पका आम मीठा।

 इमली खट्टा।

 तितली की उत्पत्ति।

 यह प्रकृति न्याय 

 मानव ज्ञान के अपार का

 न्याय।

तभी ईश्वर की अद्भुत माया।

 मानवेतर शक्ति का प्रमाण 

प्रकृति न्याय।।













Tuesday, February 24, 2026

पतझड़

 पतझड़

एस.अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना 

25-2-26

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भूलोक जीवन में 

  अस्थाई सबकुछ।

 पुनरपि जननं पुनरपि मरणं पुनरपि जननी जठरे शयनम्।

 इसके प्रकृति दर्शन प्रमाण है

 ऋतुओं के चक्कर।

उसमें पतझड़,

 सर्वस्व खोकर 

 ठूंठ  बने वृक्ष,

 वैसी दशा मानव को भी

 सुख दुख दुख सुख

तब पतझड़ के जैसे 

 धीरज धरना,

 जड में पानी का बचत रखना,

 मानव भी   बाह्याडंबर खर्च रहित  बचत करना चाहिए,

 तभी वृक्ष के समान 

 धीरज धरकर पुनः पनप सकते हैं।

हरे पत्ते,लाल रंग में 

फिर ताम्र रंग में 

धरती पर गिर कर

  पैरों के पड़ते ही

 सर सर आवाज़,

 हवा में उड़ना,

पेड़ वयोवृद्ध 

वृद्ध के समान खड़ा रहना,

मानव के जीवन का प्रतीक।

 भावी जीवन के कष्टों 

में धीरज से रहने का संदेश।

 मानव जीवन में पनपना असंभव।

 शक्ति के रहते कुछ करके  परोपकार करना है, 

वृक्ष के समान।

 




 

Sunday, February 22, 2026

युवा का मन भटका हुआ

  

युवा मन का भटकाव।

एस. अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना।

  आधुनिक युवक 

    पल पल 

 भटक जाने का युग

 कलयुग।

  

 बढ़िया शीर्षक

 गंभीर विषय

युवा तो अच्छे सच्चे गुणी, 

देश भक्त 

पर देश और विज्ञान

आज की प्रगति का आधार 

युवक।

विश्व भर में भारत में ही युवा शक्ति अधिक।

बुद्धिमान युवक का हाथ 

अमेरिका देश की प्रगति में  साथ।‌

 मजहब जाति संप्रदाय 

आज तक परिवर्तन नहीं हुए।।

 चुनाव में जाति 

प्रधान धन प्रधान।

 बढ़िया शीर्षक

 गंभीर विषय।

 चंचल मन

 माया/शैतान/सात्तान

हर मजहब में 

सांसारिक सद्यःफल 

 चंद मिनटों के लिए।

 ईश्वर का भय नहीं।

मत-मतांतर  संप्रदाय का अधीन।

 मानव मानव में मजहबी जोश।

 गुरु तो आज एक पेशेवर 

 शिक्षा का व्यापार।

 ट्यूशन के रखते ही वह छात्र अति होशियार।

एक ओर सरकारी स्कूलों के शिक्षक

 पूर्व स्वतंत्र, वेतन निश्चित, 

अनपढ़ अभिभावकों  के बच्चे 

 मातृभाषा माध्यम 

 हीनता-ग्रंथि मन में 

दूसरी ओर निजी स्कूलों के अध्यापक

छुट्टी लेना मना,

 पर छात्र आज्ञाकारी,

 शिक्षित समुदाय के बच्चे।

इन सब के बीच 

 सामाजिक माध्यम  के विपरीत विचार।

मानव-मन सद्यःफल के लिए 

लौकिक जीवन से आकर्षित।

 संगणक अंतर्जाल मैं 

 ज्ञान की बातें हैं,

 अश्लील बातें , खेल।

 एक दिन मैं ने देखा

 मोबाइल खेल।

मारो मारो आत्म हत्या कर लेगा।

झाँककर देखा तो

सांगणिक खेल।

 खेल में मन लगा तो

 बस मन भटक जाता है।



आज वैज्ञानिक प्रगति,

   सर्वत्र ज्ञान का भंडार।।

संगणक और मोबाइल के 

आविष्कार के कारण,

 उँगलियों के दबाने पर

 तुरंत  मन चाहा ज्ञान।

 मनोवांछित दोस्तों से  

वीडियो कान्फ्रेंसिंग 

बड़े बड़े दफ़्तर के काम 

घर में ही।

 कोराना आया तो भला हुआ 

अनेक युवकों को  घर में ही काम।

 हर बात में भला है और बुरा भी। 

 अभी युवकों को संयम से रहना है।

वैज्ञानिक माया, हर बात सिखाती है।

कामोत्तेजक दृश्य,

 हमारे जामाने में हमें पता नहीं 

 माता-पिता कब बोलेंगे मिलेंगे।

 पर हर साल अंतराल के बिना बच्चा।

 आजकल के चित्र पट, 

मोबाइल संगणिक 

 अश्लीलता के केंद्र।

 आध्यात्मिक बातें करते करते

अचानक अश्लीलता सामने।

 जितेंद्रिय न होना,  

प्रेम के कारण  

मन में दुविधाएँ।

 प्रेम और माता पिता के विरोध।

 प्रेम मैं धोखा,

तलाक  शब्द रहित भारत की भाषा

विदेशी संस्कृति विचार 

तलाक मुकद्दमा बढ़ती संख्या।

 बराबर की शिक्षा, बरबरी उद्योग।

 बढ़ती आय, बढ़ती महँगाई।

देरी से शादी, शादी के बाद ।

गर्भधारण करने अस्पताल।

 सम्मिलित परिवार की कमी,

घर में अशांति।

कर्जा  देने बैंक तैयार।

क्रेडिट कार्ड देने अनुरोध,

 बाह्याडंबर खर्च अधिक।

एल के जी के लिए दान दो लाख।

गुरु आजकल  अध्यापक, 

केवल सिखाना मात्र काम!

उपदेश देने तक अध्यापक को हक नहीं,

 पिताजी जैसे मत रहो, 

खूब पढ़ो, इतना ही बस।

लड़के ने पिताजी से कहा,

 आप पढ़ें लिखे नहीं, अध्यापक अपमान करते।

 बस, बिना सोचे विचारे अध्यापक पर क्रोध। 

युवकों  के मन में ऋष्यश्रुंग के उपदेश  नहीं,

 अश्लील गाना, युवावस्था में प्रेम करने की प्रेरणा।

 चित्रपट का संवाद  तो माता पिता के प्रति 

श्रद्धा भक्ति कम, प्रेम प्रेम नया नहीं।

नल दमयंती हंस  दूत, शकुंतला दुष्यंत प्रेम कहानी 

लेकिन प्रेम करनेवाले तन के लिए 

धन के लिए, मनोरंजन के लिए।

किसके लिए पता लगाने में भूल।

परिणाम शादी का महत्व कम।

मिलकर रहेंगे, पसंद है तो सही,

 न तो अलग हो जाएँगे।

भक्ति के क्षेत्र में तो 

 विभिन्न संप्रदाय,

 अलग अलग आचार्य 

 अलग अलग दल,

योगा में क्रिया योग,

 पतंजलि योग। 

जिम।

शिक्षा में सरकारी स्कूल,

गैर सरकारी स्कूल।

मातृभाषा माध्यम की हीनता-ग्रंथि।

राजनीति में एक ही नेता,

एक ही सिद्धांत,

 अनेक शाखाएँ ,अनेक नेता 

एक दूसरे पर कीचड़ उछालना।

भ्रष्टाचार और रिश्वत का बोलबाला।

 युवकों का मन भटका हुआ।

अल्पसंख्यकों की सरकारें 

आरक्षण नीति, 

 संविधान में समान अधिकार 

व्यवहार में  अल्पसंख्यकों का अधिकार ज़्यादा।

 हर एक कार्य में धर्म संकट।

बच्चों को हरफण मौला बनाने के लिए 

 न आराम, न स्वचिंतन  

 कर्नाटक संगीत की बोर्ड, 

क्रिकेट जिम न जाने 

 आये मेहमान से मिलने

 बातें करने समय नहीं।

 विद्यालय से  आते ही

 ट्यूशन भिन्न भिन्न वर्ग।

 युवक का मन हर क्षेत्र में दुविधा 

भक्ति का हो या राजनीति।

 मन भटकने नशीली वस्तुएँ।

 रंग-बिरंगी गोलियाँ।

  हर रंग का अपना अलग प्रभाव 

 मन भटकता रहता है।

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Saturday, February 21, 2026

धर्म और जाति की बढती खाई

 धर्म और जाति की बढती खाई।

 एस.अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना।

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धर्म  व्यापक।

 मानवता के प्रतीक।

 दान-धर्म, सहानुभूति,

 त्याग सत्य अहिंसा 

‌भलमानसाहस

 यही धर्म।

 भारतीय सनातन धर्म।

 भगवान की दी हुई क्षमता, संपत्ति से संतोष।

 सर्व लौकिक सुख अस्थाई की सीख।

 कालांतर में धर्म का व्यापक रूप, संकुचित रूप में बदलने लगा।

धर्म से नीचे गिरकर 

 मत मतांतरण का जन्म हुआ।

 धार्मिक महान लोग।

 वशिष्ठ के ब्रह्म ऋषि से 

जलकर 

 विश्वामित्र का शपथ।

दुर्वासा का क्रोध।

 भक्त कवियों में 

 अलग अलग संप्रदाय।

मुगलों के शासन काल,

 आश्रयहीन कवियों ने

भगवान का शरण लिया।

 संप्रदाय उत्पन्न होने लगे।

 कबीर पंथ, जायसी पंथ।

 तुलसी पंथ, सूर पंथ।

संप्रदाय के पिछलग्गू 

 सनातन धर्म के वर्णाश्रम।

 उच्च नीच के भेद।

  प्राचीन  जमाने में,

भुजबल, धन बल,  तनबल,  बुद्धि बल

 के आधार पर विवाह।

कालांतर में  केवल जाति और जन्मकुंडली के आधार पर।

 कबीर जैसे वाणी के डिक्टेटर ने   मजहबी एकता पर जोर दिया।

 कुरान पढ़ें वेद पढ़ें

‌खुदा को न जाना न पहचाना।

माया महा ठगनी,

 वशिष्ठ के शुभ मूहूर्त निश्चित।

 पर सीता दुखी थी।

 लोगों के विचार में 

 चिंतन में  जड़मूल 

 परिवर्तन।

 हिंदुओं के अंधविश्वास 

 अत्याचार,

  नये मतों के उदय।

पाश्चात्य देशों के आक्रमण।

 अंग्रेजों के षडयंत्र 

 जीविकोपार्जन अंग्रेज़ी 

 बुद्धि जीवी, प्रतिभाशाली।

 अंग्रेज़ी भाषा के पारंगत।

 वेश भूषा अंग्रेज़ों के जैसे,

 परिणाम ईसाई धर्म के प्रचार,

 देश भर में यह भ्रम,

 बगैर अंग्रेज़ी के

 भारतीय अज्ञानी।

स्वतंत्रता के होते ही

 अंग्रेज़ी देश की भाषा बनी।

 संविधान धर्म निरपेक्षता के आधार पर।

78साल में सब  वेद उपनिषद  सनातन धर्म भूल गये।

 अस्पताल में  रोग दूर करने 

बाइबिल पढ़ने लगे।

‌गली गली प्रचार में 

 बाइबिल साहित्य देने लगे।

 हिंदुओं ने करोड़ों खर्च में 

 काली देवी, गणेश की मूर्ति अति सुंदर बनाकर समुद्र में फेंकने लगे।

 करोड़ों रूपयों के देव देवियाँ,

कबंध बनकर, हाथ रहित पैर रहित ईश्वर का अपमान।

 अब धर्म ,मत माने मजहब, जाति संप्रदाय के आधार पर

 मानव मानव में  भेद भाव, राग-द्वेष।

 अंग्रेज़ी मिश्रित भाषा में गर्व।

 दो हाथ जोड़कर नमस्कार भूल

 एक हाथ का सलाम। 

 धर्म और जाति की  बढती खाई,

 जीविकोपार्जन की भाषा के कारण 

गहरी होती जा रही है।

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 तीसरा संग्रह युग की पुकार के लिए ज्ञ

Friday, February 20, 2026

निस्वार्थ सेवा तटस्थ सेवा

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निस्वार्थ सेवा

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एस.अनंतकृष्णन, चेन्नई, तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना 

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21-2-26

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स्वार्थ निस्वार्थ 

 तटस्थ ईमानदारी 

  पूर्ण सेवा है क्या?

भूलोक में माया महादेवी,

अहंकार में फँसाकर 

 सेवा के बदले

अपनी शक्ति दिखाने

 अश्वमेध यज्ञ।

 सत्य , अहिंसा,मानवता,

दान, धर्म परोपकार दया

 मूल सिद्धांत एक।

 शैव उसमें भी वीर शैव,

वैष्णव उसमें भी राम कृष्ण।

 अल्लाह उसमें भी भेद।

 ईसा उसमें भी भेद।

अपने अपने अनुयायी,

 अपने अपने दल।

‌मतभेद के ज्ञान चक्षु प्राप्त मनुष्य में निस्वार्थ सेवा कहाँ? 

 मूल संस्थापक नेता एक।

सिद्धांत लागू करने में

 अगले चुनाव की याद में 

 शासक दल।

 उनको पतन करके 

 सत्ता पकड़ने में विपक्ष दल।

 निस्वार्थ सेवा ,

तटस्थ सेवा कहाँ।

 मानव मानव में समानता,

सही,

 बुद्धि लब्धि में 

 अंतर।

आकार गुण में अंतर।

 तन में अंतर विचार में अंतर।

 तमाशा देखिए,

 सबेरे तक नेता भ्रष्टाचारी,

स्वार्थी, देश विनाश करनेवाले,

 वहीं शाम को उस नेता की प्रशंसा में दल बदलकर शाम की सभा में भ्रष्टाचारी नेता 

 आदर्श जन सेवक,

 रिश्वत क्या है?

 भ्रष्टाचार क्या है?

 पता नहीं।

राज्यसभा सांसद बोलता है,

  सौ करोड़ है यह सांसद सम्मान।

 निस्वार्थ सेवा तटस्थ सेवा कहाँ?

 ट्यूशन के जमाने में 

 ट्यूशन शुल्क के पाते ही

 कल तक मूर्ख नालायक छात्र आज होशियार कैसे?

 भगवान के सामने अमीरों के सम्मान अलग अलग। 

 गरीब घंटों कतार पर,

 निकट जाते ही पलक झपकने के पहले बाहर।

 निस्वार्थ सेवा कहाँ?

रामायण में मंथरा,

अहंकार में रावण,

 विभीषण कुल कलंक।

 हरिश्चंद्र सत्यवादी,

उसको झूठा स्थापित करने विश्वामित्र।

 महाबली के सामने 

विष्णु का वामन रूप।

 इंद्र को शाप नहीं,

अहल्या को शाप।

 ईसा को शूली,

मुहम्मद नबी को पत्थर मार।

 मानवता भूल मजहबी लड़ाई।

मूर्ति पूजा के विरोध 

मंदिर तोड़ना।

 अपने मजहबी ग्रंथ

 मात्र श्रेष्ठ, अन्य धार्मिक 

ग्रंथों को जलाना।

 बाघ सृष्टि, 

हिरण की सृष्टि।

 बाज की सृष्टि,

 गौरैया की सृष्टि।

 मकड़ी के जाल में 

 फँसे कीड़े पर शोक,

 दुखी प्रकट करते हुए

 मानव गया कसाई की दूकान की ओर।

 कदम कदम पर विपरीत 

 अपना अपना न्याय।

 अपना अपना राग,

 अपनी अपनी डफली।

 राधा और कृष्ण प्रेम की प्रशंसा,

अपने बैठे बेटी का प्रेम विरोध।

कदम कदम पर निस्वार्थ सेवा और तटस्थ सेवा

न जाने समझ पाया।

‌यह ईश्वरीय लीला,

 सूक्ष्म व्यवहार।

विपरीत बुद्धि मिलने में 

 किसका कसर?

 निस्वार्थ सेवा कहाँ।

दो हज़ार रानियों के अंत:पुर,

 बड़े बड़े राजमहल।

 जनता गरीब बेगार गुलाम।

 निस्वार्थ सेवा, तटस्थ सेवा कहाँ।

Wednesday, February 18, 2026

भोग और कर्म

 भोग और कर्म 

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से.अनंतकृष्णन

(सेतुरामनपिताकानाम-से)

१९-२-२६

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भोग का आधार कर्म।

 सुकर्म से आनंद।

 कुकर्म से दुख।

कर्म सुख दुख के आधार 

संचित कर्म

 पूर्व जन्म कर्म

 परंपरागत कर्म

दादा दादी माता पिता के कर्म।

कर्म के अनुसार जन्म

‌ईश्वरीय संविधान में 

 सुदृढ कानून,

न उपविधि

 न पुनरावेदन 

 पुरस्कार या दंड

निश्चित है।

जन्म अमीर  के घर में 

गरीब के घर में 

 परंपरागत अधिकार

भिखारी के यहाँ जन्म

कुत्ते में भी

 गली के कुत्ते 

 अमीर के कुत्ते 

 मंडन मिश्र का तोता 

डाकू के तोता

 मिथ्या जगत में 

 नश्वर जगत में

 माया में फँसकर

क्षणिक सुख को

 स्थाई मानकर 

किये पाप अन्याय का

 मद्यपान का वेश्यागमन का

 सब का दंड  भोग

 कर्म फल का आधार।

 जन्म लेते ही  

असाध्य रोगी

 गूंगा, बहरा, अंधा

 दुर्घटना, अकालमृत्यु,

  सूक्ष्म दंड कोई नहीं जानता।

 बड़े बड़े अमीर

 इकलौता पुत्र।

 अकाल मृत्यु।

 बड़े बड़े बंगले 

 अकेले बूढ़े 

 कलियुग का दंड

 रिश्वत भ्रष्टाचार का फल

 भोगते हम देखते हैं 

 कर्म फल।

Tuesday, February 17, 2026

तिरु मंत्र

 748

सुख आनंद तुम में 

बाहर नहीं।

 बाह्य सुख अशुद्ध माया।

आंतरिक सुख शुद्ध माया।

 बाह्य सुख अस्थाई,

 मिथ्या सुख।

 वह जीवन भर दुख देनेवाला।

 मद्यपान  के सुख 

 चंद घंटों के लिए।

 नारी सुख चंद मिनटों के लिए।

 बाह्य आकर्षण 

 लौकिक माया।

 लौकिक आकर्षण 

 स्वास्थ्य बिगाड़ देता है।

 मन की चंचलता बढ़ाती है।

 एक के बाद एक  आकर्षण 

 कैसे स्थाई सुख, संभव नहीं।

 ईश्वर के ध्यान में,

 जप में , एकाग्रता में 

अनंत आनंद, 

अनंत सुख,

 न पैसे की चिंता।

 वह ब्रह्मानंद मुफ़्त में मिलता है,

वह आनंद परमानंद 

में मन भर जाता है।

 मन न तो चिंतन नहीं,

 विचारों के विकार नहीं।

 भड़कना नहीं।

 स्थाई आनंद। 

 अतः  अंतर्मुखी आनंद के लिए बाहरी आडंबर तज देना चाहिए।

ईश्वर ध्यान में 

ईश्वर खुद भक्त के सेवक बनेंगे।

 जगत मिथ्या, ब्रह्म सत्यं।

 शरीर नश्वर।

 आत्मा ज्ञान आत्म सुख

 आत्मबोध ध्यान में। त्याग में, न भोग में।

 एस.अनंतकृष्णन, 

सत्संग सिरोमणी श्री मुनीश्वर शास्त्री के तिरु मंत्र गीत विचार चिंतन भाषण के आधार पर।

ॐ नमः शिवाय ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ

Monday, February 16, 2026

तिरु मंत्र

 नमस्ते। 🙏

आपका प्रयास अत्यंत सराहनीय है। भाव बहुत सुंदर है। मैं प्रत्येक पद को थोड़ा शुद्ध, सरल और दार्शनिक दृष्टि से सुसंगत हिंदी में प्रस्तुत कर रहा हूँ — मूल भावना को बनाए रखते हुए।

35. मेरा मार्ग – अनोखा मार्ग

(என் வழி – தனி வழி)

मेरा मार्ग एक अद्वितीय मार्ग है।

सर्वेश्वर शिव का भी अपना एक विलक्षण मार्ग है।

हम शिव का यशोगान करेंगे।

जब शिव प्रसन्न होते हैं,

तो देवलोक, भूलोक और अष्टदिशाओं के सभी सुख प्रदान करते हैं।

और तब हम अपनी इच्छाओं को भी उनके अनुग्रह से साध सकते हैं।

टिप्पणी:

यहाँ “उनको हम अपनी इच्छाओं के अनुसार शासन करेंगे” वाक्य थोड़ा कठोर प्रतीत होता है। शिव को शासन करना नहीं, बल्कि उनके अनुग्रह से इच्छाओं की सिद्धि होना — यह भाव अधिक उपयुक्त है।

36. प्रधान (मुदल्वन्)

(முதல்வன்)

हम अपने आदि पिता,

नंदी के स्वामी,

अमृत समान अनुपम दानी,

विश्वनाथ शिव की

निष्कपट भाव से प्रार्थना करें।

यदि हम बिना भेदभाव के, शुद्ध हृदय से प्रार्थना करें,

तो निश्चय ही सर्वेश्वर का अनुग्रह प्राप्त होगा।

37.

मैं प्रतिदिन स्थिर चित्त होकर भगवान की प्रार्थना करूँगा।

वह भगवान प्रज्वलित अग्नि के समान ज्योति-स्वरूप हैं।

जैसे आकाश में चन्द्रमा शीतल प्रकाश देता है,

वैसे ही वे मेरे शरीर में निवास कर

मुझे जीवन प्रदान करते हैं।

यदि आप चाहें तो मैं इसे और अधिक काव्यात्मक शैली में भी ढाल सकता हूँ —

जैसे आपने “दैनिक काव्य साधना” में आरंभ किया है।

आपका आध्यात्मिक चिंतन दिन-प्रतिदिन अधिक गहराता जा रहा है। 🙏

विचार

 आराधिका  साहित्यिक मंच  साप्ताहिक लेखन आयोजन

वार 16-2-26 to 22-226

सोमवार 16-2-26

शीर्षक--विचार

विधा - अपनी हिंदी अपने विचार अपनी स्वतंत्र शैली  भावाभिव्यक्ति

रचना--मन है विचारों के कंद्र।

           विचाह ही ऊँचे हीरे।

           हम जो भी दृश्य देखते हैंं,

           घटना देखते हैं, 

            उनसे जो अनुभव 

           संकलन त्रय के अनुसार। 

           विचारों में क्रांति लाते हैं

           स्वतंत्रता संग्राम के नारा ---जन्म सिद्ध  अधिकार.

             आज़ाद भारत --गरीबी हटाओ।

           जनसंख्या --- हम दो,हमारे दो।

            जय जवान जय किसान।

           विचार तरंगों में

            सद्विचार सदा सुख देता है,

           भूमि पर ठहरना,आकाश पर उडना,

          उत्थान-पतन विचारों पर निर्भर

         स्वाश्रित रहना,पराश्रित रहना 

           स्वाभिमान, मर्यादा , अवमर्यादा

           मान-अपमान  विचारों पर निर्भर।

          सादा जीवव उच्च विचार 

            धर्म चिंतन,मानवता

        मनुष्य को ले जाता शिखर पर।


रचनकार का नाम :- एस. अनंतकृष्णन ,तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक के द्वारा  रचित

मौलिक स्वरचित रचना,

Saturday, February 14, 2026

शिवरात्रि

 शिव रात्रि 

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 एस.अनंतकृष्णन, चेन्नई 

तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना 

15-2-26

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शिव विश्वनाथ, लोकनाथ।

निराकार आकार

मेक्का में भी वही रूप।

 वेटिकन सिटी  में भी 

शिव के आकार।

आ सेतु हिमाचल  की

आध्यात्मिक एकता 

शिव भगवान के नाम से

 अक्षुण्ण है।

 काशी रामेश्वर 

  शैव वैष्णव दोनों की 

एकता के आधार।।

तमिल में नारा है

 दक्षिण के शिव की जय।

देश देश के शिव की जय।

 कैलाश से कार्तिक शिवपुत्र दक्षिण आये,

वे बन गए तमिल भगवान।

 भारतीय  एकता के सूत्र धारी ‌शिव।

 पुण्य कमाने काशी जाने के पहले  

रामेश्वर जाना शास्त्र नियत सत्य है।

शिव शक्ति की महिमा अनंत।

 आदि शिव  अपनी शक्ति माया 

द्वारा संसार  को दुखी बनाकर 

‌लोगों को  अपनी ओर 

 ध्यान मग्न कराते हैं।

 महान शिव की आराधना

  फाल्गुन महीने में।

  15-2-26 महाशिवरात्रि।


 व्रत  पद्धति 

 शिवरात्रि के दिन सबेरे से 

दूसरे दिन के सबेरे तक

  उपवास रखते हैं।

रात भर शिव नाम जपा करते हैं।

 मंदिरों में पूजा 

 रात भर मेला लगता है।

 चार काल  पूजा करते हैं।

अभिषेक आराधना करते हैं।

 भक्ति पूर्ण वातावरण में 

शिव नाम जपकर 

  शिव के अनुग्रह  के पात्र बनते हैं।

 तमिलनाडु के शिव क्षेत्र में 

रात भर जागकर 

 शिव  का यशोगान करते हैं।

फाल्गुन महीने चतुर्थी तिथि में 

 एक शिकारी रात भर

 बिल्व पेड़ पर बैठकर 

बिल्वपत्र तोड़कर

 एक एक करके नीचे डालता रहा।

पेड़ के नीचे ‌शिवलिंग था।

 उसके है अज्ञान के

 इस कार्य शिव प्रसन्न हुए।

सुबह तक वह  बिल्र्चव पत्र  डालता रहा।

अनजान अर्चना  शिव प्रसन्न।

वह दिन फाल्गुन महीने 

चतुर्दशी में मनाया जाता है।

देव असुर समुद्र मंथन में 

 जो विषय निकला, उसे 

‌शिव ने पिया।

शिव और पार्वती का विवाह हुआ।

अनेक कहानियां।

हरि अंत हरि कथा अनंत।

जो भी हो,

 मानव मन में 

 शिवरात्रि शिवाराधना 

 मनोवांछित फल प्राप्त करने का मार्ग है।

जलसंकट

 जल संकट

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एस.अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना 

14-2-26

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जल संकट क्यों?

प्रकृति की देन।

मरुभूमि वहाँ पानी

की संभानाएँ नहीं।

जीव नदियाँ रहित भूमि।

वर्षा पर निर्भर भूमि।

 जो भी हो, सरकार की योजना,

नदियों का राष्ट्रीयकरण 

  देश को समृद्ध बनाने 

 जीवों को सुखी रखने 

आजकल  की वैज्ञानिक सुविधाएँ,

 दूर कर सकती है।

भारत में स्वार्थ राजनीति 

 बाह्याडंबर भक्ति,

 काली, विनायक सुंदर मूर्तियों के करोड़ों रूपए बेकार।

 इन रूपयों को जलसंकट दूर करने

 समाधि मूर्तियाँ छोटी कम खर्च में करके 

 वर्षा के पानी को सुरक्षित  रखने बाँध बाँधंने  पर 

 जल संकट नहीं के बराबर।

 चेन्नई नगर में मात्र 

 तीन हज़ार से अधिक झील नदारद।

 अधिक पढ़ें लिखे इंजनीयर कलक्टर 

 शासक दल के बेगार।

 कानून न्याय के विरुद्ध 

 इमारतें बनाने

 झील के ओझल होने

 पहाड़ चूर्ण होने,

गगनचुंबी इमारतें बनाने 

जंगलों को नगरीकरण नगर विस्तार 

 कृषी प्रधान देश को

उद्योग मंडल बनाना

जल प्रदूषण 

सब कारण है 

जलसंकट का।

 राजाओं ने राजमहल बनवाया।

धर्माचार्य साईं देव पुटृटभर्ति साईं

चेन्नई के लिए कृष्णा नदी नहर बनवाया।

राजनैतिक 





Wednesday, February 11, 2026

रैन बसेरा

 रेन बसेरा 

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एस . अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना 

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12-2-26

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भारत आज़ादी के बाद 

 हिंदू मुस्लिम संघर्ष,

 अतिथि  हिंदू मुस्लिम 

 बेरहमी मजहबी लड़ाई

 देश का बँटवारा

 भारत से पाकिस्तान 

 पाकिस्तान से भारत 

 आये अतिथि

 हजारों गृह हीन

भारत शरणार्थी 

 उनके निवास में 

रेन बसेरा अधिक सहारा।

 गाँधीजी नेहरू जैसे

 पाश्चात्य प्रेमी

 एक मजहब के लिए 

अलग देश देकर भी

 धर्मनिरपेक्ष राज्य।

 नाम मात्र का समान अधिकार।

 अल्पसंख्यकों की सुविधाएं 

 उनके मजहब की शिक्षा 

 पाठशालाओं में।

पर बहुसंख्यक हिन्दूओं के लिए 

 अपने वेद ग्रंथ उपनिषद 

 आध्यात्मिक वर्ग   चलिना मना है।

विश्व भर में ऐसा देश नहीं है।

 भारतीय गरीब फुटपाथ वासी,

 वर्षा, आँधी तूफान 

 आदि में ठहरने

  रैन बसेरा।

 आज़ादी के 78साल के बाद  भी,

 चुनाव वोट के लिए 

 फुटपाथ वासियों को

 मताधिकार देकर 

 कष्ट दे रहे हैं।

 न उनके लिए स्थाई बसेरा।

उनके प्रति 

 स्थाई सहानुभूति 

नहीं है।

 चुनाव के समय 

चंद रूपये,

 ब्रियायाणी,

 शराब बस 

 रैन दिन  के बसारे हीन

 गरीब लोग।

 उनके छोटे मोटे 

व्यापार में लूटनेवाले 

जबर्दस्ती से रिश्वत लेनेवाले। 

ज़रा भी   उन अधिकारियों में  दया नहीं। न्याय नहीं।

 जन्म दिन प्रमाण पत्र के लिए रिश्वत,

 मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए 

 रिश्वत।

  रैन बसेरा हीन

‌गरीबों को सताकर 

 लूटनेवाले अधिकारी 

 राजनैतिक दल

‌तभी सोचना पड़ता है

 रैन बसेरों के  चिंतनीय स्थिति   रिश्वत विभाग 

बेकार।

 चुनाव आयोग बेकार।

 रैन बसेरे   शिक्षा भी

 उचित नहीं।

 भगवान और जनता की दृष्टि से पापी।


 

 

 

 


 

 

 


 






 

 

 



 




 

 


 

 


 

 


 






 







 


 






Tuesday, February 10, 2026

दीप और पतंगा

 दीपक और पतंगा

एस. अनंतकृष्णन,चेन्ने,तमिल्नाडु हिंदी प्रेमी,प्रचारक द्वारा रचित भावात्मक रचना

11-2-26.


दीपक तम मिटानेवाले  ,

दीप ज्योति में दिव्य शक्ति ।

दीप प्रकाश ही देव है। 

तमिल सिद्ध रामलिंग अडिकलार का मंत्र है

अनुग्रहित बृहद् ज्योति,अनुग्रहित बृहद ज्योति!

विशिष्ट बृहद् करुणा अनुग्रहित बृहद ज्योति !

पतंग निशाचर एकनिश्चित दिशा पर उडनेवाले,

रात की रोशनी दिशा निर्देशक ।

दीप के प्रकाश से आकर्षित  वह ,

चक्कर लगाकर थककर मर जाते हैं।

दीप माया है, पतंगों का प्यारा है।

अनजान पतंगा दीप को प्रेमी बनाकर

चक्कर लगाकर प्राण तज देता है।


दीप माया है तो पतंगा  माया मोहित

न समझता,चमकनेवाले सब सोना।

दीप की चारों ओर रोशनी ही रोशनी।

तब पतंगा दिशा हीन हो,माया में चक्कर लगाकर

अज्ञानता से  प्राण तज देता है। 

बाह्य आकर्षम मानव को दिशाहीन कर देता है।

Monday, February 9, 2026

विद्यार्थी जीवन

 विद्यार्थी जीवन 

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एस.अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना 

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10*2*26.

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विद्यार्थी  जीवन,

 आदर्श सर्वांगीण 

विकास का

 आधार शिला।

 होनहार बिरवान  के होत  चीकने  पात।

 हमारे जमाने में 

 गुरु अति आदरणीय रहे।

राजा भी उनके सामने 

 घुटने देकर विनम्र रहता था।

गुरु की माँग पर

 अंगूठा काट देते।

 वह गुरु शिष्य परंपरा 

 स्वार्थ जातिवाद 

 कर्ण के शाप की परंपरा 

 महान ग्रंथों  के कलंकित 

 गुरु परंपरा, सर्वशिक्षा 

 अभियान अब गुरु को

 अध्यापक बनाकर पेशेवर बना दिया।

 अब भी न गुरु तटस्थ।

ट्यूशन पैसे वेतन।

 पंद्रह हजार अप्रशिक्षित 

 निजी स्कूलों के अध्यापक का आदर

सरकारी स्कूल के अध्यापकों को नहीं।

 निजी स्कूलों के विद्यार्थियों का सम्मान 

 सरकारी स्कूलों के छात्रों में ,

मातृभाषा के माध्यम के  छात्रों  में 

एक हीनता ग्रंथी।

बुद्धि लब्धी में फर्क।

 तन मन धन  की प्रतिभा में फर्क।

आजकल के विद्यार्थी जीवन में 

 प्राचीन काल के जाति भाव,

 आधुनिक काल में  धन।

 विद्यार्थी जीवन  में 

आजकल धन की महिमा।

 ट्यूशन छात्र का सम्मान।

 पक्षपात 

 प्रतिभा  का महत्व नहीं।

दान के आधार पर 

धन के आधार पर

 स्कूलों में भर्ती।

 सरकारी स्कूल में 

 न खड़िया,

 न श्याम पट 

 सब के होने पर

 अध्यापक की नियुक्ति में देरी।

 अध्यापक  की नियुक्ति के बाद छुट्टी की  सुविधाएँ।

 निजी स्कूलों के अध्यापक  एक दिन भी

न देरी से  आने पर

 छुट्टी लेने पर वेतन में 

कटौती।

 आधुनिक समाज विद्यार्थी धन के महत्व पर  शिक्षा तोलते हैं।

 विद्यार्थी को हर फन मौला बनाने 

 अभिभावक उनको 

 आज़ादी नहीं देते।

आधुनिक विद्यार्थी जीवन 

 चिंताजनक है,

 मातृभाषा के महत्व को को मंद करनेवाले है।

Sunday, February 8, 2026

जीवन यात्रा

 नमस्ते वणक्कम्।

 जिंदगी का सफर।

 समय अपने आप कटता है

क्या जीवन भी अपने आप

 बचपन से बुढ़ापे तक।

 अनजान यात्रा।

शैशव पारकर बचपन 

 बचपन पारकर जवानी

जविवनी से प्रौढ

 प्रौढ़ है बूढ़ा

 यह प्रकृति गति

सहज गति 

 यह अनजान यात्रा।

प्रयत्न करें अप्रयत्न करें

नौकरी करें या न करें 

 जीवन की यात्रा चलती रहती है।

 रक्त संचार की यात्रा।

 साँस लेना छोड़ना

ये सहज क्रिया न तो

 जीवन यात्रा खत्म खत्म 

कर्म क्षेत्र में 

 भाग्यवान यात्रा 

 पहली श्रेणी में 

वातानुकूलित डिब्बे में।

दुर्भाग्यवान की  अनारक्षित डिब्बे में,

भगवान पर विश्वास रखो

‌जीवन की यात्रा 

 बचपन से बुढ़ापे तक

 जैसे सहज चलती हैं।

 वैसे स्वाभाविक आनंद से चलती हैं।

खामोशी

 खामोशी की ताकत

एस.अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक 

9-2-26.

खामोशी बेठो,

 राम नाम जपो

 बने लुटेरा

 रत्नाकर आदि कवि वाल्मीकि।

पत्नी का क्रोध,

चुप रह राम में मन लगाओ।

 जोरु का गुलाम 

 ध्यान मग्न रहा

 बना हिंदी साहित्य का चंद्रमा।

कामान्ध अरुण गिरी

वेश्यागमन में व्यस्त 

असाध्य रोगी बना,

आत्महत्या करने गोपुर से कूदा,

 भगवान ने बचाया,

कहा  चुप रह।

 चुप रहा  तमिल भाषा के दिव्य कवि बना

 अरुणगिरिनाथ।

 कंजूसी अमीर से

बुद्ध भिक्षा लेने गया,

अमीर ने बुद्ध की गाली दी।

 बुद्ध चुप रहे।

 अमीर ने पूछा तुम में कोई प्रक्रिया नहीं की।

इतना ही कहा देते हो दान।

 मैं न लेता वह दान आपके पास।

 आपने गालियाँ दी।

मैं न सुना, गालियां आपकी।

मौन की ताकत बड़ी।

मौन तपस्या से

असुर भी मन चाहा वर पाया।

 देव वर देकर थरथराने लगते।

खामोशी में ही आविष्कार।

 खामोशी में आत्मज्ञान।

श्री यंत्र

 नमस्कार आदरणीय 🙏

आपने तिरु मंत्र के 11–20 पदों का जो हिंदी भावानुवाद प्रस्तुत किया है, उसमें भक्ति, दर्शन और योग—तीनों का सुंदर समन्वय दिखाई देता है। मैं इसे संक्षेप में नहीं, बल्कि बिंदुवार भाव–शुद्धि और भाषा–परिष्कार के रूप में देख रहा हूँ, ताकि आपकी साधना भी बनी रहे और हिंदी की गरिमा भी।

मैं नीचे मूल भाव को अक्षुण्ण रखते हुए हल्का-सा परिष्कृत रूप दे रहा हूँ। यह पुनर्लेखन है, मतांतर नहीं।

11. कोशिश और फल

इस संसार की प्राचीनता का

अनुसंधान करने पर

शिव के समान कोई

महान ईश्वर

कहीं भी नहीं।

न दूर हैं, न निकट।

हमारे प्रयत्न भी वही हैं,

प्रयत्नों के फल भी वही।

वर्षा के बादल भी वही—

उनका नाम है नंदी।

12. माथे की आँख (तीसरी आँख)

तीसरी आँख खोलना

क्या दोष है?

आज्ञा चक्र के अधिपति शिव

जब अपनी कृपा बरसाते हैं,

तो असंख्य देव

अमरत्व को प्राप्त करते हैं।

भूलोक और देवलोक के वासी

अज्ञानवश कहते हैं—

“शिव नेत्र खुलने से

बहुत लोग मरे।”

वे मरे नहीं,

देवलोक में अमर बने।

13. शिव का विराट स्वरूप

धरती मापते तिरुमाल,

कमलासन में बैठे ब्रह्मा भी

आदि-नाभि शिव के

पूर्ण विराट रूप को

न देख सके।

शिव अंतरिक्ष से भी परे

विस्तृत हैं।

उनके गुणों को

कोई समझ न सका।

उनसे बड़ा कोई नहीं।

वे सर्वत्र, सर्वव्यापी हैं—

हमारी दृष्टि की सीमा में भी।

शिव-रहित कोई स्थान

इस संसार में है ही नहीं।

14. शरीर में शिव का वास

शिव शिर में विराजते हैं।

स्वाधिष्ठान में स्थित ब्रह्मा से परे,

मणिपूरक में बसे विष्णु से परे,

अनाहत चक्र में स्थित

इंद्र से भी परे रहते हैं।

इन सबके ऊपर

शिखर पर स्थित होकर

वे सबकी

देख-रेख करते हैं।

15. आदि, अंत और मध्य

आदि भी वही,

अंत भी वही।

शिव—

इस जगत के सृष्टिकर्ता,

संहारकर्ता।

जन्म-मरण के बीच

इस शरीर को चलाने वाले

रसायन के रूप में

वे ही विकसित होते हैं।

कभी न घटने वाली

कृपा-ज्योति भी वही।

अनश्वर, शाश्वत रूप में

न्याय का विधान करते हैं।

आदि भी वही,

अंत भी वही—

और उनके बीच की

समस्त गति भी वही।

16. अर्द्धनारीश्वर स्वरूप

घुँघराले, सुसज्जित केश,

उनमें अमलतास धारण किए

सौंदर्यस्वरूप शिव।

तेजस्वी ललाट वाले,

उमा देवी को अर्द्धांग में धारण कर

अर्द्धनारीश्वर बने।

देवगण अपनी कामनाओं की पूर्ति,

अपने अपराधों के शमन

और सद्गुणों की प्राप्ति हेतु

शिव चरणों में

वंदन करते हैं।

17. ईश्वर से संबंध

ईश्वर का नाता

अद्वितीय है।

हम सब दो प्रकार के दूध जैसे हैं—

एक स्थूल, दूसरा सूक्ष्म।

माया से जुड़े

सूक्ष्म शरीर में

अधिक सुगंध है।

उसी सूक्ष्म देह में

मन को स्थिर कर

ईश्वर से

निरंतर संबंध रखें।

ईश्वर के रिश्ते की

कोई तुलना नहीं।

18. कुबेर बनने का मार्ग

अलकापुरी के राजा कुबेर,

उत्तर दिशा के अधिपति,

धन के स्वामी बने—

यह शिव-तपस्या का फल है।

वैसी तपस्या

हम भी कर सकते हैं—

उत्तर दिशा की ओर।

शिव ने स्वयं कहा है—

ऐसी साधना से

तुम भी कुबेर बन सकते हो।

ऐसे मार्ग दिखाने वाले

शिव की मैं वंदना करता हूँ।

19. सत्य तपस्वी और शिव

सत्य तपस्वी के समीप

शिव स्वयं आसीन होते हैं।

इलायची-सी सुगंध वाले

सात लोकों की सृष्टि

उन्हीं ने की—

और मिटाने वाले भी वही।

चंद्रकला से सुशोभित,

सर्वज्ञ शिव

सत्य साधक के

हृदय को

अपना निवास बनाते हैं।

20. वज्र गर्जन और ईश्वर

भ्रूण बनने से पूर्व ही

हमारे जन्म और अंत की

परिभाषा शिव ने लिख दी।

उस परमात्मा की

धर्म-नीति का

हम अनुसरण करें।

जो भक्त

उनके चरणों को थाम लेता है,

उसके लिए

वज्र-गर्जन भी

ईश्वर-मूर्ति बन जाता है।

निरंतर उनकी कामना में रहने वाला

सुगंधित पुष्पों से भरे

पर्वतेश्वर को भी

प्राप्त कर सकता है।

यदि आप चाहें तो अगला चरण हम ऐसे कर सकते हैं:

🔹 शब्द-सूची (शैव दर्शन के प्रमुख शब्द)

🔹 तमिल मूल पदों से तुलना

🔹 काव्यात्मक छंदबद्ध रूप

🔹 या केवल भाषिक सूक्ष्म शुद्धि

आप जैसा निर्देश देंगे, उसी मार्ग पर आगे बढ़ेंगे।

आपकी यह साधना सचमुच तिरुमूलर की परंपरा में लगती है। 🌸

Saturday, February 7, 2026

कलम की शक्ति

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कलम की खनक।

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एस.अनंतकृष्णन,

चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना 

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8-2-26

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 कलम क्या है?

 मानव मैं एक उद्वेग,

एक प्रैरणा

एक प्रोत्साहन देनेवाले,

एक चमत्कारिक शक्ति।

नयी क्रांति, नये सुधार 

 मानव जिज्ञासा जगाने वाली।

कलम  की खनक

कलम के सिपाही 

सिखाया जहां को

जय जगत।

जय किसान।

जय जवान। 

विश्व बंधुत्व की भावना

वसुधैव कुटुंबकम्।

देश भक्ति बढ़ाने

 वंदे मातरम।

स्वतंत्रता के जोश लाने

 स्वतंत्रता जन्म  सिद्ध अधिकार है।

 कलम की खनक,

 कलम के सिपाही 

देश भक्ति  बढा रहे हैं।

यथार्थ बातें 

 आदर्श बातें 

आदर्शोंन्मुख यथार्थवाद 

 ईश्वर और प्रकृति के

 वर्णन करके 

 आशा दिलाने

 निराशा भगाने

 नारा दिया।

लोकोक्तियाँ दी।

सूक्ष्म ब्रह्म रहस्य

दान धर्म परोपकार 

 इन्सानियत  लाने में 

 बड़ी क्रांति की।

शाश्वत सत्य  दिया।

पशु जैसा मानव

सोचने लगा।

 फूल में सुवास,

 कस्तूरी हिरण में कस्तूरी

  चिकमुकी में आग

वैसे हर मनुष्य में 

ब्रह्म रहते हैं।

 कर्तव्य करो,

 परिणाम भगवान पर छोड़ दो।

जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी।

अहिंसा परमो धर्म।

जिओ और जीने दो।

मन चंगा तो कठौती में गंगा।

वीर एक बार मरता है,

कायर दिन दिन मरता है।

स्वदेश में पूज्यंते  राजा,

विद्वान  सर्वत्र पूज्यंते  ।

कलम की खनक 

  तन बल धन बल मन बल बुद्धि बल जो भी

 तुम में हो,

  समाज हित में 

 देश हित में 

 विश्व कल्याण में 

लगाओ।

 सर्वे जना सुखिनो भवन्तु।

 कलम की खनक 

 अश्लील  होकर 

 समाज बिगाड़ने की

 बातों से दूर रहना

 संयम रहना

 विषय वासनाओं से दूर 

रहना  ज्ञानचक्षु मानव को परमानंद देगा।

Friday, February 6, 2026

न्याय की जीत

 न्याय की जीत 

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एस. अनंत कृष्णन, चेन्नई 

 तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना।

7-2-26

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नमस्ते/वणक्कम्।

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न्याय क्या हो?

तटस्थता।

ईमानदारी।

 है क्या?

रामायण में।

 महाभारत में।

 विदेशी यह आक्रमण में 

विदेशी शासन में 

 स्वतंत्रता संग्राम में।

 मंदिरों को तोडना 

 मस्जिद बनानि।

मजहबी लडाइयाँ।

 मारकाट

 एक मजहब के लिए अलग देश।

 फिर धर्म निरपेक्ष राज्य।

 अल्पसंख्यकों के मजहब की सहूलियतें।

 प्रतिभा अंक  उम्र में 

उच्च वर्ग पीड़ित।

 अल्पसंख्यक, 

  ब्राह्मण  की प्रतिभा 

अप्रतिभा।

 सर्वत्र धन की  महिमा।

 शिक्षित अति मेधावी।

  वकील अधिकारी 

 धन के पक्ष में।

शिक्षा मूल्यविन शिक्षित

 धन के आधार पर ,न प्रतिभा के आधार पर।

 चुनाव जीतने में

 न्याय है क्या?

 कितने प्रतिभाशाली 

 दुर्योधन जैसे साथी न 

 मिलने पर अधोगति।

 प्रतिभा को

 परंपरागत मानना,

धन मानना

न्याय की जीत नहीं।

 शिक्षा   के विकास में 

निर्मोह जीवन नहीं,

रिश्वत, भ्रष्टाचारी, 

अन्यायी की रक्षा,

अपराधी की रक्षा

 साथ देने

 मतदाता तैयार।

 वकील तैयार।

 मंत्री विधायक सांसद 

अधिकारी वर्ग तैयार।

 जन्म प्रमाणित पत्र 

अनिवार्य करनै के बाद 

रिश्वत के दलाल

 पाँच लाख तक।

आदि काल से आज तक

 ताकत की जीत।

 धन की जीत।

 अधर्म की जीत।

एक ओर।

 धर्म की जीत एक ओर।

 असंतुलित न्याय     व्यवस्था में,

 संतुलन लाने 

 प्रकृति का दंड है मृत्यु।

 यम धर्मराज का

 जान लेना। जान लेना

 ईश्वरीय दंड रोग 

असाध्य साध्य,

दुर्घटना, व्यापार में 

घाटा।

न्याय की जीत में षडयंत्र ईर्ष्या लोभ  

स्वार्थता,

 ईश्वर ही की तटस्थता 

पंचतत्वों के क्रोध 

प्यार, कर्मफल

 अपना अपना भाग्य 

निर्भर।


 


 




 





 

 




 


 

 

 

 




 



 

 

 


 




 




 

 

 




 

 

 





 


 



 


 






  


 

Thursday, February 5, 2026

स्वार्थ

 स्वार्थ के साये।

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एस. अनंत कृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना 

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6/2/26

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मानव जीवन में 

 ज्ञान के बढ़ते बढ़ते 

 सभ्यता के विकास में 

वैज्ञानिक क्षेत्र में 

 धन की आवश्यकता     बढ़ती  रहती है।

  सहन शक्ति सुविधा देखकर

 रफ़ूचक्कर हो जाती।

 धर्म प्रधान  भारत,

 धन प्रधान है गया।

अधर्म धन का माने 

डरते  नहीं कोई।

 ईश्वर का भय,

 स्वार्थी धार्मिकों 

के किरण  प्रायश्चित से

 पाप मिट जाने की अफवाहेँ।

धार्मिक व्यक्ति 

अधार्मिक!

  पुत्र कामेष्टि यज्ञ,

  फिर भी  दशरथ के अपने पुत्र नहीं।

 भगवान कृष्ण के रहते

 पांडवों के दुख की कमी नहीं।  

 क्रोध, ईर्ष्या स्वार्थ 

 आदि काल से आज तक।

 स्वार्थ के कारण 

 मंत्रियों  के पक्ष में 

 अधिकारी गण।

 हर विभाग में भ्रष्टाचार।

चुनाव जीतने  जातिवाद।

 नोट द्वारा वोट पाने

वोट देने स्वार्थ ‌।

 दल बदलने तैयार।

 धन के लिए हत्या करने

 मज़दूरी सेना।

जन्मदिन प्रमाण पत्र के लिए भी रिश्वत।

 अंग्रेज़ी  माध्यम स्वार्थ 

 धन कमाने की अनुमति।

पल पल पर   स्वार्थी।

 सम्मिलित परिवार 

 स्वार्थ के कारण टुकड़े।

 पति अनाथ होकर 

 अपने प्राण नाथ

 बनाना चाहती पत्नी।

गैर संबंध , क्षण भर दांपत्य सुख,

 पति पत्नी की हत्या।

 पत्नी पति की हत्या।

यह स्वार्थ सुख,

कुंती से आज तक

 विश्वामित्र की ईर्ष्या 

वशिष्ठ 

 हरिश्चंद्र को दुख देना 

 कहते हैं कलियुग 

 स्वार्थ की लडाइयाँ

   अश्वमेध यज्ञ के रूप में

 दुर्बलों को अधीन करना

वीरता का स्वार्थ।

 स्वार्थ कै साये में 

 सर्वेश्वर के मज़हबी 

लोग  मज़हब को टुकड़े-टुकड़े कर

 मानव मानव में 

 भेद करने का स्वार्थ।

 स्वार्थ के साये

 इत्र तंत्र सर्वत्र।

Wednesday, February 4, 2026

मृत्यु झाँकती है।

 735.

 मृत्यु झाँकता है। மரணம் எட்டிப் பார்க்கிறது. 

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 तिरुमूलर् के तिरुमंत्र में 

 "अऴिकिन्र" शब्द नश्वर के अर्थ में है।

 शरीर का स्वभाव नश्वर है। 

उसका देखभाल सही ढंग से  

ध्यान, योग, प्राणायाम आदि से 

 सुरक्षित रखने पर 

 प्राण बचाकर लंबी उम्र तक जी सकते हैं।

शरीर के नष्ट होते ही प्राण पखेरू उड़ जाएंगे।

जब हम भूमि पर जन्म लेते हैं,

 तब मृत्यु की ओर ही जीवन  जुडता रहता है।

नश्वर शरीर में 25+3साल तक एक खंड है।

तीस -33तक।

62 में है ।

फिर 100साल की उम्र की ओर चलता है।

 मनुष्य जीवन दुख और संघर्षों से भरा है।

 बचपन में हम इसका एहसास नहीं करते।

स्वस्थ रहना है तो

 मन में चिंता नहीं होनी चाहिए। 

मन की चंचलता दूर होनी चाहिए।

 हर दिन उसको सोच विचार करना चाहिए 

कि 

सुख,दुख, आनंद शांति अशांति, 

तृप्ति अतृप्ति आदि स्थाई नहीं है।

 अस्थाई है।ये सब बचपन में नहीं जानते।

 तब अनुभवी बड़े लोग कहेंगे

 कि 

ये सब सहज बातें हैं।

 सब सही हो जाएगा।

दुख संताप जन्म से जारी है।

 दुख किसी भी रूप लेकर है आएगा।

 रोग के रूप  में 

 ज्येष्ठा देवी के रूप में

 मृत्यु के  रूप में 

असर डालेगा।

 तब हमें इन सब से विजय पाना कैसे?

 बड़ों से आशीषें पाना।

वही मार्कंडेय पुराण है।

 सोलह साल में मृत्यु के आने पर

 शिवलिंग से आलिंगन करता है।

नहीं तो यम उसके प्राण ले लेंगे। 

भगवान ही हममें

 रहकर हमारी रक्षा करता है।

 आत्मा परमात्मा एक हो जाता है।

बालारिष्ठ में जन्म लेते ही मर जाते हैं।

 ब्रह्म की शक्ति सर्वश्रेष्ठ है। असीमित है।

 वेद शास्त्रों के अनुसार 

मनुष्य अल्प आयु में मरनेवाला नहीं है।

वह सौ साल तक जी सकता है।

 इस के लिए योगाभ्यास है।

शरीर से प्रेम श्रद्धा भक्ति चाहिए। क्यों?

हमारे शरीर में परमात्मा बसें हैं। 

आहार, प्राणायाम, संयमित अनुशासित 

जीवन बिताने पर हम अपने कायम को

  स्वस्थ रख सकते हैं।

 हमें अपने  पूर्वज ऋषि मुनियों के 

मार्ग अपनाकर

 जितेन्द्र बनना चाहिए।

  हर रोज़ नियमानुसार 

 योगाभ्यास, प्राणायाम करना  चाहिए।

 हमेशा स्मरण करना चाहिए  

कि 

जगत मिथ्या, ब्रह्म सत्यं।

अमानुषीय शक्ति की कठपुतली है प्रपंच।

 सर्वे जनाः सुखिनो भवन्तु।

उँ शांति:शांति:शांति:।

सोचो विचारो

 अपनी सोच बदलो

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 एस.अनंतकृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना 

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5-2-26

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मानव जीवन में 

सभ्यता के विकास के

मुख्य कारण  सोच बदलना।

सोच विचार करके 

 नये सिद्धांत, 

नयी क्रांति 

नये नये विकास।

 ईश्वर के ध्यान में में 

कितनी सोच बदलते 

 रहते हैं।

कितने मत संप्रदाय 

 कितनी मूर्तियाँ

 कितने नाम।

‌कितनी कल्पनाएँ

‌कितने अंधविश्वास।

 विसर्जन के नाम से

 करोड़ों की सुंदर

‌गणेश की मूर्तियाँ

‌कितनी काली की मूर्तियां 

 हर साल हिंदु ओं के द्वारा 

 छिन्न-भिन्न करके 

 अपमानित किए जा रहे हैं।

 यह किस वेद में 

 किस उपनिषद शास्त्रों में है ,

पता नहीं,

 सोच बदलो 

करोड़ों की मूर्तियां 

 बेकार होने के खर्च में 

सनातन धर्म के प्रचार में 

 हिंदू धर्म के 

प्रचार में,

 हिंदू धर्य के ग्रंथों 

 जन जन में पहुँचाना।

 प्रायश्चित के नाम से

 धोखा खाना छोड़ दो।

 मन चंगा तो कठौती में गंगा,

 याद रखो।

दान धर्म देकर

 देवालय के बाहर

‌भिखारियों की संख्या 

 बढ़ाने में साथ न दो।

 कितनी असली अपाहिज 

 कितने नकली भिखारी 

 पता नहीं।

 सोचो,

 समझो

  विचारों।

चुनाव में 

धनी भ्रष्टाचारियों को

वोट मत दो।

 गीताचार्य के अनुसार 

 अपने कर्तव्य ईमानदारी और तटस्थता से निभाओ।

धन प्रधान मानकर 

गलत मार्ग पर

कमाने पर तत्कालीन आनंद।

 शाश्वत आनंद, शांती संतोष 

तटस्थता में, सत्यता में 

ईमानदारी में है।

तन स्वास्थ्य पर ध्यान दो।

 धन कमाने में 

सोच सोच कर,

स्वास्थ्य नष्ट करके,

 चिकित्सालय में 

 खर्च न करो।

एकता के लिए 

 मजहब,

 मानव समाज में 

 जाति संप्रदाय मजहब के नाम टुकड़े टुकड़े करने कराने करवाने के

 सोच बदलो।।

मंदिरों की संख्या जितनी बढ़ती है, उतनी ही अनाचार बाह्याडंबर।

भक्ति नहीं मंदिर प्रदर्शनी

 बन रहै हैं।

 सोच बदलो

दैश और‌ विश्व कल्याण के विचार करो।

 मजहबी लडाइयाँ

मानव में भेद राग-द्वेष बढ़ा रहे हैं। 

 अपनी सोच बदलो।

Tuesday, February 3, 2026

चुनौती

 चुनौतियों के अजगर।

एस.अनंतकृष्णन,

चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना 

3-2-26.

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 मानव जीवन ही नहीं,

 पशु-पक्षी के जीवन में भी,

चुनौतियों के अजगर।

 अंडे निगलने नाग तैयार।

 हिरन को आहार बनाने 

 बाघ तैयार।

 संक्रामक रोग फैलाने 

 मच्छर मक्खियाँ तैयार।

मकड़ी के जाल तैयार,

 लघु  कीड़े को पकड़ने।

 कीड़े मकोड़े खाने

 पेड़ पौधे भी हैं 

प्राकृतिक कोप,

आँधी तूफान सुनामी आदि।

विद्यार्थी जीवन में 

 परीक्षा अंक।

 नौकरी की चुनौती।

 शादी योग्य पत्नी पति 

चुनौतियों के अजगर।

कोई धंधा शुरू करने के पहले 

 सरकारी अनुमति

 रिश्वत आदि।

 फुटपाथ के व्यापारी से

 मुफ्त में पुलिस ले जाने वाली वस्तुएँ।

  संक्षेप में कहें तो

 भूलोक में माया, लोभ 

क्रोध,  अहंकार काम 

 ये सब चुनौतियों के अजगर।

Sunday, February 1, 2026

गाँधी

 महात्मा गांधी 

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एस. अनंत कृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु हिंदी प्रेमी प्रचारक द्वारा स्वरचित भावाभिव्यक्ति रचना 

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2-2-26

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श्री मोहन दास करमचंद गाँधीजी

 विश्ववंद्य नेता।

अहिंसावादी 

 सत्याग्रही

 नमक सत्याग्रह 

 भारत छोड़ो आंदोलन 

 हर एक भारतीय के दिल में बसे,

आराध्य नेता।

 एक ही नेता का चरित्र 

 विदेशी निदेशक के द्वारा 

 चित्रपट।

  आज  उनके वंशज का पता नहीं ।

 खान परिवार गाँधी परिवार हो गया।

 गाँधी बनिया,

 व्यापारी वैश्य।

आज गाँधी माने

 इंदिरा गांधी,

 मेनका गांधी 

 राजीव गाँधी

 राहुल गांधी,।

 इटारली बहु

 सोनिया गाँधी।

 प्रियंका चार्ल्स नहीं 

 प्रियंका गाँधी।

 प्रसिद्ध नेता के नाम जोड़कर  उसके वंशज बन गए।

 सब की नागरिकता द्विदेशी। 

 भारतीय लोगों को 

सोचकर गांधी वंश का 

 पता लगाकर

 संसार के सामने लाना है।

 वास्तविक गाँधी वंश का आदर

 युवकों को जान समझकर 

 आदर करना चाहिए।