जागृति
एस. अनंत कृष्णन, चेन्नई तमिलनाडु
12-10-26.
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भारत के लोगों में
चाहिए जागृति।
राष्ट्रीय एकता योजना में केंद्र सरकार के साथ
प्रांतीय सरकार चलना
जागरण है।
प्रांतीय मोह ,
प्रांतीय भाषा
प्रांतीय प्रगति में
केंद्र सरकार का ध्यान और सहयोग जागृति है।
जवानों में छात्रों में
स्वतंत्रता संग्राम के
शहीदों की जीवनी
तन मन धन के त्याग
जगाना ,
उनकी जीवनी के अनुकरण करना जागृति है।
होनहार बिरवान के होत चीखने पात
बचपन से ही पालन करना,
अनुशासन से रहना
अच्छी चाल चलन सीखना जागृति है।
माता-पिता गुरु देव
को सदा निभाना जागृति है।
वीर जवान प्रत्यक्ष देव
देश के रक्षक,
किसान जनता की भूख मिटाने का आधार।
उनके प्रति श्रद्धा रखना
जागृति है।।
पल पल देश के कल्याण में लगना।
जागृति है।
ज्ञान पिपासा सदा रखना जागृति है।
सर्वैश्वर ही जगत की सृष्टि का आधार।
जान समझकर
सदा सर्वकाल
जपना, मन को आत्मा में विलीन कर लेना
आत्मज्ञान पाने की जागृति है।
वो
जागृति
एस. अनंतकृष्णन, चेन्नई, तमिलनाडु
12-10-2026
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भारत के जन-जन में
जागृति का भाव जगाना है।
राष्ट्रीय एकता के संकल्प को
जीवन में अपनाना है।
केंद्र और प्रांतीय सरकारें
मिलकर जब आगे बढ़ती हैं,
राष्ट्रीय हित को सर्वोपरि रखकर
जनकल्याण की राह चुनती हैं,
तभी सच्ची जागृति आती है।
प्रांतीय अस्मिता का सम्मान,
प्रांतीय भाषाओं का उत्थान,
प्रांतीय प्रगति के लिए
केंद्र का सहयोग और ध्यान—
यही राष्ट्रीय जागृति की पहचान।
जवानों और विद्यार्थियों में
स्वतंत्रता-संग्राम के शहीदों की
गौरवगाथा जगाना,
उनके त्याग, तपस्या और बलिदान को
हृदय में स्थान दिलाना,
उनके आदर्शों का अनुकरण करना—
यही सच्ची जागृति है।
“होनहार बिरवान के होत चीकने पात।”
बचपन से ही संस्कार देना,
अनुशासन का पाठ पढ़ाना,
सदाचार और सद्व्यवहार से
जीवन-पथ को सुंदर बनाना—
यही जागृति का संदेश है।
माता-पिता, गुरु और देव—
इन सबके प्रति श्रद्धाभाव रखना,
उनके आदर्शों को जीवन में उतारना,
अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक पालन करना—
यही जागृति है।
वीर जवान प्रत्यक्ष देवतुल्य,
देश की सीमाओं के रक्षक हैं।
किसान अन्नदाता बनकर
जन-जन की भूख मिटाते हैं।
उनके परिश्रम और त्याग के प्रति
श्रद्धा-सम्मान प्रकट करना—
यही सच्ची जागृति है।
पल-पल देश के कल्याण में
अपना योगदान देना,
राष्ट्रहित को ध्यान में रखकर
कर्तव्य-पथ पर आगे बढ़ना—
यही जागृति है।
ज्ञान की पिपासा सदा बनाए रखना,
निरंतर सीखते और समझते रहना,
अज्ञान के अंधकार को मिटाकर
ज्ञान का प्रकाश फैलाना—
यही जागृति है।
सर्वेश्वर ही इस जगत की
सृष्टि के मूल आधार हैं।
इस सत्य को हृदय से समझकर
ईश्वर का निरंतर स्मरण करना,
मन को अंतर्मुखी बनाकर
आत्मा में एकाग्र होना,
आत्मज्ञान की अनुभूति पाना—
यही आध्यात्मिक जागृति है।
राष्ट्रीय चेतना से आत्मचेतना तक,
कर्तव्य-बोध से ईश्वर-बोध तक—
मानव जीवन की संपूर्ण यात्रा
जागृति से ही सार्थक होती है।
जागो, जगाओ, जागृति फैलाओ!
राष्ट्र को सशक्त बनाओ,
मानवता को समृद्ध बनाओ,
आत्मज्ञान से जीवन को आलोकित बनाओ।